मोहिनी और भानु उस कमरे में पहुंचते हैं ,जहाँ शायद कभी उनका बचपन बीता था। अपनी अधूरी यादें लेकर वो कमरे में प्रवेश करते हैं। वहां पर एक लकड़ी का बक्सा था। तब भानु ने कहा - हमें बाक़ी चीजें भी देखनी चाहिए ,हो सकता है ,इस पत्र को समझने में हमारी सहायता करे।
बक्से में रखी रसीद बाकी कागज़ों से अधिक सुरक्षित थी। उस पर अस्पताल का नाम धुँधला हो चुका था, लेकिन तारीख साफ़ पढ़ी जा सकती थी—18.08.2001 रसीद के नीचे हाथ से लिखा था—
“तीसरे शिशु का स्थानांतरण पूरा हुआ। नया नाम दर्ज कर दिया गया है। पुराना रिकॉर्ड बंद रखा जाए।”
मोहिनी ने कागज़ को कसकर पकड़ लिया। तीसरा शिशु… क्या यह वही तीसरा बच्चा हो सकता है, जिसके रिकॉर्ड के बारे में मौसी सुधा ने बताया था ?”
भानु ने भी वो कागज़ पढ़ा ,पढ़कर बोला -हो सकता है, लेकिन यहाँ किसी बच्चे का नाम नहीं है। सिर्फ तीसरे शिशु का उल्लेख है।”
मोहिनी ने दूसरे कागज़ पर नज़र डाली, वह एक पुराने रजिस्टर का फटा हुआ पन्ना था। उसमें तीन प्रविष्टियाँ थीं, मगर दो नामों पर काली स्याही फेर दी गई थी। तीसरे नाम के स्थान पर केवल एक अक्षर बचा था—R
“R…”मोहिनी ने धीमे से पूछा -“क्या यह राजवीर हो सकता है?”
भानु तुरंत कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहता था, तब बोला - हो सकता है, लेकिन सिर्फ एक अक्षर से हम किसी की पहचान तय नहीं कर सकते। राजवीर के बारे में जो बातें सामने आई हैं, वे पहले ही विरोधाभासी हैं। रत्न प्रताप ने उसे मृत बताया था, और अब किसी ने फोन करके कहा है -'कि वह व्यक्ति जीवित है, जिसे 2001 में मृत घोषित किया गया था।”
“तो क्या यह तीसरा बच्चा राजवीर हो सकता है या फिर तीसरे बच्चे का राजवीर से कोई संबंध भी हो सकता है ,दोनों ही बातें अलग हैं।”
मोहिनी ने रजिस्टर को मेज़ पर रख दिया ,भानु की बात सही थी। हर नए संकेत को किसी एक नाम से जोड़ देना आसान था, लेकिन यही जल्दबाज़ी उन्हें गलत दिशा में भी ले जा सकती थी। तभी मोहिनी की नज़र बक्से के भीतर रखे, एक छोटे कागज़ पर पड़ी। उस पर बच्चों जैसी लिखावट में एक वाक्य था—“अगर वे कहें, कि मैं मर गई हूँ, तो विश्वास मत करना।”
उसे पढ़कर मोहिनी की साँस जैसे रुक गई। उसे अचानक बचपन की एक धुँधली सी याद आई—एक बच्ची, लाल फीता, और वही शब्द -'तुमने मुझे बहुत देर से पहचाना…” उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। वह बच्ची जीवित है,”मोहिनी ने कहा।
भानु ने उसकी ओर देखा और पूछा -“तुम्हें कैसे पता?”
“क्योंकि मुझे याद है, उसने मुझसे कहा था-' कि अगर कोई कहे, कि वो मर गयी है ,तो विश्वास न करें। उसकी वो आवाज़… मुझे उसकी आवाज़ याद है।”
भानु ने ,मोहिनी का हाथ थाम लिया ,और बोला -तब तो हम उसे अवश्य ढूँढ़ लेंगे, लेकिन इस बार हम किसी के कहने भर से यह तय नहीं करेंगे,' कि वह जीवित है या मर चुकी है।”
मोहिनी ने पहली बार उसकी पकड़ में अपने लिए एक स्थिरता महसूस की। वह उसके सारे सवालों के जवाब नहीं दे सकता था, लेकिन कम-से-कम वह उसे सवाल पूछने से रोक तो नहीं रहा था।हर समय हर परिस्थिति में उसके साथ तो खड़ा है।
कमरे में खोज जारी थी ,मोहिनी अस्पताल की रसीदों को अलग रख रही थी, जबकि भानु अलमारी के पीछे की जगह देख रहा था। तभी मोहिनी ने पूछा -भानु ! क्या तुम्हें कभी ऐसा लगा कि तुम्हारे परिवार ने तुमसे भी कुछ छिपाया है?”
