मोहिनी को उस अनजान महिला पर विश्वास नहीं था ,भले ही उस महिला का चेहरा,उसकी माँ मृणाल से मिलता है किन्तु वो महिला जब मोहिनी से कहती है -मैं ही तुम्हारी माँ हूँ।
तब मोहिनी उनकी परीक्षा के लिए उससे पूछती है - यदि आप मेरी माँ हैं ,तो बताइये ! 17 अगस्त 2001 की रात्रि को क्या हुआ था ?
मोहिनी का ये सवाल सुनकर उस महिला के चेहरे का रंग उड़ गया। उसने मोहिनी की तरफ देखा, फिर भानु की तरफ ,ऐसा लग रहा था ,जैसे वो इस सवाल के जाल में फंस गई है ,तब उसने ,मोहिनी से पूछा - तुम्हें उस रात के बारे में कितना याद है ?”
मोहिनी ने कहा, “बस इतना ,कि मैं अकेली नहीं थी, मेरे साथ दो और बच्चे थे।
”महिला ने अपनी आँखें बंद कीं और बोली - तुम्हें कुछ-कुछ याद आने लगा है।”
आप मुझे यह मत बताइए ,कि मुझे क्या याद आ रहा है। मुझे यह बताइए ,कि उस रात आपने मुझे अकेला क्यों छोड़ा था ?
महिला ने कुछ पल तक चुप रहने के पश्चात कहा—मेरी बच्ची ! मैंने तुम्हें नहीं छोड़ा था।”
मोहिनी की आँखों में इतने वर्षों का दर्द उभर आया ,तब भी उसने पूछना जारी रखा ,“तो फिर अब तक आप कहाँ थीं?”
“मुझे ,तुमसे अलग कर दिया गया था।”
“किसने किया ?”
महिला ने जवाब देने के लिए होंठ खोले, लेकिन उसके पास खड़े आदमी ने बीच में ही कहा—यहाँ खड़े होकर यह बातचीत करना उचित नहीं है।”
भानु तुरंत उसकी ओर मुड़ा और उससे पूछा -“तुम्हारा नाम क्या है?”
आदमी ने शांत स्वर में कहा, “नाम से क्या बदल जाएगा?”
“बहुत कुछ.... खासकर तब, जब तुम रात को इस हवेली के दरवाजे पर 'राजवीर 'बनकर आए थे।”
रूद्र आगे बढ़ा और भानु का समर्थन करते हुए बोला -भानु, सही कह रहा है, तुमने ,हमसे अपना परिचय क्यों छिपाया?”
आदमी ने रूद्र की तरफ देखा और समझाने का प्रयास करते हुए बोला -“मैंने खुद को राजवीर नहीं कहा था। दरवाजे के बाहर से सिर्फ इतना कहा था कि मैं राजवीर हूँ , तुम लोगों ने मान लिया कि मैं वही हूँ।”
मोहिनी ने उसकी ओर घूरकर देखा ,यदि तुम राजवीर नहीं हो ,तो फिर तुम कौन हो?”
उस अनजान आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया।
रत्न प्रताप ने कठोर स्वर में कहा, “तुम्हें ,यहाँ आने की अनुमति किसने दी?”
आदमी ने जेब से एक पुराना लिफाफा निकाला और रत्न प्रताप की ओर बढ़ा दिया और बोला -जिसने आपको इतने सालों तक चुप रहने के लिए मजबूर किया।”
रत्न प्रताप यह बात सुनकर सकपका गया जैसे किसी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो ,उन्होंने लिफाफा खोला।अंदर एक पुरानी तस्वीर थी।तस्वीर में तीन बच्चे खड़े थे।मोहिनी ,भानु और उनके बीच एक तीसरा बच्चा।तस्वीर के पीछे लिखा था—“18 अगस्त 2001 — तीनों को एक साथ नहीं रखना था।”
मोहिनी ने फुर्ती से तस्वीर छीनकर अपने हाथ में ले ली और पूछा -“यह तस्वीर आपने कहाँ से पाई?”
आदमी ने कहा, “जहाँ से बाकी सबूत भी आए हैं।”
वही तो पूछ रही हूँ ,कहाँ से?”
“उस जगह से, जहाँ तीसरे बच्चे को आखिरी बार सुरक्षित देखा गया था।”
मोहिनी की उँगलियाँ उस तस्वीर पर कस गईं ,अब वह बच्चा कहाँ है?”
आदमी ने सीधे उसकी आँखों में देखा ,तुम्हारे बहुत करीब।”
मोहिनी के चेहरे पर बेचैनी फैल गई ,“कौन है ?वो ”उत्सुकता से पूछा।
अगर मैं अभी नाम बता दूँ, तो तुम उसे पहचानने से पहले ही खो दोगी।
भानु ने आगे बढ़कर आदमी का रास्ता रोक दिया।तुम्हें लगता है, कि ये पहेलियाँ बुझाकर तुम यहाँ से चले जाओगे?”
