शिल्पा जी के, अचानक बिना किसी को बताये,स्कूल से चले जाने पर, अन्य अध्यापिकाओं ने जानना चाहा कि वो स्कूल क्यों नहीं आ रही हैं ? किंतु इस बात का चतुर ने कोई विशेष उत्तर नहीं दिया। बल्कि वह शिल्पा जी को ही कहने लगा,' कि वो एक जिम्मेदार अध्यापिका नहीं है, जाने से पहले ,कम से कम उन्हें स्वयं बताना तो चाहिए था कि वो जा रही हैं। शिल्पा भी चतुर के व्यवहार से आहत थी , अब उसका इस विद्यालय में मन नहीं लग रहा था इसलिए उसने न आने का निर्णय कर लिया था।
तब अन्य अध्यापिकाओं ने चतुर से जानना चाहा -शिल्पा जी, के चले जाने के पश्चात , उनका स्थान रिक्त हो गया है ,अब शिल्पा जी का कार्यभार कौन संभालेगा ?
हर किसी को लगता था, शिल्पा जी को बड़ा सम्मान मिलता है और उन सबसे बड़ा माना जाता है, इसीलिए वे लोग भी चाहती थी कि अब शिल्पा का पद हमें मिले।
तब चतुर ने, कपिला की और इशारा करते हुए कहा -आप ! जहां तक मेरा विचार है, आप अच्छे से इस कार्यभार को संभाल सकती हैं। आप हमारे स्कूल की एक अच्छी शिक्षिका हैं ,इनके पढ़ाये बच्चों का परीक्षा परिणाम भी अच्छा रहा है। अब कपिला पर जाल फेंकने का चतुर का अगला प्रयास था।
एक दो अध्यापिका को, उनका निर्णय अच्छा नहीं लगा तब उन्होंने पूछा -सर ! क्या इसका अर्थ हम यही समझ लें, कि अब शिल्पा जी नहीं आएंगी।
देखिए, मैं ऐसा तो नहीं कहता, कि वो आएंगी ही नहीं, किंतु उन्होंने बिना किसी को सूचित किये, अपने कार्यभार से छुट्टी ले ली है ,अगर उन्होंने अधिक समय लगाया, और न आने का हमें कोई कारण नहीं बताया तो यह स्थान कपिला जी को ही मिल जाएगा और उन्हें अब इस स्कूल में से मुक्ति मिल जाएगी।
प्रसन्न होते हुए ,कपिला बोली - धन्यवाद !सर !जो आपने मुझे इस क़ाबिल समझा। यदि शिल्पा जी वापस आ गयीं तो क्या ?
मुझे नहीं लगता, अब वो वापस आएँगीं और यदि आती भी हैं तो आप अपनी जगह ही रहेंगी ,चतुर ने कपिला को विश्वास दिलाया।
सभी ने कपिला को उसकी उन्नति के लिए बधाई दी ,उनके पैसे भी बढ़ा दिए गए।
प्रतिदिन की तरह कपिला आज उस कक्ष में आकर अपना कार्यभार संभालने के लिए पांच मिनट पहले ही आ गयी। आज उसने कलफ़ की हुई गुलाबी सूती साड़ी पहनी थी। लम्बी -छरहरे बदन की कपिला आज खूब जंच रही थी। आज सभी की दृष्टि उस पर जमी थी। चतुर ने एक नजर उसे देखा और मुस्कुराया।
क्या हुआ ?सर !आप क्यों मुस्कुरा रहे हैं ?
कुछ नहीं ,शिल्पा जी के कारण मैं आपकी अद्भुत कार्यक्षमता को पहचान तो गया था किन्तु उनके कारण कहना अच्छा नहीं लग रहा था। अच्छा हुआ ,उन्होंने स्वयं ही आपके लिए ये स्थान रिक्त कर दिया।
सर ! यदि आपको कुछ बुरा न लगे तो....क्या मैं एक बात पूछ सकती हूँ ?
हाँ ,पूछिए !अब तो आप मालकिन हैं।
नहीं ,सर ! ऐसी कोई बात नहीं है ,मैं ये पूछना चाहती थी , उस दिन क्या हुआ था ?
आप किस दिन की बात कर रहीं हैं ?
