उसने, नजर भर देखा।
आंखों से दिल में उतारा।
हौले से आगे बढ़ता गया।
नशा, उसका चढ़ता गया।
इस क़दर मन को लुभाया।
लगा ,हक़ीकत बनता गया।
जिंदगी का कोई अहम हिस्सा।
जैसे उसने कागज पर उतारा।
हर अल्फाज़ दिल में उतरता गया।
न जाने कैसे ?ज़िंदगी को छू गया।
जैसे जीवन का हर लम्हा जी गया।
अंतर्मन से निकला, एक -एक शब्द
मुझको भावनाओं में भिगो गया।
शब्द उसके, भावनाएँ उसकी ,
हृदयतल भिगो ,आत्मा को छू गया।
