Kiski dulhan [part 64]

 मृणाल ने उत्तर दिया—इन्होंने कहा था,' कि तुम्हें सुरक्षित रखा जाएगा और तुम्हें कभी यह नहीं बताया जाएगा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ था।”

मोहिनी ने ,रत्न प्रताप की ओर देखा ,“क्या यह सच है?”

रत्न प्रताप ने कुछ पल तक, उसकी आँखों में देखा- “हाँ”


इसका अर्थ है , मेरी माँ को, मुझसे अलग करने में आपका भी बहुत हाथ था?”

रत्न प्रताप ने कोई जवाब नहीं दिया,मोहिनी पीछे हट गई और उस सभा में बैठे सभी लोगों को सम्बोधित करते हुए बोली - आप सबने मेरी जिंदगी के फैसले किए, मेरी यादें छिपाईं, मेरे रिश्ते छिपाए और अब भी आप लोग मुझे सच नहीं बता रहे हैं ”

सहानुभूति से भानु ने ,उसका हाथ थाम पकड़ा ,इस बार मोहिनी ने उसका हाथ नहीं हटाया।

तस्वीर के पीछे का नाम- रूद्र जो अब तक चुपचाप सब कुछ खड़ा देख रहा था। उसने उस आदमी की ओर देखकर पूछा - “तुम्हारे पास जो सबूत हैं, क्या उनमें यह भी है कि तीसरे बच्चे को किस नाम से वापस लाया गया था?”

उस आदमी ने जेब से एक छोटा-सा कागज निकाला और बोला -“हाँ कहते हुए उसने वो कागज रूद्र  को पकड़ा दिया।रूद्र ने उसे खोला।उस पर सिर्फ एक नाम लिखा था—“अन्वी ”

मोहिनी ने भी वो नाम पढ़ा -“अन्वी ! मृणाल ने अचानक सिर उठा लिया ,उसकी आँखों में ऐसा डर था, जिसे देखकर मोहिनी समझ गई कि यह नाम उसके लिए अनजान नहीं था।तब उसने अपनी माँ को पुकारा -“माँ…मृणाल ने कोई जवाब नहीं दिया।मोहिनी ने उसका हाथ पकड़ लिया ,क्या आप इस नाम को जानती हैं ?”

मृणाल ने बहुत धीरे से कहा—“हाँ।”

ये अन्वी कौन है ?”

मृणाल ने अपने होंठ भींच लिए ,वह नाम… उस बच्चे को दिया गया था। मोहिनी की आँखों में आँसू भर आए। इसका मतलब है,वो तीसरा बच्चा अब अन्वी है?”

मृणाल ने सिर हिलाया ,मैं नहीं जानती कि आज वह किस नाम से जी रहा है , लेकिन एक समय उसे अन्वी कहा जाता था।”

रणवीर, जो अब तक आँगन के किनारे खड़ा यह सब सुन रहा था, अचानक आगे आया और बोला -एक मिनट ! सबकी नजरें उसकी ओर मुड़ गईं ,तब रणवीर ने कहा, “अगर तीसरे बच्चे को किसी दूसरे नाम से वापस लाया गया था, तो यह नाम हवेली के रिकॉर्ड में होना चाहिए।”

उस अनजान आदमी ने उसकी ओर देखा और बोला -“रिकॉर्ड में नाम है लेकिन उस नाम के आगे जो पता लिखा है, वह झूठा है।”

“तो असली पता कहाँ है? भानु ने पूछा।

आदमी ने जवाब दिया - उस फाइल में, जिसे 19 अगस्त 2001 को बनाया गया था।”

मोहिनी को अचानक रणवीर की लाई हुई फाइल याद आई ,वह तुरंत बोली - “वह फाइल हमारे पास है।”

उस आदमी ने पहली बार बेचैनी दिखाई और पूछा -“कौन-सी फाइल?”

“पुराने कर्मचारियों का रजिस्टर और 18 अगस्त की रिपोर्ट ”आदमी ने मृणाल की ओर देखा।

मृणाल ने धीरे से कहा, “तो इन्होंने उसे भी ढूँढ़ लिया।”

मोहिनी ने पूछा, “किसे ?”

मृणाल ने उसकी आँखों में देखा ,उस रिकॉर्ड को, जिसमें तीसरे बच्चे की असली पहचान दर्ज की गयी थी ।”

भानु ने तुरंत कहा, “रणवीर के पास वह फाइल है , हम उसे अभी लेकर आते हैं ,लेकिन इससे पहले कि कोई आगे बढ़ता, हवेली के मुख्य दरवाजे पर फिर दस्तक हुई।

इस बार दस्तक धीमी नहीं थी।तीन तेज चोटें थीं ,फिर एक आवाज—“मोहिनी !”सभी चौंककर दरवाजे की ओर मुड़े।दरवाजे के बाहर खड़ा व्यक्ति कोई अनजान आदमी नहीं था।वह हवेली का पुराना कर्मचारी था, जिसे कई साल पहले मृत घोषित कर दिया गया था। उसके हाथ में एक पुराना पहचान पत्र था।उसने दरवाजा खुलते ही कहा—मुझे पता है कि तुम लोग तीसरे बच्चे को ढूँढ़ रहे हो।”वह कुछ पल रुका ,फिर उसने मोहिनी की ओर देखकर कहा—लेकिन तुम जिस अन्वी को ढूँढ़ रही हो, वह नाम कभी उस बच्चे का था, ही नहीं।”

