Badli ka chand [part 8 ]

शब्बो किसी अनजान महिला के बहकावे में आकर ,उसके साथ जाने के लिए तैयार हो जाती है किन्तु वहां पर दुर्घटनाग्रस्त एक व्यक्ति को, उस महिला पर शक़ हो जाता है और वो स्वयं तो शब्बो की कोई  भी सहायता  कर पाने में अपने को असमर्थ पाता  है किन्तु शब्बो को उस महिला से सचेत रहने के लिए कहते हैं।  उस महिला को उस व्यक्ति पर  शक़ हो जाता है और वो शब्बो से पूछती है -बता ,वो आदमी तुझे क्या समझा रहा था ?अब तो शब्बो को भी उन अंकल की बात पर विश्वास हो जाता है कि ये महिला सही नहीं है। इससे पहले की शब्बो सम्भल पाती ,वो अपनी चाल खेल चुकी थी और वो तीन -चार व्यक्ति बुला लेती है और शब्बो का मुँह बंद करके पेड़ के पीछे छिप जाती है। वे अंकल चौकन्ने होकर ,उस लड़की को चारों तरफ देखते हैं किन्तु वो तो नहीं दिखती ,तब वो परेशान होकर एक व्यक्ति से ,उस बच्ची और महिला के विषय में पूछते हैं किन्तु वो अपनी ही परेशानियों में इंकार कर देता है। तभी उन्हें एक वेन कच्चे रास्ते पर ,उतरती दिखती है ,इसमें भी कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि इस बस में जिनके भी परिवारजन थे ,वे उन्हें लेने अथवा मिलने आ ही रहे थे। अब आगे -


तभी वो महिला ,उन महाशय को,पेड़ के पीछे से निकलती  दिखती है ,साथ में वो लड़की भी ,जिसे वो खींचकर वेन की तरफ ले जा रही थी। तभी उन्होंने शोर मचाया -कोई उसे बचाओ..... कोई उसे बचाओ..... उन्होंने चीखने में अपनी पूरी ताकत लगा दी। तब वो अपनी ओर लोगों का ध्यान , खींचने में सफल हुए ,तभी वो गाड़ी धूल उड़ाती हुई ,सड़क पर पहुंच चुकी थी। तभी एक व्यक्ति बोला -क्या बात है ,क्यों चिल्ला  रहे हैं ?क्या बहुत दर्द हो रहा है ?वो बोले -नहीं , अभी एक महिला एक बच्ची का अपहरण करके ले गयी ,उसे बचाइए। सभी ने उनके हाथ के इशारे की तरफ देखा तो- दूर एक वेन जा रही थी। इतनी जल्दी तो कोई भाग भी नहीं सकता। तभी एक व्यक्ति जिसने पगड़ी पहनी थी ,उनके समीप आकर बोला -कौन थी वो बच्ची ?क्या तुम्हारी बच्ची थी ?

जी नहीं ,वो मेरी बच्ची नहीं थी किन्तु जो महिला उसे ले जा रही है ,वो उसकी बच्ची भी नहीं है ,उसे बचाइए !पुलिस को फोन कीजिये।बचाव कार्य में लगे ,व्यक्ति भी उनके पास आये और बोले -आपको क्या पता ?कि वो बच्ची कौन है ?ऐसे वातावरण में जहां सबको सहायता की आवश्यकता है ,क्या पता ? वे उसके परिवारवाले ही हों ,आपको कोई गलतफ़हमी हो गयी हो। वो व्यक्ति बेबसी की सी हालत में बोला -मैंने उस बच्ची से बात की है ,वो तो बस में में थी ही नहीं ,वो तो पानी के रास्ते ,अपने गांव से बहते हुए आई थी ,पता नहीं, बेचारी बच्ची !कितने दिनों से भटक रही थी और उस महिला ने उसे ,उसके परिवारवालों से मिलाने का लालच देकर ,बहका लिया। कृपया करके उस बच्ची को बचाइए !वरना अनर्थ हो जायेगा ,पता नहीं ,वो इस बच्ची को लेकर ,कहाँ चली जाये ?तभी भीड़ में से एक व्यक्ति बोला -क्या वो बच्ची आपकी कुछ लगती थी ?

वो व्यक्ति परेशान होकर बोला -भलेमानस !इंसानियत भी कोई चीज है कि नहीं। तभी एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया और बोला -हम उस महिला का कैसे पता लगायेंगे ?बस में जो यात्री थे, उस  सूची में उस महिला का नाम अवश्य होगा। जिस वेन से वो लोग भागे हैं ,वो स्लेटी  रंग की है उस व्यक्ति ने बताया ,जब वो भाग रहे थे ,तो मैंने देखा ,उसे लगा -शायद इसी सूचना से उस बच्ची का पता चल सके। 

उधर जब शब्बो को वेन में बिठाया तब  उसके समीप शेरू बैठा था ,उसने शब्बो को कसकर पकड़ा और उसका मुँह खोलते हुए बोला -देखो तुम शोर मचाओगी तो हम तुम्हारे लिए बुरे बन जायेंगे और शांत रहोगी तो हमारे साथ रहकर मज़े करोगी, कहकर वो बुरी तरह से हंसा। शब्बो ने 'हाँ' में गर्दन हिला दी। तब उसने शब्बो को गलत तरीक़े से छुआ तो उस आंटी ने देख लिया और बोली -शेरू अपनी हरकतों से बाज आओ !नन्हीं कोमल कली है और लोग भी तो यहां हैं। तभी एक बोला -तारा! तुम हाथ तो अच्छे माल पर रखती हो किन्तु आज तो'' चाँद '' ही उठा लाई। तारा प्रसन्न होते हुए बोली -तारा की पारखी नजरों से कोई नहीं बच सकता ,वो तो भला हो ,मैं तो अपनी गाड़ी से जा रही थी ,तभी मैंने दुर्घटना होते देखी और मैं वहीं रुक गयी ,हो न  हो ,आज कोई न कोई तो वक़्त का मारा तारा टूटेगा ही ,जो अनाथ हो गया हो या फिर बिछड़ गया हो। तारा तो ऐसे ही मौक़े की तलाश में रहती है और देखो , तारा की झोली में आज तो चाँद आ गिरा। 




शब्बो अब तक तो समझ चुकी थी कि ये आंटी और ये लोग सभी गंदे हैं और वो इनमें फंस चुकी है ,तभी उसे उन अंकल की कही  बात स्मरण हो आई -बेटा ,दिमाग़ से काम लो ,समझदारी से सोच -विचारकर काम करना। वो अभी बैठी ,सोच ही रही थी ,बोली -आंटी  ! मेरा गाँव अभी कितनी दूर है ?चुपकर ,अब तो तुझको पता ही चल गया होगा ,तुझे हम तेरे गांव -वाँव नहीं ले जा रहे। तभी एक व्यक्ति बोला -क्या तारा ?बच्ची से इस तरह बात करते हैं ,फिर वो शब्बो की तरफ देखते हुए बोला -तुम्हारे गांव भी ले जायेंगे ,पहले तुम हमारा गांव देख लो ,शायद तुम्हें वो पसंद आ जाये। शब्बो ने जैसे उसकी बात मान ली और बोली -ठीक है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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