pyara ansu

सितारा बनकर रह गया ,
  मात्र इक आँसू। 
     जो बह न सका ,
         किसी प्यारी कसम से। 
पशोपेश में था ,कि 
      बाँधा किसी ने अपने से। 
प्यार ने बाँधा इसे 
    प्यार से ,प्यार के लिए बहाना चाहा। 
    उस सितमगर ने तो देखा भी नही,
    अचकचाकर रह गया। 
बहना चाहकर भी ,बह न सका। 
उस अहसास की याद  दिला गया। 
दिल में उठा वो तूफ़ां ,
          भीतर ही दफ़न होकर रह गया। 
उस ऑंसू की कीमत का ,
          शायद उसे एहसास हो गया। 
किन्तु मुझे भीतर तक झकझोर गया। 
वो मात्र एक बूँद आंसू , 
       जो लुढ़क न सकी ,
     मेरे कपोल से अधरों तक ,
       कंचुकी से आँचल तक ,
      थिरक कर रह गया ,
                 वो कपकँपाता सितारा ,
               वो झिलमिलाता सितारा। 
नयनों में इन्द्रधनुष बन  छा गया।
 आँख का मोती बनकर रह गया। 
      मेरा प्यारा सितारा ,
         मेरा आँसू ,मेरा इंद्रधनुष।  
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post