Kiski dulhan [part 70]

मोहिनी जब अपने बचपन के रहस्यों को सुलझा रही थी ,तभी उसे उसकी मौसी सुधा मिली ,जिसने उसे बहुत महत्वपूर्ण बातें बताईं। तब  सुधा ने मोहिनी का हाथ पकड़ लिया और उसे आश्वस्त करते हुए बोली  -मैं तुम्हारे साथ हूँ , लेकिन एक बात याद रखना—हर वह व्यक्ति जिसने तुमसे सच छिपाया, ज़रूरी नहीं कि वह तुम्हारा दुश्मन ही हो। कुछ लोग तुम्हें बचाने के लिए भी चुप रहे होंगे, और कुछ ने उसी चुप्पी का फायदा उठाया होगा। हमें दोनों के मध्य फर्क समझना होगा।”

तभी कमरे के दरवाज़े पर किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। तभी विक्रम भीतर आया ,उसके हाथ में एक दूसरी फाइल थी।


सुधा जी !अब मोहिनी के लिए  केवल उसके जन्म का सच जानना ही काफी नहीं होगा। उसे अपनी शादी के बारे में भी सच्चाई जाननी चाहिए।”

मोहिनी ने, चौंककर उसकी ओर देखा,“मेरी शादी? उसका मेरे जन्म और हवेली से क्या संबंध है ?”

विक्रम ने फाइल मेज़ पर रख दी। “बहुत गहरा संबंध हो सकता है, तुम्हारी शादी पहले रूद्र से तय हुई थी। लेकिन विवाह वाले दिन उसे, एक झूठे संदेश के बहाने, वहाँ से दूर भेज दिया गया। उसे बताया गया कि परिवार में आपात स्थिति है। दूसरी ओर, तुम्हें विश्वास दिलाया गया कि 'रूद्र 'तुम्हें छोड़कर चला गया है।”

यह सब सच्चाई सुनकर मोहिनी का चेहरा सफेद पड़ गया। तो क्या 'रूद्र' मुझे छोड़कर नहीं गया था?

 दरवाज़े के पास खड़े रूद्र ने धीमे स्वर में कहा—नहीं, मोहिनी ! हमारे साथ धोखा हुआ था। जब मैं वापस आया तो मुझे बताया गया था-' कि तुम्हारी शादी हो चुकी है और तुम्हें अब मेरी ज़रूरत नहीं है। जब तक मुझे सच का थोड़ा-सा अंदाज़ा हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, तुम्हारा विवाह भानु से हो चुका था।

यह सुनकर मोहिनी की आँखों में आंसू आ गए और बोली - और मैं तुम्हें अपना 'गुनहगार' और 'धोखेबाज़' समझ रही थी। तब वो रूद्र की तरफ बढ़ी और उसके समीप आकर बोली -कम से कम एक बार तो तुम मेरे पास आकर, मुझे सच्चाई से अवगत तो कराते। 

इस सबसे क्या हो जाता ?हो सकता है ,तुम मुझ पर विश्वास ही नहीं करतीं ,जब तुमने सुना मैंने तुम्हें धोखा दिया है ,तभी तो तुमने भानु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया होगा। तुम्हारा गुस्सा' मैं' समझ सकता था किन्तु अब जो होना था, हो चुका, उसे बदला तो नहीं जा सकता था ,इसलिए तुम्हें बताकर भी क्या हो जाता ?तुम और परेशान हो जातीं ,उदास स्वर में रूद्र ने जबाब दिया। 

मोहिनी ने भानु की ओर देखा, जो अब तक चुपचाप खड़ा था। मेरा विवाह तुमसे हुआ…तुमने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि आख़िर सच्चाई क्या है ?

भानु ने उसकी आँखों में देखते हुए उत्तर दिया—कैसे पता लगाता ?उस दिन हालात, परिवार का दबाव और कुछ लोगों की चालों के मध्य हमारी शादी की रस्में पूरी हुईं थीं ,मुझे तो सोचने -समझने का अवसर ही नहीं मिला  लेकिन मैं यह नहीं कहूँगा कि जो कुछ भी हुआ, वह तुम्हारी स्वतंत्र इच्छा से हुआ था। तुम्हें सच जानने और अपना फैसला लेने का पूर्ण अधिकार था—जो तुमसे छीन लिया गया।”

मोहिनी  के लिए यह सब स्वीकार करना आसान नहीं था। उसका अतीत, उसकी शादी और उसका बचपन—तीनों किसी अनदेखे षड्यंत्र के धागों से जुड़े दिखाई दे रहे थे।

 “तो क्या तुम दोनों, अब साथ मिलकर यह रहस्य सुलझा रहे हो? मोहिनी ने पूछा। 

रूद्र ने, भानु की ओर देखा। दोनों भाइयों के बीच अब भी ,वही पुरानी कड़वाहट थी।  रूद्र को लगता था यदि भानु चाहता तो, विवाह से इंकार कर सकता था ,लेकिन इस बार उनके सामने एक ऐसा सच था ,जो उन दोनों की ज़िंदगी को प्रभावित करता था।

तब रूद्र बोला - मोहिनी ! हमारे मध्य मतभेद हैं, लेकिन जिसने तुम्हारी ज़िंदगी के फैसले, तुम्हारी जगह लिए, उसने हम दोनों को भी इस्तेमाल किया। मैं जानना चाहता हूँ कि ऐसा किसने किया और क्यों ?”