तभी भानु के हाथ रुक गए और बोला -“हाँ।”
मोहिनी ने उसकी ओर देखा,जैसे उसे, उसके शब्दों पर विश्वास ही नहीं हो रहा है ,ये सच्चाई इतनी जल्दी स्वीकार कर लेगा ,बोली - “क्या?”
भानु कुछ क्षण तक चुप रहा, फिर अलमारी के सहारे खड़ा हो गया। तब बोला - जब मैं छोटा था, तो एक बार मैंने दादाजी और रत्न प्रताप को इसी हवेली के पुराने हिस्से में बहस करते हुए सुना था। मैं ,उस समय बहुत छोटा था, इसलिए उनकी सारी बातें समझ नहीं पाया ,लेकिन एक वाक्य मुझे आज भी याद है।”
“क्या कहा था, उन्होंने?”
भानु की आवाज़ धीमी हो गई।दादाजी ने कहा था—‘अगर वह बच्ची वापस आई, तो दोनों भाइयों में से किसी एक को अपना नाम खोना पड़ेगा।
मोहिनी के हाथ से कागज़ लगभग छूट गया ,दोनों भाइयों में से किसी एक को अपना नाम खोना पड़ेगा? तुम्हारा मतलब तुम और रूद्र ?”
“शायद, लेकिन तब मैंने इस बात का अर्थ नहीं समझा। मुझे लगा ,'कि वे संपत्ति या परिवार के किसी विवाद की बात कर रहे होंगे।' मैंने किसी से कुछ नहीं पूछा।”
और अब तुम्हें लगता है कि वह बात, मेरे बारे में कही होगी ?”
“मुझे लगता है, कि तुम्हारे हवेली में लौटने की संभावना किसी को पहले से मालूम थी, लेकिन मैं यह नहीं जानता था ,कि क्यों ?
मोहिनी के भीतर एक नई बेचैनी जन्म लेने लगी।क्या उसकी शादी के पीछे केवल उसे,उस हवेली में वापस लाने की योजना थी? क्या रूद्र और भानु के बीच का अंतर भी किसी पुराने रहस्य से जुड़ा था? और अगर किसी को पहले से पता था कि मोहिनी लौटेगी, तो उसे किसने चुना था—परिवार ने, या किसी ऐसी शक्ति ने जो परिवार से भी ऊपर थी ?
भानु उसके पास आया और बोला -मोहिनी ! एक बात साफ़ कर दूँ। मैं तुम्हारे सामने अपने परिवार को निर्दोष साबित करने की कोशिश नहीं करूँगा। अगर मेरे परिवार ने तुम्हारे साथ अन्याय किया है, तो उसका जवाब मुझे भी चाहिए।”
और अगर तुम्हें पता चला कि तुम्हारे अपने पिता या दादाजी इसमें शामिल थे,तब क्या करोगे ?”
भानु ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “तब भी उन्हें जबाब तो देना ही होगा। ”
उसके उत्तर में पहली बार मोहिनी को केवल एक पति नहीं, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति दिखलाई दिया जो अपने अतीत के विरुद्ध खड़े होने को तैयार था ,लेकिन तभी नीचे से किसी के चिल्लाने की आवाज़ आई।“विक्रम साहब! जल्दी नीचे आइए!”दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा और कमरे से बाहर निकल पड़े।
नीचे मुख्य हॉल में विक्रम खड़ा था। उसके हाथ में एक मोबाइल फोन था और चेहरे पर तनाव स्पष्ट दिखलाई दे रहा था।
“क्या हुआ? वहाँ पहुंचकर भानु ने पूछा।
विक्रम ने उत्तर देने के बजाय फोन मोहिनी की ओर बढ़ा दिया और कहा -“यह संदेश अभी आया है ,नंबर छिपा हुआ है।”
मोहिनी ने स्क्रीन पर देखा ,संदेश में केवल एक तस्वीर थी।तस्वीर किसी पुराने रेलवे प्लेटफॉर्म की थी। एक बेंच के पास एक व्यक्ति खड़ा हुआ था, जिसका चेहरा कैमरे से दूसरी ओर था। उसकी कलाई पर लाल धागा बँधा हुआ था।
तस्वीर के नीचे लिखा था—“तुम्हें तीसरे बच्चे की तलाश है, लेकिन पहले यह जानो ! कि उसे, तुमसे किसने छीना था ?”
