शिल्पा ने नौकरी तो छोड़ दी थी, किंतु उसके चेहरे से पता नहीं चल पा रहा था, कि वह नौकरी छोड़कर प्रसन्न है या फिर कुछ और ही बात है। प्रवीण चाहता था ,उससे बात करे किन्तु शिल्पा की उदासी देखकर वो शांत रहा, यदि कुछ बात है तो इसे सम्भलने में थोड़ा समय तो लगेगा यद्यपि वो शिल्पा से नाराज था किन्तु उससे प्यार भी तो करता था।
तुम ठीक तो हो ,प्रवीण ने पूछा।
हाँ ,मैं ठीक हूँ।
लगता तो नहीं ,क्या कोई बात है ?जिसके कारण परेशान हो। क्या उस चतुर ने कुछ कहा ?
नहीं, वो मुझे क्या कहेगा ? अब वो स्वयं ही परेशान हो रहा होगा ,मैंने ,उसे बिना बताये ही नौकरी छोड़ दी।
ऐसा क्यों ?
अब मुझे वहां अच्छा नहीं लग रहा था ,मैंने अपना वेतन लेकर नौकरी छोड़ दी।
शिल्पा ने, अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ दी थी, किंतु उसे मन ही मन इस बात का दुख था कि चतुर ने उसे इस बात का मौका भी नहीं दिया कि वह अपनी बात कह सके। उसने एक बार भी यह नहीं सोचा-' कि वह उसके नाम चोरी लगा रहा है। उसने, मुझे अपनी बात समझाने का मौका भी नहीं दिया। मन अंदर ही अंदर कड़वाहट से भर गया। लोग इसके विषय में सच्च ही कहते हैं ,'कि यह कैसा इंसान है ?''किन्तु अंदर ही अंदर इस बात का दुःख था ,वो उसके बहकाये में कैसे आ गयी ? उस बात को भुला नहीं पा रही थी। वो कैसे उसकी बातों में उलझकर बहक गयी।
प्रवीण को बताया,तो पता नहीं, क्या सोचे ? मुझे माफ भी कर पायेगा या नहीं ,उसे तो जब समझाउंगी ,जब अपने आपको ही नहीं समझा पा रही हूँ। मुझमें ,उससे बताने का साहस भी नहीं है।
इस बात का भी उसे आश्चर्य हो रहा था ,चतुर कई बार उसके घर आया था ,जब तक उसके विद्यालय में नौकरी नहीं की थी, किन्तु तीन दिन हो गए ,उसने एक बार भी फोन करके जानने का प्रयास भी नहीं किया और भाभी जी कैसी हो ?आप स्कूल क्यों नहीं आ रहीं हैं ? इसका मतलब अब उसका, मुझसे कोई काम नहीं ,यही सोचकर उदास हो गयी। उसने स्वार्थ तो सिद्ध ही कर लिया। अंदर ही अंदर घुटन होती और उसके प्रति क्रोध बढ़ता जाता।
ऐसे में यदि कोई अध्यापिका मिली तो उनसे नौकरी छोड़ने का क्या कारण बताऊंगी ? फिर सोचा ,कुछ भी कह दूंगी, लेकिन अब इसकी प्रशंसा के लिए तो मेरे मुख से एक शब्द भी न निकलेगा।
क्या सोचा था ,क्या हो गया ? अपने को ''ठगा सा महसूस कर रही थी।'' शिल्पा सोच रही थी, कि जब पैसों की बात आएगी तब' मैं 'उसे अपने पास से पैसे वापस करके अपना बड़प्पन दिखाऊंगी ,'कि मैंने अपने पैसे ले लिए हैं ,किंतु मैं चाहती थी, कि आप मेरे पैसे वापस करें क्योकि आपने मुझसे झूठ बोलकर पैसे लिए थे जबकि आपके रजिस्टर में तो ऐसा कुछ नहीं है ,इसके पीछे आपका क्या उद्देश्य था ? मैं समझ नहीं पाई,किंतु उसने तो ऐसा भी मौका नहीं दिया और मुझे ही चोर ठहरा दिया। इस बात का भी उसे रह- रहकर मलाल हो रहा था।
समीर ने उर्वशी से पूछा -फिर क्या तुम्हारी कभी शिल्पा से मुलाकात नहीं हुई ,उसके विषय में कुछ जानकारी नहीं मिली कि उसके साथ क्या हुआ ?उसने अपने पति को कुछ बताया या नहीं।
कुछ दिनों तक तो, हम लोग नहीं गए और न हीं, हमें कोई जानकारी मिली ,किंतु एक दिन कुछ अध्यापिकाएं जो शिल्पा को पसंद करती थी और कपिला को ना पसंद करती थीं। वो सभी इकट्ठा होकर, शिल्पा के विषय में जानने के लिए उसके घर पहुंच गई ,मैं भी उन सभी के साथ थी ,हम सब उनके न आने का कारण जानना चाहती थी कि आखिर उन्होंने आना क्यों छोड़ दिया ?
