ए मेरी डायरी ,आज तुझे करुणा पर मैं ,एक संस्मरण सुनाती हूँ या लिखती हूँ। हमारी ज़िंदगी में कुछ लोग ऐसे अवश्य आ जाते हैं ,जो हमारे दिल -दिमाग पर, एक छाप छोड़ जाते हैं और वो स्मृतियाँ कभी भी किसी भी पल उस व्यक्ति को स्मरण करा जाती हैं आज मैं ,तुझे एक ऐसी करुणामयी महिला की कहानी सुनाती हूँ -
घर के बाहर एक कुत्ता ,बड़े -बड़े जोर से चिल्ला रहा था। उसके रोने की आवाज से ही लग रहा था कि वो अत्यधिक कष्ट में है। हमसे रहा नहीं गया ,हम घर के सभी लोग ,बाहर निकले तो देखा -उसका जबड़ा बुरी तरह से फ़ट गया था और उसका एक दाँत भी टूट कर ,लटक रहा था। देखने में बड़ा ही वीभत्व था किन्तु इस तरह उसकी परेशानी तो, दूर नहीं होगी। मौहल्ले के ओर लोग भी आ गए ,धीरे -धीरे पता चला -कि ये कुत्ता सो रहा था या लेटा था, एक स्कूटर वाला उसके जबड़े पर स्कूटर चढ़ाकर चला गया। जिस कारण इसकी ऐसी हालत हो गयी और ये दर्द से चिल्ला रहा था और इधर -उधर भाग रहा था।
तभी एक बुजुर्ग महिला ,अपने बेटे को साथ लेकर, उसके समीप जाती हैं ,मैं और अन्य लोग चिल्लाने लगे, ऐसे समय में उसके समीप जाना ठीक नहीं किन्तु उस महिला ने किसी की भी बातों पर ध्यान न देकर ,उसके पास पहुंच गयी। उसके बेटे के हाथ में एक कैंची थी। हम खड़े देख रहे थे- कि ये करना क्या चाहती हैं ?बल्कि ये कहो -हमसे तो देख ही नहीं जा रहा था ,जब देखा ही नहीं जा रहा था ,तो ऐसा कार्य करने की तो सोच भी नहीं सकते। उस बुजुर्ग महिला ने उसके सिर पर हाथ फेरा ,वो थोड़ा शांत हुआ किन्तु उसका दर्द कम नहीं हुआ। तभी उसके बेटे ने बड़ी फुर्ती से उसका टूटा हुआ दांत ,जो उसके जबड़े से बाहर लटककर उसे कष्ट दे रहा था। उस बुजुर्ग महिला के बेटे ने, कैंची से काट दिया और उसे पट्टी भी बाँधी। हमें आश्चर्य हो रहा था कि इस कुत्ते ने इस महिला को कुछ नहीं कहा वरन धीरे -धीरे शांत हो गया। उन्होंने उसे दूध में दर्द की दवाई भी डालकर दी।
धीरे -धीरे सभी लोग, अपने -अपने घरों के अंदर चले गए। उन महिला ने उसको ठीक से सुलाया और तब घर के अंदर आईं ,वो और कोई नहीं ,मेरे पति की दादी थीं। जिनके मन में ,मोहल्ले में रहने वाले कुत्तों के प्रति दया ,करुणा थी। वो प्रतिदिन उन्हें रोटी देती थीं ,कहतीं -''ये तो बिन झोली के फ़कीर हैं। एक या दो रोटी देने से , क्या हो जायेगा ?इन्हें तो पालते भी नहीं ,फिर भी इन दो रोटियों के बदले ,हमारे घर की सुरक्षा करते हैं। कोई भी मौहल्ले में ,गलत व्यक्ति घुस जाता, तो ये भौंक -भौंककर उसके पीछे पड़ जाते। उनके मन में इनके प्रति इतनी करुणा थी- कि बारिश होती तो ,उन्हें घर के अंदर ले आतीं ''जबकि लोग घर गंदा न हो जाये ,इस कारण कोई भूला- भटका आ भी जाता तो उसे भगा देते किन्तु मेरी सास की सास तो उन्हें अंदर ले आतीं।
सूखी [कुतिया का नाम ] जब गर्भवती हुई , तो उसके खाने के लिए समय पर रोटी बनवातीं और उसके बच्चों के होने पर उनका ख़्याल रखतीं ,कभी हलवा या फिर गुड़ की [पात ]जो जच्चा को दी जाती है ,वो बनवातीं। अन्य कोई, उसके बच्चे छेड़ता ,तो गुर्राती किन्तु हमारी ददिया सास को कुछ नहीं कहती । तब वो कहतीं -ये भी प्रेम की भाषा समझते हैं ,इनमें भी जान है ,ये भी पहचानते हैं -कि कौन इंसान कैसा है ?और ये कभी भी बेमतलब नहीं भौंकते ,एक रोटी के बदले ,सुरक्षा देते हैं।इतनी करुणा थी ,उनके मन में जीवों के प्रति ,उसके पश्चात तो उन्होंने एक कबूतर को भी बचाया।अब क्या बताऊँ ?जो जीव भी उनके सम्पर्क में आता ,अपने को सुरक्षित महसूस करता,उनका स्पर्श ही ऐसा 'करुणामयी 'था।

