Shaitani sa.....34

माता -पिता भी क्या करें ? जब अपनी परवरिश में ही खोट नजर आने लगे। बेटी को पढ़ाना चाहते थे किन्तु वो पढ़ी नहीं ,उस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई। वो जो करना चाहती थी, करने दिया। वो अब उम्र के उस पड़ाव पर थी। तनिक भी लापरवाही से,'पांव फिसलते'' देर नहीं लगती। बच्चे बड़े हो रहे हैं ,उन्हें समझदार  होना चाहिए  किन्तु ये उम्र ऐसी ही तो है ,नादानियों भरी ,बच्चे को लगता है -वो जो कर रहा है ,सही है।

 अब ऐसे ही हालात कुछ केशवदास जी के घर में चल रहे हैं। प्रेम यानि की केतकी दीपक से प्रेम करने लगी है। और उसे लगता है ,इसमें कोई बुराई भी नहीं है। वो तो दीपक को लेकर भावी सपने संजोने लगी। तभी दीपक ने अपनी मंशा पूर्ण करने के उद्देश्य से केतकी को ,उन्हीं के अहाते में एकांत में बुलाया किन्तु केशवदास जी के असमय आ जाने पर उसकी योजना निष्फल रही। पकड़े जाने पर उसने केतकी का ही नाम लिया।


 केतकी समझ ही नहीं पा रही थी ,कि ये दीपक का सच्चा प्रेम था ,या वो उसे फुसला रहा था। उस बेचारी की भी क्या गलती ? बड़े -बड़े लोगों की मति भ्र्ष्ट हो जाती है ,सही -गलत के भ्र्म से बाहर नहीं निकल पाते। केतकी तो ज़िंदगी के प्रथम सोपान पर ही थी। समय रहते उसके पिता ने ,उसकी राह बदलने का प्रयास किया, जिसके कारण केतकी अपने परिवार वालों से नाराज है। वो लोग वही सोच रहे हैं ,जो उनकी बेटी और एक सभ्य ,कुलीन परिवार की बेटी के लिए उचित होगा। 

आनन -फानन में रेवती के पास' हां 'का पत्र पहुंच गया। प्रसन्न होते हुए ,रेवती ने अपनी जेठानी से बताया-  मेरी मौसी की लड़की है ,बड़ी अच्छी सुंदर और समझदार है। मैंने अपने देवरजी के विवाह की बात उनसे की थी। आज उनका जबाब आ गया। 

अच्छा !उन लोगों ने क्या कहा ?

आज अभी तो पत्र आया है ,उन्होंने हाँ कर दी है। 

अच्छा है ,सामने से रेवती की जेठानी ने कह तो दिया किन्तु मन ही मन चाहती थी ,उसकी कोई रिश्तेदार इस घर की बहु बनकर आती किन्तु  देवर के लिए ,अपनी रिश्तेदारी में , ऐसी कोई लड़की उसे नजर नहीं आई थी। इसलिए प्रत्यक्ष बोली -जहाँ भी हो ,उससे क्या फ़र्क पड़ता है ? बस लड़की अच्छी आ जाये। दोनों ही अपने देवर से बहुत  स्नेह  करती थीं। 

रेवती भी मन ही मन चाहती थी, मेरी रिश्तेदारी से जो भी लड़की आएगी। जब जेठानी से मेरा झगड़ा होगा तो वह मेरा ही साथ देगी। एक से भले दो ,परिवार में मेरा मान भी बढेगा,'' कि मैंने अपने देवर का विवाह करवा दिया। खैर ! यह सब छोड़िए ,सबकी अपनी-अपनी समझ है। हर इंसान अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना, कुछ अलग करना चाहता है। पढ़ा -लिखा इंसान नौकरी में तरक्की की सोचता है किंतु जो लोग, जीवन के चक्रव्यूह में घर -गृहस्थी में फंसे हैं ,विशेष रूप से महिलाएं, उनकी सीमाएं तो उस घर तक ही है, इसलिए वह घर से बाहर का सोच ही नहीं सकती। वही उसकी कर्मस्थली है। लड़कर या फिर प्रेम से ,उस परिवार में अपनी पहचान बनाये रखना चाहती है। 

