मुख्य दरवाज़े के बाहर कोई खड़ा , कोई चिल्ला रहा था -'दरवाज़ा खोलो ! जब दरवाज़ा खोला गया ,तब वहां मात्र एक बैग रखा था और कुछ सामान के साथ एक पर्ची भी थी ,जिसमें लिखा था -'दोनों को भूलकर तीसरे को बचाना है।' ये पढ़कर मोहिनी की आँखें भर आईं।“बाकी दोनों? ये शब्द उसे अंदर तक झकझोर गया ,उनका दोनों से क्या तात्पर्य था ? उसने भानु की तरफ देखा और बोली -कहीं हम दोनों तो नहीं ?
रूद्र ने सिर हिलाया -हाँ “शायद।”
“शायद?”मोहिनी अचानक भड़क उठी -“हर बात में शायद क्यों ?उसने फोटो मेज पर पटक दी,कोई मुझे साफ-साफ क्यों नहीं बताता? कि आखिर मेरे साथ क्या हुआ था?”
रत्न प्रताप कुछ बोलने ही वाला था, कि मोहिनी उसकी तरफ मुड़ी और उससे पूछा -“इस विषय में क्या आप जानते हैं ?रत्न प्रताप उसका चेहरा देखकर कहते -कहते चुप हो गया ।मोहिनी उसके सामने जाकर खड़ी हो गयी और पूछा - क्या आप जानते हैं ,कि तीसरा बच्चा कौन था ?”किन्तु रत्न प्रताप ने कोई भी जबाब देना उचित नहीं समझा और मौन रहा। क्या आप जानते हैं ? राजवीर जिंदा है या नहीं।” आप इस तरह चुप्प क्यों हैं ?मुझे जबाब दीजिये ! क्या आप जानते हैं ,मेरी माँ कहाँ है ?”रत्न प्रताप ने उसके चेहरे की तरफ देखा किन्तु अपना मौन नहीं तोडा ,न जाने उसके साथ ऐसी कैसी और कौन सी विवशता थी ?जो उसे चुप्पी साधने पर मजबूर कर रहा है। मोहिनी की आवाज टूटने लगी ,तब बोली - शायद ,आप ये भी जानते हैं ,कि मेरे माता-पिता कौन थे ?”
रत्न प्रताप ने धीरे से कहा—कुछ सवालों के जवाब जानना तुम्हारे लिए सुरक्षित नहीं है।”
मोहिनी तुरंत बोली —क्या झूठ को जीना सुरक्षित है ?अब मैं इस झूठ से थक चुकी हूँ। रत्न प्रताप के पास जवाब नहीं था।
भानु ने मोहिनी के कंधे पर हाथ रखा ,“बस,अब ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। मोहिनी ने उसकी तरफ देखा।
तब भानु ने कहा—“आज की रात ही हम सब कुछ नहीं जान पाएँगे।”
“तब तक क्या करें?हताश होते हुए मोहिनी बोली।
“पहले ये तो पता करें ,कि हमारे सामने जो है, वो सच है, या किसी की बनाई हुई कहानी।
रूद्र ने भी ,उसके समर्थन में सिर हिलाया और बोला -“सही है ।”तब उसने ,उस बैग से पुरानी घड़ी उठाई। घड़ी बंद थी,समय रुका हुआ था—7:40 AM. मोहिनी ने घड़ी की तरफ देखा ,“7:40…”उसकी नजरों के सामने अचानक वही पन्ना उभरा—7:40 पर आदेश मिला—'तीसरे बच्चे को अलग कर दो !
भानु ने भी समझ लिया ,“घड़ी उसी समय पर रोकी गई थी।”
रूद्र ने कहा— इसका मतलब है ,कि बैग लेकर आने वाला कोई भी व्यक्ति इस समय को महत्वपूर्ण मानता है।”
रणवीर ने पूछा—तो फिर वो आदमी कहाँ गया?”
किसी के पास कोई जवाब नहीं था ।तभी ऊपर से आवाज आई ,धड़ाम! सबकी नजरें सीढ़ियों की तरफ उठ गईं।मोहिनी के हाथ से वो लाल रिबन गिर गया।भानु तुरंत ऊपर की तरफ भागा ,मोहिनी उसके पीछे थी ,रूद्र भी दौड़ते हुए सीढियाँ चढ़ने लगा। ऊपरी मंजिल का वही कमरा खुला पड़ा था ,उन्होंने अंदर झांककर देखा, अब अंदर कोई नहीं था। रिकॉर्डर भी गायब हो चुका था ,मेज खाली थी और दीवार पर जहाँ पहले तीन रेखाओं वाला निशान बना था, वहाँ अब एक नया निशान बना था।तीन छोटे वृत्त ,उनके नीचे—M.B.R. मोहिनी कुछ पल उसे देखती रही और वो बुदबुदाई -“R…”
भानु ने कहा —“अब तुम्हें कुछ समझ आया?”
