Shaitani sa......20

भाभी ! कहते हुए केतकी कमरे में पहुँच गयी ,उसकी भाभी अपना पल्लू सर से हटाकर बिस्तर पर आराम से लेटी हुई थी। केतकी को देखकर वो उठकर बैठी। तब केतकी बोली -लो ! भाभी दूध पी लो ! आपकी सास ने भेजा है।

 पहले वो थोड़ा चुप हो गयी ,तब बोली -दीदी ! यहीं रख दो ! मैं बाद में पी लूँगी। 


बाद में कब ?अभी पी लो !मैं गिलास वापस ले जाउंगी वरना मम्मी फिर चक्कर कटवाएंगी। 

विभा ने मुँह बनाया और चुप हो गयी ,उसका चेहरा देखकर केतकी को लगा, शायद इन्हें मेरा दूध लाना या फिर मेरा यहां आना अच्छा नहीं लगा। तब केतकी ने उससे पूछा - भाभी ! क्या कोई बात है ?

नहीं दीदी !ऐसी कोई बात नहीं है ,झिझकते हुए वो बोली। 

भाभी !आप विवाह होते ही भइया के साथ चली गयीं थीं ,अब यहाँ रहने के लिए आई हो ,तब अपनी इस ननद को ही सब बताना होगा। उन दोनों बड़ी बहनों की तो शादी हो गयी ,बस मैं ही बची हूँ। 

उसकी बात सुनकर विभा मुस्कुराई और बोली - अच्छा ,आप बताना चाहती हैं ,कि मेरा विवाह नहीं हुआ। अब मेरी बारी है। 

भाभी की बातों का आशय समझ, केतकी शरमाई और तभी उसे श्याम का स्मरण हो आया ,तब बोली -नहीं ,भाभी मेरे कहने का मतलब है ,अब आपकी सभी बातें मैं ही सुन और पूरी कर सकती हूँ। अब बताइये !क्या आपको दूध नहीं पीना है ?

हम्म्म्म ,मन कुछ ठीक नहीं है ,दूध पीने की इच्छा नहीं हो रही ,सर में भी थोड़ा दर्द है। 

मम्मी से कहा -तो नाराज होंगी ,शहर में रहकर चाय पीना सीख गयी उन्होंने तो भइया को भी दूध ही दिया ,कह रहीं थीं -'शहर में तो सारा दिन चाय ही पीता होगा।' 

उनकी बात सही है ,इसीलिए तो दूध यहीं रखवा लिया ,थोड़ी चाय मिल जाती तो...

ठीक है ,ठीक है ,मैं समझ गयी ,तब वो बाहर गयी ,उसे देखकर चिंता ने पूछा ,क्या बहु ने दूध पी लिया ?

अभी उनका मन ठीक नहीं है ,शायद सफ़र के कारण थोड़ा सिर में दर्द है ,तब मैंने ही भाभी से कहा -आपके लिए चाय बनाकर लाती हूँ ,मैंने सोचा ,पापा भी आने वाले हैं ,कहते हुए उसने घड़ी में समय देखा ,भाभी के लिए भी चाय बना देती हूँ। 

अच्छा ,अपने पापा का बहाना क्यों बना रही है ? ला, पानी ले आ !चाय रख देती हूँ। मनीष अंदर कमरे में जाता है और विभा से पूछता है -तुम ठीक हो !

हाँ ,सर में हल्का सा भारीपन है। 

सफ़र के कारण ऐसा हो रहा होगा ,मनीष सहजता से बोला - अभी प्रेम चाय बनवाकर ला रही है ,थोड़ा आराम करोगी तो ठीक लगेगा। कोई भी परेशानी हो तो केतकी से कहना ,मैं अभी उन दोनों छोटे भाइयों से मिलने जा रहा हूँ ,देखूं तो सही क्या कर रहे हैं ?

उसने विभा के उत्तर की प्रतीक्षा भी नहीं की और कमरे से बाहर आ गया। 

कुछ ही देर में केतकी विभा के लिए चाय  लेकर आ गयी और बोली -भाभी !मम्मी ने आपके लिए चाय चुपचाप  बना दी वरना हमें तो डांट पड़ती है। जब घर में दूध हो रहा है ,तो चाय क्यों पीनी है ?अपनी मम्मी की तरह बोली।

 विभा चुपचाप चाय पीने लगी ,तब बोली -अब थोड़ा आराम करूंगी तो ठीक हो जाउंगी। 

हाँ ,अब आप आराम करिये ! दोपहर में खाने के समय आपको आवाज लगा दूंगी कहकर वो बाहर निकल गयी। कुछ देर बाद फिर वापस आई ,भाभी अपने विवाह की तस्वीरें देखोगी। विभा न चाहते हुए भी... हाँ में गर्दन हिलाती है। 

मनीष !ओ मनीष ! माँ ने उसे आवाज लगाई। 

कुछ देर बाद मनीष छत से नीचे आया और पूछा -क्या हुआ ?

