आख़िर मनीष ने खुलासा कर ही दिया, उसने अपनी मां को बताया -कि वो विभा को यहाँ छोड़ने के लिए ही तो आया है,क्योंकि ऐसी हालत में उसको किसी बड़ी और समझदार महिला की आवश्यकता है,शहर में इसकी ऐसी हालत में मैं ,इसे संभाल नहीं पाउँगा। माँ ,बेटे की बातों का आशय समझ गयी ,कि वो दादी बनने वाली है। बेटे को बधाई दी -'कि अब वो भी पिता बनने जा रहा है ',इसके साथ ही मां ने यह खबर केतकी को भी सुनाई।
केतकी भी ,ये ख़बर सुनकर भावुक हो उठी ,इस घर में एक नया मेहमान आने वाला है। कितनी अज़ीब और मन को प्रफुल्लित कर देने वाली अनुभूति है। तब खुश होकर माँ से बोली - मां अब तुम दादी बनने वाली हो और मैं बुआ और ये दोनों चाचा बन जाएंगे। एक नए मेहमान के आगमन की सूचना से ही घर में जैसे खुशियों की लहर दौड़ गई ,एक अजब ही अनुभूति थी। बुआ बनने की अनुभूति उसे पहली बार हो रही थी, उस बच्चे के आने पर सभी रिश्तों के नामों में भी बदलाव आ जायेगा। तब वो अपनी भाभी विभा से कहती है -भाभी ! आपको भी बधाई हो अब आप भी तो माँ बनने जा रहीं हैं और आपके साथ -साथ हमारी भी उन्नति हो गयी। अपना ख्याल रखना ,मैं अभी आती हूं, यह कहकर वो घर से बाहर चली जाती है।
मां परेशान थी, इतनी देर हो गयी ,केतकी न जाने कहाँ चली गयी ? यह लड़की भी न... बिन कहे ही घर से निकल जाती है ,न जाने कहां घूमती रहती है ? मेरे साथ थोड़ा काम भी करवा देती, तो अच्छा रहता। तब वो अंदर कमरे में जाकर विभा से पूछतीं हैं -बहु ! केतकी क्या तुमसे कुछ कह कर गई है ?
नहीं,मांजी ! मुझसे तो उन्होंने कुछ नहीं कहा ,लाइए ! थोड़ा मैं काम करवा देती हूँ ,मुझे बता दीजिये !
नहीं ,तुम अभी आराम करो ! देखती हूँ ,शायद थोड़ी बहुत देर में आ जाएगी।
केतकी मन ही मन बहुत प्रसन्न थी। तभी उसे स्मरण हुआ, उसने तो शाम के समय, श्याम से मिलने का वादा किया था ,यह सोचकर वह श्याम से मिलने के लिए, कुएं के खेत के पास पहुंच गई ,वहां पर श्याम पहले से ही उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। मन ही मन केतकी सोच रही थी -चलो !अच्छा हुआ ,मुझे याद आ गया वरना ये इंतज़ार करके चला जाता तो क्या होता ?
केतकी को देखकर ,पेड़ तले बैठा श्याम उठते हुए बोला -चलो !अच्छा हुआ ,तुम आ गयीं वरना ऐसे ही प्रतीक्षा करता रहता।इतनी देर कैसे लगा दी ?
देर कहाँ हुई ?अभी शाम होने में भी समय है।
तुमने घड़ी में समय देखा है।
मुझे इतना समय नहीं मिलता कि घड़ी में समय देखूं ,वो तो बाहर किसी काम से आई थी ,तुम्हारी याद आई तो इधर चली आई ,कहते हुए वो उससे कुछ दूरी पर जाकर बैठ गयी।
अरे !ये क्या ?तुम इस तरह इतनी दूर कैसे बैठी हो ? मुझसे मिलने आई हो, थोड़ा क़रीब तो आओ ! इतनी देर से तुम्हारी प्रतीक्षा में यहां बैठा हूँ ,मिलने भी आई हो और ऐसे दूर बैठ गयीं ,जैसे मुझसे लड़ाई हुई हो।
उसकी बातों से केतकी घबरा गयी और दूर से ही बोली - घर में भाई आया हुआ है, आज ही आया है ,कहते हुए खेत की घास उखाड़ने लगी। मेरी जरूरत पड़ी, तो सब मुझे खोजने लगेंगे। केतकी को करीब आते न देखकर तब श्याम उठा और स्वयं ही उसकी तरफ बढ़ने लगा। यह देखकर केतकी की धड़कनें भी बढ़ने लगीं ,अंदर ही अंदर घबराहट बढ़ रही थी।मन ही मन सोच रही थी- गांव में किसी ने देख लिया तो.... जी तो उसका भी चाह रहा था, उसके करीब जाये ,किन्तु ये धडक़नें जो कम होने का नाम नहीं ले रहीं ,तब अपनी घबराहट को छुपाने का प्रयास करते हुए ,केतकी बोली - क्या तुम्हें पता है ? मैं बुआ बनने वाली हूँ।
श्याम उसके करीब आकर बैठ गया और बोला -अच्छा ! अच्छी बात है ,तुम्हें बहुत -बहुत बधाई हो ! तुम्हें कैसे पता चला ?
