अर्धरात्रि में मोहिनी को नींद नहीं आ रही थी ,तभी किसी ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया ,और उसके लिए एक संदेश छोड़कर चला गया। उसमें लिखा था -तीसरे पलंग के नीचे देखो !मोहिनी और भानु वहां पहुंचते हैं ,तब उन्हें एक तस्वीर मिली और उसके पीछे लिखा था - ''जिसे तुम तीसरा बच्चा समझ रही हो, वह तुम्हारे अतीत का अकेला राज़ नहीं है। तुम्हारे अपने घर में कोई ऐसा भी है, जो उसे पहचानता है।'' मोहिनी ने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया और सोचने लगी -हमारे घर में ऐसा कौन हो सकता है ?”
भानु ने कोई उत्तर नहीं दिया, वो तस्वीर के पीछे कुछ देख रहा था। वहाँ छोटे अक्षरों में एक नाम लिखा था।“राजवीर !”उसी क्षण नीचे मुख्य हॉल से फोन की घंटी सुनाई दी- एक बार ,फिर दूसरी बार घंटी बजी भानु ने, मोहिनी की ओर देखा ,कोई फोन क्यों नहीं उठा रहा है ? तब दोनों सीढ़ियों की तरफ दौड़े।
जब वे वहां पहुंचे ,फोन के पास विक्रम खड़ा था, उसने रिसीवर उठाया हुआ था, लेकिन उसके चेहरे पर ऐसा भय था, मानो दूसरी ओर से कही गई बात ने उसके'' पैरों के नीचे की ज़मीन खींच ली हो।''
“क्या कहा उसने?” भानु ने पूछा।
विक्रम ने धीरे-धीरे रिसीवर नीचे रखते हुए बताया -उसने कहा है, कि अगर हम तीसरे बच्चे को ढूँढ़ना चाहते हैं, तो हमें कल सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर पुराने स्टेशन पहुँचना होगा।”
मोहिनी ने अपने हाथ की तस्वीर कसकर पकड़ ली।सात बजकर चालीस मिनट ! ये वही समय है , जो 18 अगस्त 2001 के रिकॉर्ड में लिखा था—जिस समय तीसरे बच्चे को अलग करने का आदेश दिया गया था।
फोन पर संदेश देने वाला व्यक्ति कौन था ? क्या राजवीर सचमुच जीवित था और क्या तीसरा बच्चा उस स्टेशन से जुड़ा था ,जहाँ से उसे वर्षों पहले गायब कर दिया गया था?
मोहिनी के मन में अब एक बात स्पष्ट हो चुकी थी।इस बार वे केवल अतीत के निशान नहीं खोज रहे थे।बल्कि अतीत खुद उन्हें ,अपने पास बुला रहा था। रात्रि के दो बजे हवेली में आया, वह फोन अब भी सबके मन में गूँज रहा था। सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर पहुंचना होगा ,पुराना रेलवे स्टेशन और एक ऐसा व्यक्ति, जो तीसरे बच्चे के बारे में जानता था।
मोहिनी ने जो अपने हाथ में पकड़ी हुई थी ,उस तस्वीर के पीछे लिखा नाम—राजवीर—उसके लिए किसी पहेली का उत्तर नहीं था , बल्कि एक नई मुसीबत का आरम्भ था।
भानु ने, तस्वीर उससे लेकर रोशनी में देखी। तस्वीर पुरानी थी। जिसके किनारे जले हुए थे ,और मध्य में खड़े हुए ,तीन बच्चों में से एक का चेहरा धुँधला था ,यह देखकर आश्चर्य हो रहा था। कि तस्वीर के पीछे लिखे सभी अक्षर स्पष्ट थे।
“राजवीर,” भानु ने यह नाम दोहराया। “अगर यह तस्वीर 2001 की है, तो इसका मतलब है कि राजवीर उस समय इन बच्चों के संपर्क में था।”
विक्रम ने तुरंत कहा, “ये भी तो हो सकता है ,' किसी ने जान-बूझकर उसका नाम इस तस्वीर के पीछे लिखा हो, ताकि हमारा ध्यान उसी की ओर जाए।”
मोहिनी ने विक्रम की ओर देखा और पूछा - आप हर बात में शक क्यों कर रहे हैं? जब फोन करने वाले ने कहा कि 'राजवीर' को मृत घोषित किया गया था, तब रत्न प्रताप ने भी उसका नाम लिया था। अब तस्वीर पर भी वही नाम है फिर भी आप इन साक्ष्यों को झुठला देना चाहते हैं।
“क्योंकि मैं इस परिवार को अच्छे से जानता हूँ ,इस परिवार में सच को छिपाने के लिए झूठे सबूत बनाने वाले लोग भी हैं,” विक्रम ने गंभीरता से कहा। “मैं नहीं चाहता कि हम किसी ऐसे व्यक्ति के पीछे भागें, जिसे शायद किसी ने हमारे सामने जान-बूझकर खड़ा किया है।”
तभी भानु ने घड़ी में समय देखा।सुबह होने में अभी कुछ घंटे बाक़ी थे। तब भानु बोला - हम स्टेशन जाएँगे,” उसने निर्णय लिया, “लेकिन उससे पहले हमें दो काम करने होंगे। पहला, इस तस्वीर की जाँच। दूसरा, रत्न प्रताप से उस फोन के बारे में सवाल।”
मोहिनी ने, विरोध नहीं किया। वह जानती थी कि इस बार जल्दबाज़ी उन्हें नुकसान पहुँचा सकती है।लेकिन उसके मन में एक और सवाल था -भानु ! अगर 'राजवीर' जीवित है, तो वह इतने सालों तक सामने क्यों नहीं आया? और अगर वह मर चुका है, तो कोई उसके नाम का इस्तेमाल करके हमें क्यों बुला रहा है?”
