Isharon isharon mei

उसने ,इशारों -इशारों में ,कुछ कह दिया। 
हम तो ,उन आँखों की भाषा पढ़ गए  ,
और हाज़िरजबाब ,मुस्कुराहट से दिया। 
हमने भी इशारों में,इज़हार कर दिया।
 
वो इस कदर ,इठलाकर चले गए ,

जाते -जाते ,हमारे दिल की धड़कने बढ़ा गए। 
इशारों ही इशारों में ,मोेहब्बत बढ़ने लगी ,
जैसे ,चंदा की चाँदनी बढ़ने लगी। 
मोेहब्बत परवान चढ़ने लगी।

कभी हाथों से इशारे ,कभी आँखों के इशारे ,
इशारों ही इशारों में ,बात बढ़ने लगी।
 
मूक दर्शक बन रह गए  हम ,
जब 'करवा चौथ ''पर वो ,
चाँद को जल चढ़ाने लगी। 
तन्हा थे ,तन्हा रह गए ,
जब ''टाटा ''कर वो जाने लगी। 
 
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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