घर में भाभी -भैया आए हुए हैं ,तभी मुझे पता चला अपनी धड़कनों पर नियंत्रण रखते हुए ,सामान्य जतलाने का प्रयास करते हुए बोली - मैं ज्यादा समय तक यहां नहीं रूक पाऊंगी ,शीघ्र ही मुझे जाना होगा वरना मेरी खोजबीन शुरू हो जाएगी, कहकर उसने उठने का प्रयास किया।
कुछ देर रुको ! तो सही ,आई हो तो... कुछ देर बैठ कर ही जाना, उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए श्याम ने कहा। उसका इस तरह हाथ खींचना केतकी को अच्छा नहीं लगा ,घबराहट और शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया। उसे थोड़ी झिझक हुई ''कोई देख लेगा ,''उसके मुख से निकला ,कहकर बैठ गई।
तब श्याम ने कहा -क्या तुम जानती हो ? तुम्हारे भइया -भाभी के जीवन में यह ख़ुशी कैसे आई ?
कैसे आई ? तुम कैसे जानते हो ?
मैं सब जानता हूँ ,ये ख़ुशी उनके प्रेम के कारण आई ,वे एक -दूजे से प्रेम जो करते हैं। केतकी को अपने भइया -भाभी के विषय में सोचा ही नहीं गया और शर्माकर बोली -धत ,किसी लड़की से क्या ऐसी बातें करते हैं ?तुम्हें शर्म नहीं आती।
इसमें शर्म कैसी ?हम दोनों भी तो एक -दूसरे से प्रेम करते हैं।
उसके इतना कहते ही केतकी ने उसे घूरा और बोली -क्या तुम मुझसे प्रेम करते हो ?
हाँ ,और नहीं तो क्या ?तभी तो तुमसे मिलने यहां चला आया हूँ। क्या तुम, मुझसे प्रेम नहीं करतीं ? तुम भी तो मुझसे प्रेम करने लगी हो ,इसीलिए तो यहाँ मिलने आई हो ,जरा अपने सीने पर हाथ रखकर अपनी धड़कनों से पूछो ! श्याम की बातें सुनकर केतकी सोचने लगी - मुझे इससे कब प्रेम हुआ ? हां इससे मिलना, बातें करना, अच्छा तो लगता है किंतु प्रेम की बातें, वह घबरा गई और बोली -घर पर सब मेरी प्रतीक्षा कर रहे होंगे ,अभी मैं चलती हूं।
तुम अभी तो आई हो, इतनी जल्दी कैसे जा रही हो ? एक लड़की जो खेतों में ट्रैक्टर चलाती है ,वही मुझसे घबराकर भाग रही है।
नहीं ,मैं किसी से नहीं डरती किन्तु तुम्हें बताया तो था -''कि भाभी -भैया आये हुए हैं ,कुछ दिनों के पश्चात तो भाभी अपने गांव चली जाएगी। तुम भी तो भाभी के गांव से ही हो, भाभी से मिल लेना।
तुमसे, किसने कहा ? मैं तुम्हारी भाभी के गांव से हूं।
तो क्या तुम भाभी के गांव में नहीं रहते हो ?
नहीं, मेरा दूसरा गांव है।
तुम को तो मैंने अपने भाई की शादी में ही तो देखा था।
अच्छा ,उन दिनों तो मैं उस गांव में आया हुआ था ,क्योंकि वहां मेरी बुआ रहती है।
केतकी सोच रही थी, मुझे इतनी बड़ी गलतफहमी कैसे हो गई ? तुम मेरे भाई की शादी में मुझसे मिले थे किंतु तुमने अभी तक मुझे यह क्यों नहीं बताया ? तुम उस गांव के नहीं हो। अब तक केतकी की धड़कनें सामान्य हो गयीं थीं।
तुमने, मुझसे पूछा ही कब था ? आज बात चली है ,तो बता रहा हूं। कहते हुए उसने केतकी का हाथ पकड़ा।