अरे ! तू आ गया ,मैं ये कह रही थी ,बहु !को तो गर्मी लगेगी ,अभी तो लाइट आई हुई है। चेतराम के जनेटर से रातभर के लिए तार डलवा ले ! रात में बारह बजे लाइट भाग जाती है। 

अब उनसे तार क्यों डलवाना ? हम भी तो सोयेंगे ,ऐसे ही वो भी सो जाएगी। 

क्या कह रहा है ? वो पहली बार यहां आई है ,रात में ठीक से नींद नहीं आई तो... 

क्या हो गया ? क्या उसके गांव में बिजली नहीं जाती थी ,हालाँकि शहरों में बिजली कम ही जाती है वहां भी जाती है। क्या यहाँ आप लोग नहीं रहते हैं ? माँ -बेटा अभी ये बातें कर ही रहे थे। 

तब केतकी बोली -मम्मी ,हम भी तो ऐसे ही रहते हैं ,भइया ठीक ही तो कह रहे हैं ,भाभी और मैं छत पर सो जायेंगे ,और मच्छरदानी लगा लेंगे। 

तुम्हारी जैसी इच्छा !कहकर चिंतामणि सोचने लगी ,अब इस लड़की से क्या कहूं ? तब मनीष से पूछा -कितने दिनों की छुट्टी लेकर आया है ?

मम्मी ,मैं तो इतवार को चला जाऊंगा। 

बहु ! क्या बहु को साथ लेकर नहीं जायेगा ?

उसे ही तो यहाँ छोड़ने आया हूँ ,कुछ दिन अपने घर रह लेगी ,अब ऐसी हालत में उसके साथ कोई बड़ी -बूढी होनी तो चाहिए। 

क्या कह रहा है ?क्या बहु.... 

हाँ ,कह रही थी ,एक -दो महीना मायके में जाकर रह लूंगी ,फिर ज्यादा समय हो गया तो ऐसे समय में मायके में रहने में अच्छा नहीं लगेगा। 

ऐसा ही तो होता था ,बातों ही बातों में मनीष ने माँ को समझा भी दिया और माँ समझ भी गयी कभी बच्चे इस तरह स्पष्ट नहीं बोलते थे। ऐसी बातें करते हुए भी उन्हें थोड़ा लिहाज़ रहता था। उसने स्पष्ट नहीं कहा कि माँ तुम दादी बनने वाली हो या मैं बाप बनने वाला हूँ। 

माँ एकदम से खुश होते हुए बोली -तू सुबह से आया हुआ है और ये बात, अब बता रहा है। 

ज्यादा समय कहाँ हुआ है ?

मुझे थोड़ा ध्यान तो रखना पड़ेगा ,इसे जीना [सीढ़ी ]नहीं चढ़ने देना है। दोपहर के खाने में माँ ने धीरे -धीरे यह ख़ुशख़बरी सभी को सुना दी। केतकी अब तुझे अपनी भाभी का अच्छे से ख़्याल रखना होगा ,तू बुआ जो बनने वाली है। 

क्या माँ सच कह रही हो ?ख़ुशी से  उछलते हुए केतकी ने पूछा। 

हाँ ,माँ भी मुस्कुरा दी। 

आप भी तो दादी और वे दोनों चाचा ! ख़ुशी के साथ -साथ एक अलग ही अनुभूति हो रही थी ,एक नया रिश्ता जो बनने जा रहा था। केतकी दौड़कर भाभी के पास गयी , भाभी से पूछा - क्या भाभी ,मैंने जो ख़बर सुनी, सच है। 

विभा समझ गयी और मुस्कुराकर बोली -हाँ ,

मुझे बुआ बनने में अभी कितना समय है ?

अभी पूरे सात महीने हैं ,विभा ने शर्माते हुए कहा। 

अच्छा भाभी ,अभी मैं चलती हूँ ,मुझे बहुत काम है ,आप आराम करिये !अपना ख़्याल रखना ,कहकर वो बाहर निकल गयी। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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