Kya chahti hun

अपने आप को जानना चाहती हूं। 

महक उठे तन मन ख़ुशियों का वो मंजर चाहती हूँ। 

तेरी पलकों का मोती बन,जीना चाहती हूँ।

 तेरे दिल में तूफां हो , मेरे इश्क़ का,


 ''सैलाब ए इश्क़ ''से गुजरना चाहती हूँ। 

 तन्हाइयों में तेरी ,याद बन जाऊँ ,

यादों में ही सही,तेरी आरजू बनना चाहती हूँ। 

 याद कर मुझे ,जब भी कभी आये हंसी ,

तेरे अधरों की मुस्कान बनना चाहती हूँ ।

 उन्माद ,सुरूर हो ,मेरी मुहब्बत का ,

 तेरी आँखों में, वो मस्ती ,वो ख़ुमार चाहती हूँ। 

कभी तू, निराश, थका हो आये दर पे मेरे , 

ज़िंदगी की तेरे' उमंग ''बन जाना चाहती हूँ।

तेरे ख़ामोश लबों पर, थरथराये नाम मेरा,

 दिल की राह से,' रूह' में उतरना चाहती हूँ।

तप्त धूप में ,तेरी छाया बन महकना चाहती हूँ।

तेरा ख़्वाब बन ,तेरा ''पाक़ इश्क़'' चाहती हूँ।  

मैं तेरी बन ,संग तेरे ,जीना, मुस्कुराना चाहती हूँ।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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