मोहिनी ,भानु ,रणवीर और रूद्र के साथ पुराने सिविल अस्पताल में पहुंचती है ,जहाँ से उन्हें कोई विशेष जानकारी नहीं मिलती किन्तु M.V. नाम की पर्ची मिलती है। जिससे वो अंदाजा लगाते है ,कहीं ये ''माधव वर्मा '' तो नहीं। कर्मचारी ने रजिस्टर बंद कर दिया और बोला - मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन एक बात अवश्य है ,”दोनों उसकी ओर मुड़े और उससे पूछा -क्या ?
“इस फाइल के साथ एक और लिफाफा दर्ज है। उसे कई साल पहले कोई व्यक्ति यहाँ से आकर ले गया था।
ले गया ,आपने एक महत्वपूर्ण जानकारी किसी को ऐसे ही, कैसे ले जाने दी ?मोहिनी गुस्से से बोली।
उसने अपने हस्ताक्षर किए थे।”
“किसने?”मोहिनी ने पूछा।
कर्मचारी ने पुराने रिकॉर्ड में देखा ,फिर उसने धीरे से कहा—“हस्ताक्षर स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन नाम के आगे सिर्फ एक अक्षर लिखा है—R ”भानु और मोहिनी ने एक-दूसरे की ओर देखा ,फिर कर्मचारी ने एक और बात बताई -“लिफाफा ले जाने वाले व्यक्ति ने यह भी लिखवाया था कि अगर कोई मोहिनी नाम की लड़की उस रिकॉर्ड के बारे में पूछे, तो उसे सीधे जवाब न दिया जाए।”
मोहिनी के चेहरे पर सख्ती आ गई।“किसने ऐसा आदेश दिया होगा ?”
कर्मचारी ने सिर न में हिलाया,“मुझे नहीं पता।”
मोहिनी ने पर्ची अपने हाथ में रखी ,अब उसके पास एक और सबूत था कि 2001 में किसी शिशु की पहचान बदली गई थी,लेकिन यह साबित नहीं हुआ था कि वह शिशु वही तीसरा बच्चा था और इससे भी बड़ा सवाल यह था—अगर किसी ने अस्पताल के रिकॉर्ड से मोहिनी का नाम हटाने की कोशिश की थी, तो क्या उसका उद्देश्य उसे छिपाना था, या उसकी पहचान को पूरी तरह बदल देना?
तभी अस्पताल के गलियारे से एक महिला का स्वर सुनाई दिया। मोहिनी !”
वह आवाज सुनकर मोहिनी ने पलटकर देखा।गलियारे के दूसरे छोर पर एक महिला खड़ी थी।उसके हाथ में एक पुरानी फाइल थी। चेहरा स्पष्ट दिखलाई नहीं दे रहा था ,किन्तु मोहिनी उसे पहचानती थी।वह महिला उसके बचपन की तस्वीरों में मौजूद थी—उसके परिवार के साथ, हर जन्मदिन पर, हर त्योहार पर।
वह मोहिनी की मौसी, सुधा थी।
मोहिनी की आवाज काँप गई -“मौसी… !आप यहाँ?”
सुधा ने, मोहिनी के हाथ में पकड़ी पर्ची देखी ,उनका चेहरा उतर गया।तुम्हें यह रिकॉर्ड नहीं देखना चाहिए था।”मोहिनी,उनके पास चली गई “क्यों? इसमें ऐसा क्या है?”
सुधा ने भानु की ओर देखा, फिर मोहिनी से कहा— क्योंकि जिस बच्चे की पहचान बदलने की बात तुम खोज रही हो…”वह रुक गईं।
मोहिनी ने, उनका हाथ पकड़ लिया और पूछा - कौन था ? वह बच्चा !”सुधा की आँखों में आँसू भर आए।
फिर उन्होंने वह बात कही, जिसके कारण ''मोहिनी के पैरों तले की जमीन खिसक गई। ''—मोहिनी ! तुम्हें यह जानना होगा कि 2001 में सिर्फ एक बच्चे का नाम नहीं बदला गया था। उस दिन अस्पताल से तीन शिशुओं के रिकॉर्ड बदले गए थे।”मोहिनी ने अविश्वास से उनकी ओर देखा -“तीन,ये आप क्या कह रहीं हैं ?”
सुधा ने सिर हिलाया -“हाँ, और उनमें से एक का संबंध तुमसे है।
सुधा के मुख से यह सुनकर ,अस्पताल के उस पुराने कमरे में कुछ पल के लिए ऐसी खामोशी छा गई थी, मानो वहाँ मौजूद हर व्यक्ति किसी अनकहे सच के सामने खड़ा हो।मोहिनी, की नज़र अपनी मौसी सुधा पर टिकी थी। सुधा के हाथ में वह पुरानी फाइल थी, जिसके कुछ पन्ने समय के साथ पीले पड़ चुके थे। लेकिन उन पन्नों पर लिखे नाम आज भी मोहिनी की ज़िंदगी बदलने की ताकत रखते थे।
मोहिनी : “मौसी, आपने कहा था -'कि अठारह अगस्त 2001 को तीन बच्चों के रिकॉर्ड बदले गए थे, उनमें से एक बच्चा मैं भी थी लेकिन बाकी दो बच्चे कौन थे ? और मेरे जन्म का रिकॉर्ड क्यों बदला गया होगा ?”
