Dhokha [part 49]

आज दीपक ने अपनी सच्चाई अपने ही दोस्त प्रतीक को बताई ,जिसे सुनकर प्रतीक अचम्भित रह गया। प्रतीक को न जाने कैसे अंदेशा हो गया था ? कि उसका अपना भाई  रोहित उससे खफ़ा है और उससे ईर्ष्या भी रखता है। जब उसने देखा ,रोहन  चुपचाप उसकी डायरी पढ़कर उसकी योजनाओं के विषय में पता लगाता है। न जाने कैसे, उसको लगने लगा ,उसके माता -पिता मुझे नहीं, प्रतीक को ज़्यादा पसंद करते हैं। और तब प्रतीक घरवालों को डराने के उद्देश्य से ,जो विष अपने लिए लाया था। प्रतीक ने ,भाई रोहन को बदलते हुए देख लिया। तब उसे एहसास हो गया मेरा अपना भाई ही, मुझे मारना चाहता है।


 तब उसने अपने दोस्त दीपक को फोन किया और उससे सहायता मांगी कि वो दुनिया की नजरों में तो मरेगा किन्तु तुम्हें, मुझे बचाकर यहाँ से बाहर निकालना होगा। दीपक ने दोस्ती के नाते ,सच्चे मन से उसकी सहायता भी की किन्तु जब इंसान की क़िस्मत में 'धोखा 'खाना ही लिखा है ,तो कोई क्या कर सकता है ?अभी तक सब सही चल रहा था। तब प्रतीक को जैसे होश आया और नंदिनी का पता लगाने के लिए उसने दीपक से कहा -उसके पास भी वो जहर था ,मैं जानना चाहता हूँ  ,वो कैसी है ?

तब दीपक ने ,अपने किसी दोस्त के माध्यम से वहां के हालात जानने चाहे ! तब उसे पता चला ,बात बहुत बिगड़ चुकी है। नंदिनी अब अपने परिवारवालों के साथ नहीं रहती बल्कि अपनी नानी के साथ रहती है। तब दीपक अपने हॉस्टल से वहां आकर रहने लगा। नंदिनी को तो वो पहले से ही पसंद करता था किन्तु कभी जतलाया नहीं। अभी तक वो प्रतीक के कहेनुसार कार्य कर रहा था।

 जब प्रतीक को पता चला कि नंदिनी उसके बच्चे की माँ बनने वाली है ,तब उसने जिद करके दीपक से आग्रह किया ,''तू अब वहाँ जाकर ,उसका ख़्याल रखना।'' 

यह बात रोहन को भी पता चल चुकी थी ,कि नंदिनी की कोख़ में उनके ख़ानदान का चिराग़ है। एक -दो दुर्घटना के पश्चात रोहन उसके बच्चे को अपने साथ ले जाना चाहता है और ले भी जाता है। तब भी प्रतीक को लगा था ,बच्चे के साथ तो भाई कुछ नहीं करेगा किन्तु जैसे -जैसे रहस्य खुला, और नंदिनी को भी ,रोहन पर शक़ हुआ और वो उसके पीछे पड़ गयी ,जिस कारण रोहन जेल गया।

 इस सबमें दीपक ,नंदिनी के करीब आता गया और उससे प्यार करने लगा। दीपक का विवाह हो चुका था किन्तु उसकी पत्नी की उससे बनती नहीं थी या कहूं ! दोनों के मध्य नंदिनी आ गयी थी। उनके बीच तलाक़ की बातें चलने लगीं। अब नंदिनी को भी विश्वास हो चला था,' कि प्रतीक इस दुनिया में नहीं है।' प्रतीक अब तक अपनी इच्छा से छुपा हुआ था किन्तु अब प्रतीक को, दीपक ने छुपा दिया था। वो बाहर की कोई भी जानकारी उसे नहीं देता था। 

जब प्रतीक ने बाहर जाना चाहा ,तब दीपक ने उसे बताया -अब नंदिनी तुम्हें भुला चुकी है और अब वो आगे बढ़ना चाहती है।  

ऐसा कुछ भी नहीं है ,जब मैं उसके सामने जाऊंगा और अपनी बात बताऊंगा ,तो मेरी बातों पर अवश्य विश्वास करेगी। 

ऐसा कुछ भी नहीं है ,वो तुमसे बहुत नाराज है, ऐसी हालत में उसे छोड़कर तुम चले गए ,एक बार भी उससे मिलने का प्रयास नहीं किया।' मौत का ढोंग' क्या उससे ज्यादा महत्वपूर्ण था ? तुम्हारे कारण ,तुम्हारा भाई भी जेल से बाहर आ जायेगा। जब उससे कोई अपराध ही नहीं हुआ, तो सजा कैसी ?