उस दिन, जब सभी को वेतन दिया जा रहा था।
ऐसा तो कुछ नहीं था ,कहते हुए चतुर ने अनभिग्यता का ढोंग किया।
नहीं, सर ! उस दिन मैंने देखा था ,वो अंदर आपके घर की तरफ भी गयीं थीं और जब बाहर आईं तो उनका चेहरा उतरा हुआ था।
अच्छा !मैंने तो नहीं देखा ,हो सकता है ,मेरी पत्नी से कोई बात हुई हो ,मैं इस विषय में कुछ नहीं जानता। ख़ैर ! आप ये सब छोड़िये !अब आप अपना कार्य सम्भालिये ! जिसको जाना है ,उसे हम रोक तो नहीं सकते ,आगे बढिये !कहकर उसने बात को वहीं समाप्त कर दिया।
शिल्पा अपने घर में आराम से बिस्तर पर लेटी थी ,आज बच्चों के स्कूल की भी छुट्टी थी ,वो भी नहीं उठे थे। तभी उसे ध्यान आया प्रवीण तो चाय पीते हैं ,उठकर उन्हें चाय बनाकर दी और अपनी चाय लेकर बिस्तर पर पहुंच गयी और सिरहाने से लगकर चुपचाप चाय पीने लगी।
प्रवीण,शिल्पा को देख रहा था ,आज न ही कोई जल्दबाज़ी न ही भागमभाग ,फिर सोचा शायद आज स्कूल की छुट्टी होगी। यह सोचकर वो चुपचाप बाहर टहलने चला गया। वो स्कूल भी ज्यादा दूर नहीं था ,रास्ते में ही पड़ता था ,प्रवीण ने देखा ,उस स्कूल के रिक्शे बच्चों से भरे जा रहे थे। अध्यापिकाएं भी जा रहीं थीं किन्तु आज शिल्पा तो तैयार नहीं हुई। हो सकता है ,उसने छुट्टी ले ली हो। वरना स्कूल तो उसके लिए बहुत आवश्यक हो गया है। मेरे मना करने पर भी उसने जाना नहीं छोड़ा और फिर जब उसे, अपने दोस्त की बताई बात स्मरण हो आई ,तो उसका क्रोध बढ़ गया।
अगले दिन भी जब शिल्पा स्कूल जाने के लिए तैयार नहीं हुई तो प्रवीण ने पूछ ही लिया ,-'तुम्हारा स्कूल तो खुला है।
हाँ ,शिल्पा ने संक्षिप्त सा जबाब दिया। अंदर ही अंदर वो अपने आपसे ही शर्मिंदा थी ,प्रवीण से क्या कहे ?सुबह का समय था ,दूर कहीं किसी ने रेडियो चला रखा था ,जिस पर गाना चल रहा था -''सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया ?''शिल्पा को लगा जैसे ये गाना उसी के लिए चल रहा है। तब प्रवीण से बोली -मैंने, वो स्कूल छोड़ दिया।
मन ही मन प्रवीण प्रसन्न हुआ ,फिर भी नाश्ता करते हुए शांतिपूर्वक शिल्पा से पूछा -क्या हुआ ? तुमने नौकरी छोड़ी है ,या निकाल दिया गया ,साथ ही व्यंग्य भी कर दिया।
शिल्पा तड़प उठी ,उसने प्रवीण की तरफ देखा और बोली -मुझे कौन निकालेगा ,इतने अच्छे से उसका स्कूल संभाला है किन्तु अब लगता है ,मैं दोनों जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाऊँगी। बच्चे भी आजकल पढ़ाई में ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शिल्पा ने ये सब कह तो दिया किन्तु उसके चेहरे की उदासी कुछ और ही कहानी बयान कर रही थी। प्रवीण को लगा, बात तो अवश्य ही कुछ हुई है ,वरना इसके चेहरे पर यूँ उदासी न आती। मुझे जो बातें मेरे जानने वाले ने बताई कहीं न कहीं उनमें सच्चाई हो सकती है। ख़ैर जो भी हुआ है ,सही है ,धीरे -धीरे सम्भलेगी। तब तो बताएगी। प्रवीण सोच रहा था ,इसने कभी मुझसे कुछ नहीं छुपाया किन्तु इन दिनों तो इसके तेवर ही बदल गए थे। इसने नौकरी छोड़ी है किन्तु इसका चेहरा ये नहीं बता रहा कि इसने ख़ुशी से ये नौकरी छोड़ी है। हो सकता है, इसे हटा दिया गया हो। कुछ कारण तो अवश्य रहा हैं।
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