Badli ka chand [part 5 ]

अभी तक आपने पढ़ा ,शब्बो ,बलविंदर और उनके दोस्त घूमने जाते हैं ,वहाँ से वो नहर पर जाते हैं।बलविंदर को छोड़कर ,सभी को तैरना आता था।  शब्बो की सहेली, मस्ती में, बलविंदर को नहर में धक्का दे देती है ,जिस कारण वो अपने को संभाल नहीं पाता और बहाव के साथ बह जाता है। शब्बो उसे बचाने के लिए ,नहर में कूद जाती है और ऊंचाई से नीचे गिरने पर ,उसके सिर में चोट लग जाती है, जिस कारण वो बेहोश हो जाती है। जब उसे होश आता है तो वो किसी ऐसे स्थान पर थी ,जहाँ पहले से ही एक बस दुर्घटना हो चुकी थी और दुर्घटना ग्रस्त लोगों को के लिए ''बचाव कार्य ''चल रहा था। उधर बलविंदर को गांववालों ने पहले ही बचा लिया था। किन्तु अभी शब्बो ''गुमशुदा ''थी। उसकी मम्मी की हालत रो -रोकर खराब हो रही थी। अब आगे -


शब्बो वहां राहत कार्य में लगे शिविर में ,अपनी चोट पर पट्टी बंधवाती है और जो कुछ भी खाने को मिलता है ,  खा लेती है। थोड़ा आराम करके ,उसके शरीर में चेतना सी आती है तब वो वहां उपस्थित लोगों से पूछती है -ये कौन सी जगह है ?और जब वो अपने गांव के विषय में बताती है तब उसे पता चलता है कि वो तो अपने गांव से बहुत दूर है। शायद उन लोगों ने मुझे ,मरा भी समझ लिया हो ,क्योंकि जब वो नहर में कूदी थी।पास बैठी एक महिला से बोली -आज क्या तारीख़ है ? आठ तारीख़ है ,उस महिला ने बताया। जब हम नहर पर गए थे ,तो पांच तारीख़ थी ,इसका मतलब मुझे बहते हुए अथवा बेहोशी में तीन दिन हो गए , सोचकर ही रोने लगी। उसे रोते  देखकर ,वो महिला बोली -तुम्हारे घरवाले कहाँ हैं ?क्या वो इस दुर्घटना में मारे गए ?
नहीं ,मैं तो अकेली ही हूँ ,मैं तो नहर में डूब  गयी थी और बहते हुए ,यहां तक पहुंच गयी। उसे अकेले देखकर उस महिला की आँखें चमकने लगीं और उस पर प्यार उड़ेलते हुए ,बोली -रो मत ,मेरी बच्ची ! हमारे साथ रहो ,हम तुम्हें ,तुम्हारे गांव पहुँचा देंगे। उसकी बातों से ,शब्बो थोड़ी आश्वस्त हुई और बोली -क्या आप लोग मेरे गांव जायेंगे ?नहीं ,हम उधर से निकलते हुए जायेंगे ,तो तुम्हें ,तुम्हारे गांव में छोड़ देंगे ,वो बोली। 
 
उनकी बातें एक व्यक्ति सुन रहा था ,जो इस दुर्घटना में चोट खाये था और वो दवाई लेकर ,थोड़ा आराम कर रहा था। उसके परिवार वाले भी, उसे लेने आने वाले थे। उसने देखा एक बच्ची को ये औरत बड़े प्रेम से बहला -फुसला रही है। उसकी नज़र उन दोनों पर थी किन्तु उसने इस बात का उन्हें आभास नहीं होने दिया। वो महिला ,उसे साथ लिए घूम रही थी।  किसी ने पूछ भी ,तो उसने बताया -ये लड़की मेरे ही संग है। शब्बो भी अपने गांव जाने के लिए उसकी हाँ में हाँ मिला रही थी। उसे लग रहा था -'अब ये महिला ही उसके गांव पहुंचाने का जरिया है।
 शब्बो बड़ी तो हो रही थी किन्तु अभी इतनी बड़ी भी नहीं हुई थी ,कि उसे दुनियादारी की समझ हो वो तो इस समय जो भी उससे प्रेम से बात कर  रहा था, वो ही विश्वसनीय था। विश्वास तो किसी न किसी पर  करना ही था ,किसी के दिल में तो झाँक नहीं सकती थी ,कि उसके मन में क्या चल रहा है ?एक -दो से पहले पूछा भी था -तो किसी ने ठीक से जबाब नहीं दिया था। अब उसके पास , इसी महिला पर ही विश्वास कर सकने के सिवा और कोई चारा भी नहीं था। किन्तु अभी जैसे शब्बो पर उस कुदरत की मेहर थी ,जो वो अनजान व्यक्ति उन दोनों पर निगाहें टिकाये था। 