हालांकि सच्चाई तो कोई नहीं बताता है ,लेकिन हमें लगता था ,जो भी जानकारी मिलेगी ,वही सही होगी ,ऐसा हम सोच सकते हैं। जब हम लोग शिल्पा के घर पहुंचे, तो शिल्पा अपने कमरे में आराम कर रही थी . हमें देखकर अत्यंत प्रसन्न हुई और बोली -मुझे तो लग रहा था ,तुम सभी मुझे भूल गए।
आपको कैसे भूल सकते हैं ?आपने हमारे साथ इतना समय बिताया और अचानक ही नौकरी छोड़ दी ,हमें लगा ,कहीं आपकी तबियत तो नहीं बिगड़ गयी है।
सर से पूछा -उन्होंने तो आप ही की गलती बताई दिव्या अपनी ही झोंक में कह गयी।
शिल्पा ने एकदम सचेत होकर पूछा - सर ,क्या कह रहे थे ?
यही कि..... कहते हुए चुप वो हो गयी क्योकि उसके साथ वाली लड़की ने उसके हाथ पर अपना हाथ मारकर ,उसे चुप रहने का इशारा किया था।
चुप न रहो !मुझे बताओ !उन्होंने क्या कहा ?
यही कि आपकी ये हरक़तें बहुत ही ग़ैर जिम्मेदाराना हैं ,आपको उन्हें कोई तो संदेश भेजना चाहिए था।
क्यों ? क्या उन्होंने, मुझसे पूछा -मैम !आप क्यों नहीं आ रहीं हैं ? जब अपना मतलब था, तो भाभी -भाभी कहकर मेरे घर आ जाते थे और अब स्कूल चल गया तो अब हमारी आवश्यकता नहीं रही ,शिल्पा क्रोध में बोली। तब उसने महसूस किया, इन्हें क्रोध दिखलाने से क्या लाभ ?कम से कम ये तो मेरा हालचाल पूछने तो आ ही गयीं हैं ।
तब अपने को शांत करके बोली -जो हमसे प्यार करते हैं ,वो तो मिलने आ ही गए ,उनकी तरफ देखकर मुस्कुराई। वैसे अब मेरा कार्यभार किसने संभाला है ?
वही सर की चमची' कपिला जी !'
वो तो मुझे लग ही रहा था ,चिढ़ते हुए शिल्पा बोली।
ख़ैर ये सब छोड़िये !आप सभी को देखकर एक सुखानुभूति हुई है। लगता है ,कुछ लोग मुझे अभी भी नहीं भूले। साथ रहकर नौकरी करने का या एक दूसरे से मिलने का यही तो लाभ होता है, एक दूसरे की फिक्र होती है। तभी तो आप लोग मेरा हालचाल पूछने आ गयीं।
किंतु आप हमें भूल गईं , सभी ने एक साथ कहा , आपने आना क्यों छोड़ दिया ? तब शिल्पा बोली -मेरे पति को तो पहले से ही नौकरी करना पसंद नहीं थी, तुम तो जानती ही हो कि मुझे.... तब तक शिल्पा उनके लिए चाय -नाश्ता ले आई। मुझे कोई आर्थिक परेशानी तो है नहीं, किंतु तुम्हारे जो स्कूल का संस्थापक यानि कि ''चतुर भार्गव'' उनका नेचर सही नहीं है।
हम कुछ समझे नहीं ,वे सभी ,कुछ न समझते हुए बोलीं।
मुझे भी देर से ही समझ में आया ,पहले तो मैं यह सोच रही थी-चलो ,सब ठीक हो जाएगा ! मैंने उनकी कितनी सहायता की, बच्चों की फीस भी नहीं आती थी ,तब मैंने अपना वेतन भी नहीं लिया। तुम लोगों ने तो देखा ही ही होगा कि हमारे आपस के संबंध कितने घनिष्ठ थे ? मैं उनके घर भी जाती थी ,वो अक्सर कहते मेरी पत्नी कम पढ़ी -लिखी है ,मूर्ख है ,आप जरा उसे समझाइये।
मन ही मन शिल्पा सोच रही थी ,उसकी इन बातों के कारण ही तो मैं ठगी गयी थी। कहता था -भाभी जी !आप अपने परिवार को कितने अच्छे से संभाल रहीं हैं ?काश ! मेरी पत्नी भी आपकी तरह सुंदर और होशियार होती। आप मेरे स्कूल में आइये !अपना सहयोग दीजिये और उसे भी समझाइये !
तब आपने क्या किया ?
