मोहिनी उस बच्ची का नाम जानना चाहती है, किन्तु बच्ची ,उससे मना कर देती है। जब मोहिनी ने कारण जानना चाहा ,तब उसने कहा - क्योंकि अगर तुम्हें मेरा नाम याद आ गया…उसकी मुस्कान गायब हो गई तो उसे भी, तुम्हारा नाम याद आ जाएगा।” यह सुनकर मोहिनी के चेहरे का रंग उड़ गया।“उसे बच्ची ने कोई उत्तर नहीं दिया। वह पीछे मुड़ी और अंधेरे गलियारे में गायब हो गई। भानु भी, उसके पीछे जाने लगा लेकिन M.V. ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा -“आगे मत जाओ !”
“छोड़िए !मुझे ”
तब उसने समझाया ,वह तुम्हें जहाँ ले जाएगी, वहाँ से तुम्हारा वापस आना आसान नहीं होगा।”
भानु ने उसकी पकड़ से अपने को छुड़ाया और कहा -मैं, मोहिनी को अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
मोहिनी ने, पहली बार भानु की ओर देखा ,उसके भीतर डर था लेकिन उससे ज्यादा एक भरोसा ,भानु ने धीमे से कहा—जो भी है, उसका साथ मिलकर सामना करेंगे।”
मोहिनी ने, उसका हाथ थाम लिया ,उसी क्षण पीछे से रत्न प्रताप की आवाज़ आई—“अगर तुम दोनों उसके पीछे गए… उन्होंने चेतावनी दी ,जिसे सुनकर दोनों रुक गए
रत्न प्रताप ने कहा—तो अगला दरवाजा तुम्हें उस रात तक ले जाएगा।”
मोहिनी ने पलटकर पूछा—किस रात तक?”
रत्न प्रताप की आँखें झुक गईं और बोला - “17 अगस्त 2001 कमरे में फिर वही तारीख गूँज उठी। मोहिनी ने भानु का हाथ और कसकर पकड़ लिया ,दूर अंधेरे गलियारे में बच्ची की आवाज़ आई—“आओ, मोहिनी …”फिर कुछ पल की खामोशी और उसके बाद—इस बार तुम्हें याद करना ही होगा कि तीसरा बच्चा कौन था।”गलियारे की सारी लाइटें एक साथ जल उठीं किन्तु बच्ची गायब थी ,लेकिन दीवार पर एक नई तस्वीर टंगी थी ,तीन छोटे बच्चे। मोहिनी !भानु और वही तीसरी बच्ची !तस्वीर के नीचे सिर्फ एक तारीख लिखी थी—18.08.2001 मोहिनी ने तस्वीर को देखा और उसके चेहरे पर अचानक पहचान की एक हल्की-सी झलक आई ,उसने काँपते स्वर में कहा—मैं इसे…वह रुक गई।
भानु ने पूछा—“क्या?”
मोहिनी की आँखें तस्वीर से हट ही नहीं रही थीं ,मैं इसे पहचानती हूँ ,सभी चौंक गए। मोहिनी ने बहुत धीमे से कहा—यह लड़की… उस रात से पहले भी मेरे साथ थी, मोहिनी की नजर तस्वीर पर जमी हुई थी ,तीन बच्चे ,मध्य में वह खुद ,उसके एक तरफ छोटा भानु और दूसरी तरफ वही लड़की…जिसे कुछ देर पहले उसने अंधेरे कमरे में अपने सामने खड़े देखा था लेकिन तस्वीर में सबसे अजीब बात यह थी ,इसमें बच्ची का चेहरा नहीं था ,उसके चेहरे पर एक ऐसी सहज मुस्कान थी, जैसे वह मोहिनी और भानु के मध्य हमेशा से रही हो। जैसे तीनों के मध्य कोई ऐसा रिश्ता था, जिसे समय ने मिटाया नहीं था।सिर्फ छिपा दिया था।
मोहिनी ने तस्वीर को उंगलियों से छुआ ,उसे महसूस हुआ जैसे कुछ जानी -पहचानी है “मैं इसे पहचानती हूँ…”उसकी आवाज बेहद धीमी थी।
भानु उसके करीब आया और पूछा -तुम इसे कैसे जानती हो ?”
मोहिनी ने अपनी आँखें बंद कर लीं ,बोली - पता नहीं, न जाने क्यों ऐसा लग रहा है ,जैसे ये चेहरा मुझे याद है,मेरी स्मृतियों में ही कहीं है ? तब भी कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा।”
क्या तुम इसका नाम जानती हो ?”
मोहिनी ने न में गर्दन हिलाई।
फिर इसे कैसे पहचान रही हो?”
मोहिनी ने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन तभी…उसके भीतर एक आवाज गूँजी।बहुत छोटी ,बहुत मासूम, तुम हमेशा मेरी तरफ से बोलना , मोहिनी की आँखें अचानक खुल गईं ,उसने वो तस्वीर नीचे गिरा दी।
भानु ने तुरंत उस तस्वीर को तुरंत पकड़ लिया और पूछा -“क्या हुआ?”
मोहिनी ने उसकी तरफ देखा ,और बताया -उसने मुझसे कुछ कहा था।”
“किसने?”
“वही लड़की ”ऐसा लगा जैसे उसने कुछ कहा।
“क्या?”