और मैं यह जानना चाहता हूँ ,कि तुम्हें इस हवेली में वापस लाने के पीछे उस अनजान व्यक्ति का क्या उद्देश्य था ? मैं, तुम्हें अपने अतीत से दूर रखकर सुरक्षित नहीं कर सकता। अब हम सच से नहीं भागेंगे।भानु ने मोहिनी को विश्वास दिलाया। 

यह सब सुनकर सुधा ने धीरे से कहा—“शायद तुम्हारी शादी केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं थी। हो सकता है, किसी ने सोचा हो,'' कि तुम्हारा हवेली में लौटना ही पुराने राज़ खोलने की शुरुआत बनेगा।”

मोहिनी ने खिड़की के बाहर देखा। उसके मन में एक ही सवाल गूँज रहा था—क्या उसकी शादी भी किसी बहुत पुरानी योजना का हिस्सा रही होगी ?

तभी विक्रम ने फाइल से एक तस्वीर निकाली। तस्वीर में तीन बच्चे थे, एक बच्ची की कलाई पर लाल फीता बँधा था। तस्वीर के पीछे तारीख लिखी थी—18.08.2001।

उसे देखकर ,मोहिनी की साँस अटक गई।“यह लाल फीता… मैंने इसे पहले भी कहीं देखा है।”

रूद्र ने तस्वीर पलटी, पीछे लिखी एक पंक्ति पढ़कर उसके चेहरे का रंग बदल गया—अगर  रूद्र ने विवाह किया, तो  मोहिनी को उसका असली परिवार कभी नहीं मिलेगा।”कमरे में सन्नाटा छा गया।

अब यह केवल जन्म के रिकॉर्ड में बदलाव का मामला नहीं था बल्कि किसी ने वर्षों पहले मोहिनी के परिवार, उसके भविष्य और यहाँ तक कि उसकी शादी को लेकर भी कोई योजना बनाई थी ,लेकिन उस योजना का असली सूत्रधार कौन था—यह सवाल अब भी अनुत्तरित था और उसी सवाल का जवाब पाने के लिए मोहिनी को अब उस हवेली में लौटना था, जहाँ से उसका बचपन अचानक छीन लिया गया था।

जब वे लोग हवेली में पहुंचे ,हवेली की दीवारों पर रात उतर चुकी थी। गलियारों में जलते पीले बल्ब पुराने चित्रों की परछाइयों को दीवारों पर लंबा कर रहे थे। बाहर हवा तेज़ थी, लेकिन हवेली के भीतर पसरा सन्नाटा उससे भी अधिक बेचैन करने वाला था।

मोहिनी अपने पालक पिता के हाथ में पकड़ी ,उस पुरानी चाबी को लगातार देख रही थी। उस पर खुदे तीन अक्षर—M.B.R.—उसके मन में अनगिनत सवाल पैदा कर रहे थे।

कुछ घंटे पहले तक उसे लग रहा था कि उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी उलझन उसकी शादी थी। उसे रूद्र  से प्रेम था, विवाह उसी से तय हुआ था, लेकिन परिस्थितियों ने उसे भानु की पत्नी बना दिया। अब उसे पता चला था, कि उसके बचपन, उसके जन्म के रिकॉर्ड और उसकी शादी के मध्य भी कोई संबंध हो सकता है।और अब उसके सामने यह चाबी थी।

एक ऐसा दरवाज़ा खोलने का उत्तरदायित्व था, जिसके अस्तित्व के बारे में उसे बचपन से उसकी कोई याद स्पष्ट नहीं थी।

“पापा ! मोहिनी ने, अपने पालक पिता से पूछा, “आपने कहा था -कि यह चाबी आपको 2001 में दी गई थी। तब आपने इसे इतने सालों तक अपने पास क्यों रखा? आप मुझे पहले भी तो बता सकते थे।”

उसके पालक पिता ने नज़रें झुका लीं और बोले -“क्योंकि मुझसे वादा किया गया था कि जब तक तुम अपने विवाह के पश्चात इस हवेली में वापस नहीं आ जातीं, तब तक मैं इस चाबी का इस्तेमाल नहीं करूँगा।”

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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