मोहिनी ने' न 'में सिर हिलाया।वह धीरे से दीवार के पास गई।उसने तीसरे अक्षर को छुआ। अब मुझे यकीन है ,कि इसे किसी ने मिटाया नहीं था।”
रूद्र ने पूछा—“तो?”
मोहनी ने उसकी तरफ देखा ,इसे छिपाया गया था।”अचानक कमरे के बाहर से किसी के भागने की आवाज आई।भानु दौड़कर गलियारे में पहुँचा किन्तु वहां कोई नहीं था ,लेकिन सीढ़ियों के मोड़ पर एक चीज पड़ी थी।लाल पत्थर वाली वही अंगूठी ! जिसका निशान अब उस अजनबी के हाथ में था।
भानु ने उसे उठाया ,रूद्र ने तुरंत कहा—इसे पहनना मत !
मैं बेवकूफ नहीं हूँ ,जो इसे पहनूंगा ,रूद्र ने अंगूठी को गौर से देखा।उसके अंदर एक बहुत छोटा अक्षर खुदा था -M
मोहिनी की नजर उस पर पड़ी ,तो बोली -इसमें “R नहीं है ?”
“नहीं,”रूद्र ने कहा।
“तो M ये किसका नाम हो सकता है ?रूद्र की आँखों में अचानक पहचान की झलक आई। मुझे एक नाम याद आ रहा है।
“कौन?”
रूद्र ने जवाब देने से पहले रत्न प्रताप की तरफ देखा ,बोला -“मृणाल !”
मोहिनी का दिल जोरों से धड़क उठा ,यानि मेरी माँ ?”
रूद्र ने धीरे से कहा—“जरूरी नहीं,मोहिनी भी हो सकता है ”
भानु ने पूछा—“फिर?”
रूद्र ने अंगूठी को रोशनी में घुमाया और बोला -“मुझे नहीं पता।”
मोहिनी ने पहली बार महसूस किया कि इस कहानी में हर निशान किसी एक व्यक्ति की तरफ नहीं जाता।कभी R…कभी M…कभी A.V…और अब A.V.R. लेकिन इन सबके मध्य एक चीज लगातार थी—18 अगस्त 2001। मोहिनी ने वो लाल रिबन उठाया और उसे फिर से अपनी मुट्ठी में बाँध लिया और दृढ़ विश्वास से बोली -“मैं उस तीसरे बच्चे को खोजूँगी।”
भानु ने उसकी तरफ देखा और बोला -तुम ही नहीं ,हम खोजेंगे।”
मोहिनी हल्की-सी मुस्कुराहट से बोली -“नहीं।”
भानु चौंका और पूछा -क्या अब तक तुम्हारा साथ नहीं दिया ,क्या अब तुम्हें विश्वास नहीं रहा ?
“मैं अकेली नहीं खोज रही ,वह उसकी तरफ एक कदम बढ़ी, अब ये सिर्फ मेरा अतीत नहीं है।उसने धीमे से कहा—“तुम भी उस रात वहाँ थे।”
भानु कुछ पल चुप रहा ,फिर उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।मोहिनी ने उसका हाथ पकड़ लिया।उन दोनों के हाथों के बीच वही लाल रिबन बंधा था।नीचे हवेली में रत्न प्रताप खड़ा था ,उसके सामने रूद्र
रत्न प्रताप ने बहुत धीमी आवाज में कहा—अब बहुत देर हो चुकी है।”
रूद्र ने पूछा—“किसके लिए?”
रत्न प्रताप ने ऊपर मोहिनी और भानु की ओर देखा ,उसके लिए नहीं।”वह कुछ पल रुका।उस आदमी के लिए… जिसने राजवीर को वापस भेजा है।”
रूद्र की आँखें सिकुड़ गईं ,तो क्या राजवीर वापस नहीं आया था ?”
रत्न प्रताप ने सिर हिलाया ,“नहीं।”
तो फिर बाहर कौन था?”
रत्न प्रताप ने कोई उत्तर नहीं दिया ,बस इतना कहा—“जिस दिन मोहिनी को तीसरे बच्चे का सच पता चल जाएगा… उस दिन राजवीर का झूठ भी समाप्त हो जाएगा।”
मोहिनी ऊपर वाले कमरे में थी ,इसीलिए वो यह बात नहीं सुन सकी ।वह खिड़की के पास खड़ी थी।बाहर रात धीरे-धीरे खत्म हो रही थी लेकिन उसके हाथ में बंधा लाल रिबन अभी भी हवा में हिल रहा था।और उसके मन में पहली बार एक सवाल नहीं…एक नाम उभर रहा था। पूरा तो याद नहीं ,सिर्फ आधा,“रा…”कहीं गहराइयों में छुपा था। मोहिनी ने अपनी आँखें बंद कर लीं।उसे याद नहीं आ रहा था कि वह नाम किसका था ?लेकिन उसे इतना जरूर महसूस हुआ—वो तीसरा बच्चा कहीं दूर नहीं था।वह इस कहानी के बहुत करीब है ।शायद इतना करीब…कि मोहिनी उसे रोज देखती है ।