सुधा ने एक गहरी साँस ली और बोली -मोहिनी, मैं तुम्हें सब कुछ बताना चाहती हूँ , लेकिन तुम्हें मेरी बात ध्यान से सुननी होगी। उस समय अस्पताल में जो हुआ, वह केवल रिकॉर्ड में गलती करने का मामला नहीं था। किसी ने जान-बूझकर तीन बच्चों की पहचान को उलझाया था।”
लेकिन क्यों ? किसी बच्चे की पहचान बदलने से आखिर किसे फायदा हो सकता था? भावावेश में मोहिनी ने पूछा।
यही सवाल मैंने भी उस समय पूछा था किन्तु मुझे बताया गया ,''कि एक बच्चे की जान खतरे में है और उसकी सुरक्षा के लिए उसका नाम बदलना ज़रूरी है। मैंने उस समय पूरी सच्चाई जानने की कोशिश भी नहीं की। यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी।”
मोहिनी की आँखें भर आईं और बोली - मौसी ! आपने कोशिश क्यों नहीं की ? मैं तो आपकी अपनी थी। अगर मेरी पहचान बदली जा रही थी, तो किसी ने मेरे लिए आवाज़ क्यों नहीं उठाई?”
सुधा के चेहरे पर अपराधबोध उभर आया ,तब बोली -क्योंकि मैं उस समय डर गई थी, बेटा ! मुझे चेतावनी दी गई थी कि अगर मैंने उस मामले में दखल दिया, तो केवल तुम्हारी ही नहीं, बाकी बच्चों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। उस समय मुझे लगा,' कि चुप रहना ही उन्हें बचाने का एकमात्र रास्ता है, लेकिन आज समझती हूँ कि मेरी चुप्पी ने तुम्हें इतने वर्षों तक सवालों के घेरे में खड़ा रहने पर मजबूर कर दिया।”
मौसी ! तो क्या आप जानती थीं कि मैं हवेली में पली थी? क्या आपको पता था ,कि मुझे वहाँ से क्यों ले जाया गया?”
सुधा कुछ क्षण चुप रही, फिर उसने फाइल से एक पुराना कागज़ निकाला और बोली -मुझे,बस इतना पता था कि तुम्हें हवेली से अलग किया गया था, लेकिन तुम्हें ,किसके आदेश पर ले जाया गया, यह मुझे नहीं बताया गया। इस कागज़ पर सिर्फ इतना लिखा है—‘बच्ची को दूसरे नाम से दर्ज किया गया, वास्तविक पहचान की पुष्टि लंबित।’ इसके नीचे M.V. के अक्षर हैं।”
मोहिनी ने काँपते हाथों से कागज़ लिया। उसे पढ़ते हुए बोली - M.V.… यही अक्षर दूसरी जगह भी मिले हैं । क्या यह किसी व्यक्ति का नाम है?”
हो सकता है, लेकिन मैं बिना प्रमाण के किसी का नाम नहीं लेना चाहती। मोहिनी ! एक बात और है —उस दिन की फाइल बाद में किसी ने अस्पताल से निकलवा ली थी। जब मैंने दोबारा रिकॉर्ड देखने की कोशिश की, तो उस फ़ाइल से कई पन्ने गायब थे।”
आपने इतने सालों तक मुझे कुछ नहीं बताया? मुझी से मेरी जानकारी छुपाये रखी ,कम से कम एक बार तो बताना चाहिए था।
मुझे लगा था ,कि समय के साथ यह खतरा समाप्त हो जाएगा लेकिन अब मुझे समझ आ रहा है कि खतरा कभी समाप्त हुआ ही नहीं था। वह सिर्फ तुम्हारे बड़े होने का इंतज़ार करता रहा था ।”
मोहिनी ने फाइल बंद कर दी, उसकी आँखों में अब आँसू नहीं, बल्कि अपने अतीत को जानने का दृढ़ निश्चय था। तब बोली - “मौसी, मैं अब और अधूरी बातें नहीं सुनना चाहती। मुझे यह जानना है कि मेरे माता-पिता कौन हैं, मेरा बचपन हवेली में क्यों बीता और मुझे वहाँ से, किसने हटाया ? अगर इन तीन बच्चों के रिकॉर्ड में मेरे जीवन का जवाब छिपा है, तो हम उसे खोजेंगे।”