यह सुनकर मोहिनी के चेहरे से रंग उड़ गया। 

हवेली के मुख्य दरवाजे पर खड़ा वह व्यक्ति  किसी पुराने रहस्य की तरह सबके सामने था। उसके हाथ में पुराना पहचान-पत्र था ,और चेहरे पर उम्र की गहरी रेखाएँ, बाल लगभग सफेद हो चुके थे, लेकिन आँखों में अजीब-सी सतर्कता थी। उसने अभी-अभी कहा था—“तुम जिस अन्वी को ढूँढ़ रही हो, वह नाम कभी उस बच्चे का था ही नहीं।”

मोहिनी कुछ पल तक उसे देखती रही ,फिर उसने धीरे से पूछा—“तो आपने अभी तक हमें गलत दिशा में क्यों जाने दिया?”

आदमी ने सीधे उसकी ओर देखा ,“मोहिनी !मैंने तुम्हें गलत दिशा में नहीं भेजा।  मैंने सिर्फ यह बताया कि रिकॉर्ड में कौन-सा नाम इस्तेमाल किया गया था।”

लेकिन अभी आपने कहा -कि रिकॉर्ड में, उस बच्चे का नाम अन्वी था और अब कह रहे हैं -'कि वह नाम कभी उसका था ही नहीं?”

आदमी ने हाँ में सिर हिलाया और बोला - क्योंकि वह नाम असली पहचान छिपाने के लिए बनाया गया था।”

भानु ने आगे बढ़कर पूछा - पहले तुम अपना नाम बताओ !”आदमी ने अपनी जेब से पुराना पहचान-पत्र निकाला और भानु के सामने कर दिया ,उस कार्ड पर धुंधली सी तस्वीर थी।नाम पढ़ते ही भानु ठिठक गया ,उसके मुख से निकला -'गोपाल दास !'

मोहिनी ने रत्न प्रताप की ओर देखा ,जैसे वो जानना चाहती थी ,कि क्या आप 'गोपाल दास ''को जानते हैं ?

रत्न प्रताप का चेहरा सख़्त हो गया ,और उससे कहा -“तुम?”

गोपाल ने हल्की-सी मुस्कान के साथ कहा—“हाँ, वही गोपाल, जिसे आपने पच्चीस साल पहले मर चुका समझ लिया था।”

रणवीर तुरंत आगे आया,“एक मिनट , यह तो वही नाम है जो पुराने कर्मचारियों के रजिस्टर में था।”

गोपाल ने उसकी ओर देखा और बोला -“नहीं , रजिस्टर में गोपाल का नाम नहीं था।”

“तो?”

मेरा नाम जानबूझकर हटाया गया था।

मोहिनी ने पूछा, “क्यों?”

गोपाल ने दरवाजे के बाहर एक नजर डाली और फिर अंदर आ गया ,“क्योंकि 18 अगस्त 2001 की सुबह मैंने वह चीज देख ली थी, जिसे मुझे नहीं देखना चाहिए था।”

रत्न प्रताप ने कठोर स्वर में कहा—“गोपाल !अब बहुत देर हो चुकी है। जो हुआ, बरसों पुरानी बात है ,उसे दोबारा मत खोलो !'गड़े मुर्दे क्यों उखाड़ना ?''

गोपाल ने उनकी तरफ देखा ,यही गलती आपने पच्चीस साल पहले भी की थी।”

मोहिनी ने तुरंत पूछा— उस दिन आपने क्या देखा था ?”

गोपाल ने उत्तर देने से पहले, कमरे में मौजूद हर व्यक्ति को देखा फिर उसकी नजर मोहिनी की पायल पर जाकर रुक गई ,तब बोला - वही चाबी अभी भी तुम्हारे पास है? मोहिनी ने सहज रूप से अपनी पायल को ढक लिया ,और पूछा -आपको उसके विषय में कैसे पता?”

गोपाल ने कहा— क्योंकि उसे छिपाने वाला मैं नहीं था, लेकिन मैंने उसे आखिरी बार 18 अगस्त की सुबह देखा था।

भानु ने चौंककर पूछा -“कहाँ ?”

“नर्सरी के पुराने कमरे में ,”

यह सुनकर मोहिनी  को अचानक एक झटका-सा लगा ,नर्सरी ! वही कमरा जहाँ उस तीसरे बच्चे की तस्वीर मिली थी।

वही जगह जहाँ दीवार पर कभी M.B.R. के निशान थे।

उस कमरे में ऐसा क्या हुआ था?” उसने पूछा।

गोपाल ने कहा— तीनों बच्चे वहीं थे।”

मोहिनी साँस जैसे अटक गई ,बोली -“तीनों बच्चे ?”

“हाँ।”

लेकिन रिकॉर्ड कहता तो है -कि तीसरा बच्चा अलग कर दिया गया था।”

“रिकॉर्ड झूठा है।”

क्या आपने वह सब देखा था ?”

मैंने सिर्फ देखा ही नहीं था ,गोपाल कुछ पल के लिए चुप हुआ ,मैंने तीसरे बच्चे को वहाँ से जाते हुए भी देखा था।”

मोहिनी ने तुरंत पूछा—“किसके साथ?”


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post