 अभी तक दीपक उससे जो बताता ,प्रतीक उसे सच समझ उसके कहे में काम करता, किन्तु कुछ दिनों से दीपक का व्यवहार उसे बदला सा लग रहा था। तब वो अपने चेहरे पर मास्क लगाकर घूमने  निकलता है। संयोग से बाजार में वो ,नंदिनी को ,किसी के साथ देखता है और जानने का प्रयास करता है। आख़िर ये लोग कौन हैं ? क्योकिं दीपक के परिवार को प्रतीक भी नहीं जानता था। दीपक से, प्रतीक की मुलाकात तब हुई थी ,जब गर्मी की छुट्टियों में दीपक कुछ दिनों के लिए अपने मामा के यहाँ आया था। तभी उनकी दोस्ती भी हो गयी थी। इसी कारण दीपक को भी वहां ज्यादा कोई नहीं जानता था। 

एक बार नंदिनी को देखा ,तो प्रतीक को लगा ,एक बार ही सही उससे मिलना चाहिए। उसी कोशिश में ,जब नंदिनी ने उसे देखा और उसकी तरफ खींची चली आई ,तब वो घबरा गया , कहीं नंदिनी भावुक होकर कुछ कर न बैठे ,यही सोचकर छुप गया, किन्तु अब उसको देखने की ललक बढ़ने लगी। वो एक बार उससे मिलना चाहता था।

 तभी उसे पता चला, नंदिनी का विवाह तय हो गया है और जब उसने दीपक से पूछा - तो अनजान बनते हुए ,दीपक बोला - मुझे लगता है ,घरवालों के दबाब में आकर वो अब आगे बढ़ गयी है। 

तुम तो उसके लिए अब ज़िंदा ही नहीं हो ,उस रात्रि प्रतीक रातभर जागता रहा ,उसकी याद में रोया था ,तब सोचा - एक बार तो मिलना ही है,उससे मिलकर सम्पूर्ण सच्चाई बता दूंगा।  किन्तु उसे मौका नहीं मिल पा रहा था। 

प्रतीक के बार -बार के इस प्रयास से ,अब नंदिनी घबराने लगी थी। उसे एहसास हो गया था ,कोई तो है ,जो उस पर नजर रख रहा है। किन्तु आज स्वतः ही दीपक के मुख से सच्चाई सामने आ गयी और उसने स्वीकार भी किया कि वो बहुत पहले से ही नंदिनी को चाहता था।  

यह जानकर प्रतीक ने उससे पूछा -ये सब तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया ? और अब उसे एहसास हो चु का था दीपक ने भी उसे 'धोखा 'दिया। 

तब दीपक ने कहा -वो है ही इतनी प्यारी और खूबसूरत ! हालांकि मैं समझदारी से काम ले रहा था, मैं चाहता था - उसके लिए अब तुम इस दुनिया में नहीं थे 'धीरे-धीरे उसके मन में मेरे प्रति भाव जागृत होंगे और हुए भी '' पहले तो वो तुम्हारे लिए अपना जीवन दांव  पर लगाए हुए बैठी थी।सारी ज़िंदगी उसने जैसे तेरे नाम कर दी थी।  

तुम, धीरे-धीरे उसे मेरी सच्चाई भी तो बता सकते थे। 

हां बता सकता था, किंतु नहीं बताया क्योंकि वह मुझे अच्छी लगने लगी थी। तुमने कहा - कि मुझे ,मेरा बेटा दिलवा दो ! मैंने तुम्हारे भाई से मिलकर, तुम्हारे बच्चे को गोद लेने की बात कही और उसने ऐसा किया भी.... किंतु अब मैं चाहता हूं ,तुम यहां से कहीं दूर चले जाओ ! और कभी भी हमारी जिंदगी में लौट कर वापस मत आना। 

मैं तो चला जाऊंगा, लेकिन तुम नंदिनी की यादों से मुझे कभी नहीं निकल पाओगे !कहकर वो मुस्कुराया। 

जबकि जब देखी जाएगी, किंतु बात यह है यदि तुम यहां से नहीं गए , तो मुझे कुछ ठोस कदम उठाने होंगे , जिसके लिए तुम स्वयं ही जिम्मेदार होंगे, कभी भी अब नंदिनी की नजरों में मत आना। उसका पीछा मत करना ! मैं उसे लेकर कहीं दूर चला जाऊंगा, फिर तुम स्वतंत्र हो ! किंतु हमारी जिंदगी में कभी वापस मत आना। 

कुछ देर प्रतीक ने सोचा और बोला -ठीक है, यदि तुम्हें लगता है,' कि तुम नंदिनी के साथ रहकर खुश रहोगे तो मैं तुम्हारे, उस एहसान के बदले, नंदिनी की ज़िम्मेदारी तुम्हें सोंपता हूं। 

वो जिम्मेदारी नहीं, वो मेरा प्यार है। तुम क्या सौंपोगे ? उसकी अपनी ज़िंदगी है ,जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र है।

 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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