मोहिनी ने अपनी कनपटी दबाई और अपनी स्मृतियों पर जोर देते हुए ,उसने कहा था ,वह तोडा रुकी।
“क्या?भानु ने उतावलेपन से कहा। ”
मोहिनी ने धीरे से बताया —उसने कहा ,तुम हमेशा मेरी तरफ से बोलना।कमरे में मौजूद हर व्यक्ति शांत हो गया।
रत्न प्रताप के चेहरे के भाव बदल गए । M.V. ने तुरंत उसकी ओर देखा और पूछा - तुम्हें यह वाक्य कैसे याद आया?”
मोहिनी ने उसकी तरफ देखा ,और पूछा - क्या आप जानते हैं,उसने ऐसा क्यों कहा होगा ?
M.V. ने कोई जवाब नहीं दिया ,भानु ने कठोर आवाज़ में कहा—“अब तो चुप मत रहिए !”
M.V. कुछ क्षण तस्वीर को देखता रहा ,फिर बोला -“यह तस्वीर 18 अगस्त की है।”
मोहिनी ने चौंककर पूछा—लेकिन तारीख 18 अगस्त ही क्यों?”
“क्योंकि 17 अगस्त की रात के बाद…”M.V. रुक गया ,बहुत कुछ बदल गया था।”
रत्न प्रताप ने तुरंत कहा—उसे पूरी बात मत बताओ !
मोहिनी पलटी और उनसे जानना चाहा -“क्यों?”
रत्न प्रताप चुप हो गया ,“हर बार यही होता है।मोहिनी की आवाज में शिकायत थी।जब भी कोई बात मेरे सामने आती है, कोई न कोई कहता है—अभी नहीं।”
भानु ने उसकी ओर देखा ,मोहिनी की आँखों में इस बार आँसू नहीं थे सिर्फ जिद थी। लेकिन अगर मेरी यादें लौट रही हैं…उसने कहा -तो मैं उन्हें रोकूँगी नहीं।”
M.V. ने उसे गौर से देखा ,यही तो डर है।”
“किस बात का?”
“तुम्हारा नहीं ,उसने धीमे से कहा—उन लोगों का जिन्होंने तुम्हारी यादें छिपाईं हैं । ”
अचानक मोहिनी के सिर में फिर दर्द उठा और इस बार…याद पहले से साफ थी।
18 अगस्त 2001
सुबह की हल्की धूप हवेली के पुराने आँगन में उतर रही थी।रात की आग के बाद पूरा आँगन धुएँ की गंध से भरा था। दीवारों पर कालिख थी।कुछ खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे और एक कोने में लकड़ी का सामान अभी भी सुलग रहा था।छोटी मोहिनी एक पत्थर की सीढ़ी पर बैठी थी।उसके कपड़ों पर धूल लगी थी।बाएँ हाथ पर हल्की चोट थी।वह लगातार किसी को ढूँढ रही थी।“वह कहाँ गई?उसने पूछा।उसके सामने खड़ा छोटा भानु चुप था। क्या तुमने उसे देखा था ? भानु ने सिर झुका लिया ,“नहीं !
“झूठ,मोहिनी ने गुस्से में कहा ,तुमने उसका हाथ पकड़ा हुआ था।”
भानु ने उसकी तरफ देखा ,उसकी आँखें लाल थीं ,शायद वह रातभर रोया था ,वह वापस आएगी।”
“पक्का?”
भानु ने कुछ क्षण सोचा ,फिर अपनी छोटी उंगली आगे बढ़ा दी।
“पक्का।”मोहिनी ने अपनी उंगली, उसकी उंगली से मिला दी ,“वादा?”
“वादा।”
उसी समय पीछे से किसी बच्ची की हँसी सुनाई दी ,दोनों ने पलटकर देखा ,वही लड़की, आँगन के दूसरे छोर पर खड़ी मुस्कुरा रही थी।उसके हाथ में कुछ था ,एक छोटी-सी लाल रिबन।
मोहिनी खुशी से उठी और उससे पूछा -“तुम!”वह दौड़कर उसके पास आई ,“तुम कहाँ चली गई थीं? मोहिनी ने परेशान होते हुए उससे पूछा।
बच्ची ने कुछ नहीं कहा ,बस लाल रिबन मोहिनी के हाथ में रख दिया और बोली -“इसे अपने पास रखो !”
मोहिनी ने पूछा—“क्यों?”
“क्योंकि अगर मैं खो जाऊँ…बच्ची मुस्कुराई ,तो इससे तुम ,मुझे पहचान लेना।”मोहिनी ने रिबन अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया।
तुम खोओगी ,क्यों ?”
बच्ची ने कोई उत्तर नहीं दिया ,भानु भी उनके करीब आ गया और बोला -“हम तीनों साथ रहेंगे।”
बच्ची ने भानु की ओर देखा ,“हमेशा?”
“हमेशा ,वह भी मुस्कुराई ,फिर अचानक उसका चेहरा गंभीर हो गया “लेकिन अगर कोई हमें अलग करे तो? भानु ने कहा—“मैं तुम्हें ढूँढ लूँगा।”
मोहिनी ने भी कहा—“मैं भी ,उस बच्ची ने दोनों के हाथ पकड़ लिए और बोली -अब एक बात याद रखना।”
“क्या?”
“हम तीनों का निशान चिन्ह !”उसने जमीन पर उंगली से कुछ बनाया ,दो साँप !और उनके मध्य एक छोटा-सा फूल।फूल के अंदर तीन छोटे अक्षर ,m . b . ?
मोहिनी ने पूछा— यह तीसरा अक्षर कौन-सा है ?”
