अपने आप को जानना चाहती हूं।
महक उठे तन मन ख़ुशियों का वो मंजर चाहती हूँ।
तेरी पलकों का मोती बन,जीना चाहती हूँ।
तेरे दिल में तूफां हो , मेरे इश्क़ का,
''सैलाब ए इश्क़ ''से गुजरना चाहती हूँ।
तन्हाइयों में तेरी ,याद बन जाऊँ ,
यादों में ही सही,तेरी आरजू बनना चाहती हूँ।
याद कर मुझे ,जब भी कभी आये हंसी ,
तेरे अधरों की मुस्कान बनना चाहती हूँ ।
उन्माद ,सुरूर हो ,मेरी मुहब्बत का ,
तेरी आँखों में, वो मस्ती ,वो ख़ुमार चाहती हूँ।
कभी तू, निराश, थका हो आये दर पे मेरे ,
ज़िंदगी की तेरे' उमंग ''बन जाना चाहती हूँ।
तेरे ख़ामोश लबों पर, थरथराये नाम मेरा,
दिल की राह से,' रूह' में उतरना चाहती हूँ।
तप्त धूप में ,तेरी छाया बन महकना चाहती हूँ।
तेरा ख़्वाब बन ,तेरा ''पाक़ इश्क़'' चाहती हूँ।
मैं तेरी बन ,संग तेरे ,जीना, मुस्कुराना चाहती हूँ।