रेवती भी उनमें से एक ही थी , इधर केतकी के परिवार वालों ने रेवती को हाँ में पत्र भेज दिया था। रेवती ने, तुरंत ही प्रेम का एक फोटो मंगवाया और अपने देवर को भेज दिया और उनसे पूछा - छुट्टी कब से हैं ,घर कब आ रहे हैं। अबकि त्योहार पर सीधे घर चले आना, तुम्हारे लिए एक प्यारी सी, सुंदर सी लड़की देखी है।घरवाले कह रहे हैं - घर आओगे, तो तुरंत ही रिश्ता तय कर देंगे। इस पत्र के साथ लड़की की तस्वीर भेज रही हूं। इसे देख लेना, देवर जी ! वैसे एक बात बोलूं ,लड़की पसंद हो तो तुरंत जवाब देना चाहो तो मुझे ,पत्र लिखकर भेज सकते हो। तुम्हारे भइया तो लड़की की तस्वीर भेजने के लिए मना कर रहे थे। कह रहे  थे - -हमारा गोलू वहीं विवाह करेगा ,जहाँ हम चाहेंगे, किन्तु मेरा मन नहीं माना ,भई ,तुम्हें भी तो अधिकार है ,अपनी होने वाली दुल्हन को देखो ! इसीलिए तस्वीर भेज रही हूँ। मैं लड़की वालों को जवाब दे दूंगी। तुम्हारी मंझली भाभी ,रेवती !

चंदकिरण जो फौज में सूबेदार पद पर है। मेहनती  लड़का है, बचपन में ही उसकी मां गुजर गई थी। भाभियों ने ही उसे पाल -पोसकर बड़ा किया है। समय ने उसे शीघ्र ही समझदार बना दिया। मेहनती होने के साथ -साथ सभी बड़ों का सम्मान करता था। अपने परिवार से बेहद प्रेम करता था। जिन दिनों वह अपने घर में था। पढ़ रहा था ,जो कोई भी कोई काम बताता, वह उसे प्रसन्नतापूर्वक कर देता। इसमें फिर चाहे भाभी हो या फिर भाई ! उसकी गलती पर कभी भाई डांट भी देता तो कभी बुरा नहीं मानता। 

एक दिन तो उसके भाई ने उसकी कक्षा के दोस्तों के सामने ही उसे बहुत डांटा ,जब तुझसे कहा था स्कूल जाने से पहले ये काम करके जाना था ,तो तूने सुना क्यों नहीं ?

वो चुपचाप उठा और उस कार्य को करने लगा ,उसके भाई कहकर और काम बताकर चले गए। 

तब उसके दोस्तों ने कहा ,क्या यार !उन्हें इतना भी नहीं, बाद में कह देते।

 एक दिन तो  उसका दोस्त तेजवीर ,उसके साथ था ,उसने कहा - यार ! तेरा कैसा भाई है ?इतनी ठंड पड़ रही है ,तुझे स्कूल भी जाना होता है। जब काम नहीं किया तो अब कर दिया ,इसमें उन्हें इतना कहने की क्या ज़रूरत थी ?उन्हें इतना भी नहीं कि तेरे दोस्तों के सामने ही बेइज्जती कर  रहे हैं। मेरा भाई होता तो मैं कभी भी सहन नहीं करता और उनसे मेरा झगड़ा भी हो जाता। 

कैसी  बेइज्जती ? चंदकिरण  ने अपने दोस्त तेजवीर कहा। भाई हैं ,बड़े हैं ,दो -चार बात कह भी दी, तो क्या हुआ ?मेरी गलती तो थी ,वे भी तो ठंड में उठकर सुबह काम पर जाते हैं। उन्हें, मुझसे उम्मीद थी ,तभी तो उन्होंने कहा। दोस्तों के सामने कैसा अपमान ? तुम भी तो मेरे अपने हो। वे बड़े हैं , बड़े भइया ने कुछ कह दिया ,हमने वह काम कर दिया ,बात ख़त्म !बात को क्यों बढ़ाना है ?

उसकी बात सुनकर ,तेजवीर अचम्भित होकर, उसे देखने लगा और बोला - तेरी तो सोच ही अलग है। मेरा भाई मेरे दोस्तों के सामने ,यदि मुझे ऐसे डांटता तो मैं सहन नहीं कर पाता। 

बड़े भाई ने कुछ कहा ,तो क्या हुआ ?अपने ही तो हैं ,हमसे नहीं कहेंगे तो और किससे कहेंगे?तभी परिवार चलते हैं। थोड़ा सहन करना भी सीखना चाहिए ,तभी मिलकर परिवार चलते हैं। ऐसी सोच के साथ चंदकिरण उस परिवार में रह रहा था। भाभियों का भी सम्मान करता था। 

 जब से उसकी नौकरी लगी है। तब से भाभियों के खर्चों का ख्याल विशेष रूप से रखता है ,उन्हें खर्चे के पैसे भी दे देता है। वो उसके लिए भाभियाँ नहीं, वो उसकी मां हैं । उसे भाभियों में ही माँ का चेहरा नजर आता। चंद्र किरण को लगता है, कि उसकी भाभियों ने ही उसे पाल -पोसकर बड़ा किया है ,वो उसकी मां के समान है और अब उसका कर्त्तव्य  बन जाता है कि अपनी माओं का ख्याल रखे।

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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