भानु ने ,उसकी ओर देखा ,और बोला -तुम्हारी बात सही है ,क्योंकि इन दोनों में से किसी एक बात पर विश्वास करने से पहले,, हमें यह पता लगाना होगा कि ''राजवीर''कौन था ?और 2001 में उसके साथ वास्तव में क्या हुआ था।”
मोहिनी ने, तस्वीर अपने पास रख ली।तो आज हमें इसका जवाब मिलेगा।”
भानु ने कुछ नहीं कहा। वह जानता था कि सात बजकर चालीस मिनट केवल एक समय नहीं था। यह वही समय था, जो अस्पताल के रिकॉर्ड में तीसरे बच्चे को अलग करने के आदेश के सामने दर्ज था।और अब कोई उन्हें उसी समय पर ,उसी शहर के, पुराने रेलवे स्टेशन पर बुला रहा था।
सुबह चार बजे के करीब ,हवेली के निचले हिस्से में हलचल हुई। रत्न प्रताप अपने कमरे से बाहर निकले। उनके हाथ में मोबाइल था और चेहरे पर ऐसी कठोरता थी, जिसे देखकर नौकर तक रास्ते से हट गए।भानु सीढ़ियों के पास खड़ा उनकी प्रतीक्षा कर रहा था,उन्हें देखते उसने कहा -“मुझे आपसे बात करनी है।”
रत्न प्रताप ने उसे देखा और फिर घड़ी में समय देखा -“इस समय?”
“समय का चुनाव मैंने नहीं किया, फोन करने वाले ने किया है।”
रत्न प्रताप की आँखों में एक क्षण के लिए बेचैनी उभरी, लेकिन उन्होंने तुरंत खुद को सँभाल लिया -कौन-सा फोन,किसका फोन ?”
भानु ने, तस्वीर आगे कर दी ,और उसने कहा -यह तस्वीर हमें तीसरे पलंग के नीचे मिली है,' इसके पीछे 'राजवीर का नाम लिखा है और रात में एक फोन आया था। 'कि सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर पुराने स्टेशन पर हमें पहुँचना है।”
रत्न प्रताप ने वो तस्वीर देखी, इस बार उनके चेहरे का रंग सचमुच बदल गया।उन्होंने तस्वीर को पलटकर देखा, फिर उसे भानु के हाथ में वापस थमा दिया और अपना निर्णय सुनाया -“तुम लोग वहाँ नहीं जाओगे।”
“क्यों?”
“क्योंकि यह तुम्हारे लिए सुरक्षित नहीं है।”
भानु की आवाज़ कठोर हो गई ,तब भी ,आपने यही कहा था ,जब मोहिनी ने ,तहखाने के बारे में पूछा था। और तब भी यही कहा था ,'जब उसने अपने बचपन के बारे में जानना चाहा था। हर बार आप उसे रोकते हैं, लेकिन कभी यह नहीं बताते, कि उसे ,किससे बचा रहे हैं।”
रत्न प्रताप ने, उसके करीब आकर धीमे स्वर में कहा, “कुछ सच ऐसे होते हैं, जिन्हें जानने के बाद इंसान पहले जैसा नहीं रह पाता।”
“और कुछ झूठ ऐसे होते हैं, जिनमें जीते-जी इंसान अपनी पहचान खो देता है,”भानु ने उत्तर दिया।दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रत्न प्रताप ने वह बात कही, जिसने भानु को चौंका दिया।“अगर तुम्हें उस स्टेशन पर जाना ही है, तो किसी भी हालत में प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर मत जाना।”
भानु की आँखें सिकुड़ गईं ,“आपको कैसे पता, कि हम किस प्लेटफॉर्म पर जाएँगे?”रत्न प्रताप ने कोई उत्तर नहीं दिया। क्या आप वहाँ पहले जा चुके हैं?”
“मैंने कहा न...., वहाँ मत जाना !”
“और मैं पूछ रहा हूँ, कि आपको उस जगह के बारे में इतना कैसे पता है ?”
रत्न प्रताप ने अचानक भानु का हाथ पकड़ लिया “क्योंकि 18 अगस्त 2001 को उस स्टेशन पर जो हुआ था, उसके बाद एक आदमी कभी वापस नहीं लौटा था !”
भानु कुछ पल चुप रहा ,“कौन आदमी?”
रत्न प्रताप ने, उसका हाथ छोड़ दिया ,“यह सवाल तुम, मुझसे नहीं, उस व्यक्ति से पूछना, जिसने मुझे ,उसे मृत घोषित करने पर मजबूर किया था।”
भानु के पास ,अगला प्रश्न पूछने का समय नहीं था। रत्न प्रताप पलटकर अपने कमरे में चले गए और दरवाज़ा बंद कर लिया। भानु सीढ़ियों की ओर मुड़ा, ऊपर मोहिनी खड़ी थी। उसने बातचीत का आखिरी हिस्सा सुन लिया था।
“उन्होंने कहा,' कि एक आदमी वापस नहीं लौटा था,”मोहिनी ने पूछा - “क्या वह राजवीर था?”
भानु ने उत्तर देने से पहले एक पल सोचा।“मुझे नहीं पता, लेकिन अब यह स्पष्ट है कि रत्न प्रताप उस घटना के बारे में हमसे अधिक जानते हैं।”
“तब तो हमें स्टेशन जाना ही होगा।”
“हाँ,” भानु ने कहा, “लेकिन हम अकेले नहीं जाएँगे।”
