इस कुलक्छणी ,सांड को ,इसने मेरी छाती पर लाकर रख दिया। तृप्ति की सास बाहर जोरों से चिल्ला -चिल्लाकर उसे कोस रही थी। घूंघट में तृप्ति सोच रही थी - अब मैंने क्या कर दिया ? उसको इस घर में आये, अभी तीन माह ही हुए हैं। जब से वो इस घर में आई है , उसकी सास का यही हाल है। उसमें आये दिन कमियां ढूंढती रहती है और उसको कोसने और डांटने के बहाने ढूंढती रहती है। तृप्ति गृहकार्य में दक्ष है ,उसमें कोई कमी नहीं निकाल पातीं, तो कोई और ही बहाना ढूढ लेती हैं। समझ नहीं आता ,इन्हें , मुझसे क्या परेशानी है ?
उसका पति विकास जो उसी की कक्षा में उसका सहपाठी था, उसने कभी तृप्ति से बात नहीं की ,कभी -कभार उन्होंने पढ़ाई के लिए तो बात की थी ,किन्तु अचानक ही एक दिन उसके घर से तृप्ति के लिए रिश्ता आ गया। तृप्ति इस बात से हतप्रभ रह गयी। उसने कभी विकास को इस दृष्टि से देखा भी नहीं था किन्तु उसके माता -पिता इस बात से प्रसन्न हो गए। लड़का बेटी का देखाभाला है ,अपनी ही बिरादरी का है। बेटी के साथ पढ़ रहा था ,उसकी नौकरी लगते ही विवाह कर देंगे।
उन्होंने तृप्ति से पूछना भी जरूरी नहीं समझा कि उसका क्या कहना है ? माता -पिता की ख़ुशी देखकर तृप्ति चुप हो गयी। उसने तो कभी यह जानने का प्रयास भी नहीं किया,कि विकास स्वभाव से कैसा है ?
तृप्ति को चुप देखकर उसकी मम्मी ने पूछा -तू, खुश तो है।
ये बात आप अब पूछ रहीं हैं ,जब उन लोगों से 'हाँ 'कर दी।
क्यों ,उस लड़के में क्या कमी है ?अच्छा देखा भाला तो है। नौकरी लग जाएगी ,और क्या चाहिए ?
जब आप लोगों ने तय कर ही लिया है तो मुझसे पूछने का प्रश्न ही नहीं उठता। इस तरह तृप्ति का, विकास से विवाह हो गया। उसकी सभी सहेलियां 'हनीमून 'मनाने गयी किन्तु उसकी सास ने कुछ नहीं कहा और विकास का साहस नहीं था कि वो माँ से पूछे बग़ैर 'हनीमून 'मनाने चला जाये। यहां आकर तृप्ति को पता चला कि विकास माँ से पूछे बगैर एक कदम भी नहीं चलता ,वो उनसे इतना डरता है। ये सम्मान नहीं उनका डर था।
तृप्ति अभी उस घर को समझने का प्रयास कर ही रही थी ,और उसकी सास नई -नई बहु को अपने घर के रीति -रिवाज़ समझा रही थी। तृप्ति गृहकार्य ही नहीं अन्य घरेलू कार्यों में भी पारंगत थी। एक दिन विकास को लगा तृप्ति जबसे आई है ,'इसे कभी बाहर लेकर नहीं गया 'इसीलिए उसने सोचा - एक दिन इसे एक फ़िल्म दिखा लाता हूँ। उसने अपनी मम्मी से पूछा -तब वो बोलीं -टिकट लाने से पहले मुझसे पूछा था ,अब ले ही आया है तो दिखा ला !जोरू का गुलाम ,ये घर में क्या आ गयी ?''अब हमारे सिर पर नाचेगी ?''तृप्ति का मन कसैला हो गया।
तृप्ति ने, विकास से पूछा -तुम्हारी मम्मी मेरे साथ ऐसा क्यों करती हैं ?
उनकी आदत है ,तुम ज्यादा दिल पर मत लिया करो ! विकास ने उसे समझा दिया।
किन्तु जैसे -जैसे दिन बीतते जा रहे थे, उनका क्रोध बढ़ता जा रहा था ,कभी कहती -तेरे बाप ने क्या दिया ?कभी कहती ,'तेरी माँ ने शऊर नहीं सिखाया।'
एक दिन तृप्ति ने ही पूछा -मैं घर के सभी काम करती हूँ ,बाहर कहीं घूमने नहीं जाती ,आप मुझसे क्या चाहती हैं ?
तब वो चिल्लाकर बोलीं -चली जा ! यहां से तेरी माँ ने तुझे जुबान चलाना ही सिखाया और वो उसे थप्पड़ मारने के लिए आगे बढ़ीं, तभी तृप्ति पीछे हट गयी अपने उद्देश्य में नाक़ामयाब होने के कारण वो और भड़क उठीं और अपने बेटे को ही गाली देने लगीं -''अपने खून में ही खोट है ,तो दूसरे का क्या दोष ?जब तो यूँ कहवे था -मम्मी !मेरी पत्नी आएगी ,तुम्हारी खूब सेवा करेगी। इससे पहले भी उन्होंने ये बात कई बार कही थी ,किन्तु आज उनका ये रौद्र रूप देखकर तृप्ति को भी लगा ,ये तो और आगे बढ़ती ही जा रहीं हैं।
तब तृप्ति बोली -सारी गलती आपके बेटे की ही है ,उसने मेरी गारंटी आपको दी, कि वो आपकी सेवा करेगी ,बिना कहे कुछ नहीं करेगी। जिसे जाना नहीं ,पहचाना नहीं, उसका आश्वासन आपको दिया और उसने मुझसे ये क्यों नहीं बताया -''कि उसकी माँ मेरे साथ कैसा व्यवहार करेगी ? उसने अपनी माँ से ये आश्वासन क्यों नहीं लिया ?कि जब कोई अनजान लड़की घर में आये तो आप भी उससे अच्छा व्यवहार करना।'' ये वादा आपके लिए ही था ,मेरे लिए क्यों नहीं लिया ?
और जब मैं उससे कहती हूँ -तुम्हारी माँ ऐसा करती है ,तो कहता है -उनकी आदत है ,थोड़ा सहन कर लोगी तो क्या हो जायेगा ?आज उससे पूछूँगी ,ऐसा वादा मुझसे क्यों नहीं किया ?मुझे ये क्यों नहीं बताया ?कि मेरी माँ ऐसी है ,तुम उसे झेल पाओगी या नहीं ,तब मेरी इच्छा होती ,मैं विवाह करती या न करती। मुझे भी उसने यहां लेकर फंसा दिया ,कहकर तृप्ति रोते हुए अपने कमरे में चली गयी।