कहते है ,न ,जब व्यक्ति के मन में चोर हो तो ,कुछ ज्यादा ही सतर्क रहता है। तभी उस महिला के समीप एक व्यक्ति आया और बोला -बहनजी आप कहाँ से है ?वो शायद सभी पीड़ित लोगों की एक सूची बना रहा था ,ताकि पता चल सके, कितने लोग मिले हैं और कितने गायब यानि अभी तक गुम हैं ?उसने उस महिला का नाम और जगह  का नाम पूछा। उसने शब्बो से भी पूछा -शब्बो ने बताया -मैं उस बस में नहीं थी ,मैं तो...... उसके बताने से पहले ही ,वो महिला बोली -बेचारी बच्ची सदमे में है ,ये मेरे ही संग है कहकर उसने शब्बो की तरफ आँख मारी। शब्बो को लगा -शायद इस व्यक्ति से छुपाना है ,और बोली -हाँ -हाँ... 
उस औरत  ने ,शब्बो को देखते ही भांप लिया था -ये तो मिटटी और परेशानी में सना कोहिनूर है ,इसके नयन -नक्श कितने तीखे और सुंदर हैं ?ये तो ,जब अपनी जवानी में आएगी ,तो तहलका मचा देगी। ज्यादा किसी ने देखा ,तो किसी को भी शक्क हो सकता है। यही सोचकर अब ,शब्बो से बोली  -तुम ये कपड़ा ओढ़ लो ,और इससे अपना चेहरा ढ़क लो ,तुम इतनी सुंदर हो ,किसी की भी बुरी नज़र लग सकती है।
 
उधर बलविंदर को बचाकर ,गांववाले ले तो आये किन्तु इस हादसे से ,वो बुरी तरह डर गया था। अब उसकी बुआ चेतना भी ,घबरा गयी और बोली -आज  इसे कुछ हो जाता तो ,मैं अपने  भाई को क्या जबाब देती ?जीवनभर का कलंक लग जाता ,वो भी इस पम्मी की कुड़ी के कारण। किन्तु ये बात कुछ आगे बढ़ती ,उसके पति ने उसे चुप करा  दिया और बोला -तुम्हारा भतीजा तो बच भी गया किन्तु उस बच्ची का तो कुछ पता ही नहीं ,तुम्हारे भतीजे को बचाने के वास्ते ही तो ,वो नहर में कूदी। पता नहीं ,बेचारी बच्ची जिन्दा भी है या नहीं। है भी ,तो कहाँ ?गाँव के लोग ,तो नहर के रास्ते काफी दूर तक देख आये किन्तु उसका अभी तक कुछ  पता नहीं चला। बेचारी पम्मी की इकलौती बेटी है ,उसका तो रो -रोकर बुरा हाल है ,तुम्हें तो जाकर उसे ढांढस बंधाना  चाहिए। अब तो उसके पति ने पोलिस स्टेशन में भी रपट लिखा दी। 

क्या... अभी रपट करने की क्या जरूरत आन  पड़ी ?पुलिस खामख़ाँ ,बच्चों को परेशान करेगी , चेतना बोली। तुम्हें बच्चों की परेशानी की पड़ी है ,उस बच्ची की नहीं ,तुम भी न..... स्वार्थ की कोई सीमा नहीं कहकर  वो बाहर निकल गए। 
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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