आदमी ने शांत स्वर में कहा, “मैं पहेलियाँ नहीं बुझा रहा। मैं तुम्हें उस सच से बचा रहा हूँ, जिसके लिए तुम दोनों अभी तैयार नहीं हो।”
भानु की आँखों में गुस्सा उतर आया ,अब हमारे लिए फैसला तुम नहीं करोगे।”
आदमी ने उसकी ओर देखा ,यही बात तुमने 17 अगस्त 2001 को भी कही थी।”
भानु जैसे पत्थर का हो गया ,क्या कहा ,तुमने?”
आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया।
मोहिनी ने तुरंत भानु की ओर देखा, “तुमने यह बात शायद पहले भी कभी सुनी है?”
भानु ने धीरे से सिर हिलाया -“नहीं, लेकिन…उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। बारिश ,एक बंद कमरा, किसी बच्चे का रोना और एक आवाज—“भानु अगर तुमने उसे बचाया… तो तुम दोनों में से कोई भी उसे दोबारा नहीं देख पाएगा।”भानु ने अपनी आँखें खोल दीं।
“तुम उस रात वहाँ थे? उस आदमी ने पूछा।
“हाँ ,किन्तु तुमने ,मुझे क्या करने से रोका था ?”
“मैंने, तुम्हें नहीं रोका था।”
“तो किसने रोका था?”
उस आदमी ने मोहिनी की तरफ देखकर बोला -यह सवाल तुम्हें अपनी माँ से पूछना चाहिए।”
एक माँ का अधूरा सच -मोहिनी धीरे-धीरे मृणाल की ओर मुड़ी और बोली -आपने सुना वो क्या कह रहे हैं ?”
मृणाल ने अपना सिर झुका लिया और बोली -“हाँ।”
“तो अब बताइए ! उस रात क्या हुआ था?”
मृणाल ने लाल रिबन मोहिनी की तरफ बढ़ाया और बोली - यह तुम्हारा है।”
मोहिनी ने रिबन को देखा और बोली -“नहीं, यह तीसरे बच्चे का था।”
“ऐसा तुम्हें लगता है?”
“मैंने इसे उसकी कलाई पर देखा था,उसी ने मुझे ये दिया था।”
मृणाल की आँखें भर आईं ,तुम्हारी याद पूरी तरह गलत नहीं है।”
“तो फिर यह किसका है?”
मृणाल ने धीमे स्वर में कहा—“यह उस बच्चे का था, जिसे तुमने खुद अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया था।”
मोहिनी का दिल तेजी से धड़कने लगा ,आप उसका नाम बताइए !”
मृणाल ने कुछ क्षण तक उसकी ओर देखा और बोली -मैं उसका नाम नहीं बता सकती।”
“क्यों?”
“क्योंकि जिस दिन उसका नाम तुम्हारे सामने आएगा, उसी दिन कुछ लोग फिर से तुम्हें, उससे दूर करने की कोशिश करेंगे।”
मोहिनी ने रिबन लेने से इनकार कर दिया।आप फिर वही कर रही हैं, आधी बातें, अधूरे जवाब और डर।”
मृणाल ने काँपती आवाज में कहा, “हाँ ,मैं डरती हूँ, मोहिनी !”
“किससे?”
“उस आदमी से, जिसने तुम्हें जन्म के बाद मरवा देने का आदेश दिया था। आँगन में खड़े सभी लोग एक-दूसरे को देखने लगे।
भानु ने तुरंत आगे बढ़कर पूछा- “वह कौन था?”
मृणाल ने उसकी ओर देखा ,मैं उसका नाम नहीं जानती थी।”
रत्न प्रताप ने पहली बार तेज आवाज में कहा, “मृणाल !”मृणाल उनकी ओर मुड़ी और बोली -अब चुप रहने से कोई लाभ नहीं है, रत्न प्रताप ! जिस सच को आपने इतने सालों तक छिपाया, वह अब इनके सामने आ चुका है।”
रत्न प्रताप ने कठोर स्वर में कहा, “तुम्हें नहीं पता, कि तुम क्या कर रही हो।”
“मुझे सब पता है ,मुझे यह भी पता है कि उस रात तुमने, मुझसे क्या वादा किया था ?”
मोहिनी ने दोनों की तरफ देखा ,उसे आश्चर्य हुआ ,ये दोनों एक -दूसरे को अच्छे से जानते हैं ,हमारे सामने अनजान बनने का अभिनय कर रहे थे ,तब मोहिनी ने पूछा -कौन-सा वादा ?”
