पल में रुलाती, पल में खुश कर जाती,
तितली सी... रंगीन नज़र आती है।
कभी लगता , हाथ में आ गई है।
तो कभी लगता, हाथों से छूट गई है, जिंदगी !
कभी किस्मत के सहारे,
तो कभी कर्मों से संवारी है, जिंदगी !
कभी उबड़ -खाबड़ पथरीली सी नजर आती है।
कभी समतल सी, फिसलती है ,जिंदगी !
कभी दाल में बघार सी महकती नजर आती है, जिंदगी !
कभी परिंदो सी उड़ान भरती है ,
कभी धरती पर रेंगती सी नज़र आती है ,ज़िंदगी !
कभी 'मिर्ची सी 'तीख़ी लगती है,तो कभी ,
चाशनी भरी रसगुल्ले सी मीठी लगती है, जिंदगी !
कभी ग़जरों की महक सी सजीली है ,
तो कभी कड़वाहट से भरी, बेपरवाह लगती है,ज़िंदगी !
कभी मुस्कुराती ,नाजुक़ सी लगती है ,
तो कभी , काँटों की चुभन सी लगती है , ज़िंदगी !
कभी गुमसुम सी , खोई -खोई ,
तो कभी ,खिलखिलाकर ज़ोर से हंसती है ,ज़िंदगी !
