शिल्पा ,चतुर की शिकायत लेकर कस्तूरी के क़रीब गयी थी और वो चाहती थी ,बातों ही बातों में चतुर की हरकतों के विषय में भी उसे बताये। जिस पर वो इतना विश्वास करती है। उसका पति किस तरह से उसे धोखा दे रहा है ? तब बातों ही बातों में कहती है - मैं इस स्कूल में रहूं न रहूं ,मैंने सोचा ,एक बार तुमसे मिलती चलूँ। उसके इस प्रकार कहने पर कस्तूरी ने पूछा -क्या आप स्कूल छोड़कर जा रहीं हैं ?
हाँ ,सोच तो रही हूँ ,अब बहुत नौकरी कर ली ,नौकरी के चलते घर पर ध्यान नहीं दिया जाता ,वो भी नाराज़ रहते हैं। वो बात तो छोडो ! अच्छा,ये बताओ ! स्कूल में क्या चल रहा है ?तुम्हें कुछ ध्यान भी रहता है या नहीं। तुम्हारे पतिदेव स्कूल चला रहे हैं या फिर कुछ और ही.... बड़ी आत्मियता से शिल्पा ने उससे पूछा।
इस काम के लिए तो वही हैं ,अब क्या गृहस्थी का काम छोड़कर मैं भी वहीं चली जाउंगी, तो घर कौन संभालेगा ?
यह बात तो तुम ठीक कह रही हो ,किन्तु तुम मेरी इस बात को ध्यान से सुनना और समझने का प्रयास करना, अपना समझकर ही तुम्हें बता रही हूं , शिल्पा ने धीरे और बड़े रहस्यमई तरीके से कस्तूरी से कहा।
आप क्या कहना चाहती हैं ?मुझे कुछ समझ नहीं आया।
मैं यही कहना चाहती थी ,कभी अपने पतिदेव का ख्याल भी रख लिया कीजिए।
मैं, उनका बड़े अच्छे से ख्याल रखती हूं, ख्याल रखते ही रखते तो तीन बच्चे हो गए कहकर मुस्कुराई जैसे कोई चुटकुला सुनाया हो ,तब भी मैं आपका मतलब नहीं समझी।
देखिए ! यह बात आपके और हमारे बीच रहनी चाहिए एक औरत होने के नाते मैं, यह बात आपको बता रही हूं, आपके पतिदेव की नजर ठीक नहीं है।
कैसे, नजर ठीक नहीं है ?मैं कुछ समझी नहीं , क्या आपको, उन्होंने कुछ कहा ? उसने शिल्पा के चेहरे पर नजर गढ़ाते हुए पूछा।
नहीं, ऐसा तो कुछ भी नहीं है, किंतु मैं बताना चाहती हूं कि वह महिला अध्यापिकाओं के साथ कुछ ज्यादा ही घुल मिल जाते हैं।
हां जानती हूं, यह उनका स्वभाव है ,सभी से हंस- बोलकर बात करते हैं।
क्या तुम्हें पता है ? वो उनके साथ, कुछ ज्यादा ही नज़दीकी संबंध बना लेते हैं, शिल्पा ने रहस्यमयी तरीके से कस्तूरी को बताया।
अब कस्तूरी थोड़ा गंभीर हो गई और बोली -इसमें क्या उन्हीं की गलती है ?
मतलब ,मैं कुछ समझी नहीं, क्या तुम्हें अपने पति की गलती नजर नहीं आती ?
हां ,मैं मानती हूं ,वो गलत करते हैं किंतु जिसके साथ गलत कर रहे हैं ,वो भी तो कम नहीं। उसने ,उन्हें बढ़ावा दिया, तभी तो वो आगे बढ़े। किसी से जबरदस्ती तो नहीं की और यह बात आप कर रही हैं , जो स्वयं उनके इतने नजदीक थीं। आप क्या समझती हैं ,मैं कुछ जानती नहीं , तीन बच्चों की मां हूं ,कोई बच्ची नहीं हूं कि स्त्री और पुरुष के संबंध को समझ न सकूं।
आप भी तो उनके इतने करीब आ गई थी ,कि अपना वेतन तक नहीं लिया और उन्हें ,अपने पति से पैसे छुपाकर उन्हें दे दिए ,व्यंग्य से वो मुस्कुराई। क्या मैं, यह बातें नहीं जानती हूं ? ये बात, आप मुझसे कह रहीं हैं, उन शब्दों पर ज़ोर देते हुए बोली। आपकी जगह यदि मैं होती तो पहले, अपने पति के लिए सोचती ,उनकी सहायता करती ,किन्तु आपने क्या किया ? क्या मुझे बताने की आवश्यकता है ?
मुस्कुराते हुए बोली -आप मेरे पति के लिए परेशान थीं। तब मुझे, उनके लिए परेशान होने की या उनका ख़्याल रखने की क्या आवश्यकता है ?जब आप जैसी बहनजी !उनका ख़्याल रखतीं हैं। इसमें मैं ,अपने पति की गलती नहीं मानती हूं। मैं उस औरत की गलती मानती हूं ,जो उनके बहकावे में आती है ,जबकि वो जानती है , कि वो एक शादीशुदा पुरुष है, उनके बच्चे हैं। कभी उन्होंने आपसे छुपाया ,कि उनका परिवार नहीं है और आप तब भी उनकी नज़रों में आने के लिए ,अपने पति से भी झूठ बोलती रहीं। बच्चों को पढ़ाने पर ध्यान देने की बजाय, उन पर ध्यान देतीं।
मैं भी तो यहीं रहती हूं , कहीं दूर नहीं गई हूं। पुरुष तो भटक ही जाता है। गलती तो उन महिलाओं की है, जो अपने पति को धोखा देकर ,अपने पति से छुपकर ग़ैर से संबंध बनाती हैं । जो पुरुष तुम्हें कुछ दिन पहले ही मिला उस पर विश्वास कर लिया और जो रिश्ता वर्षों से साथ है ,उसको वे धोखा देती हैं। कस्तूरी के शब्द शिल्पा को किसी तमाचे से कम नहीं लग रहे थे।
तब भी शिल्पा अपनी बात बड़ी रखने के लिए बोली - वो इतनी महिलाओं से मिलते हैं ,आपको ईर्ष्यां नहीं होती ,क्रोध नहीं आता, असुरक्षा की भावना नहीं आती या फिर तुम दोनों मिलकर ये धंधा चला रहे हो।
शिल्पा के इतना कहने पर, कस्तूरी को क्रोध आया और शिल्पा को घूरते हुए बोली - वो जिस तरह से मुझे सब बताते हैं, कि कौन मेरे कितने करीब आई है और वो हँसते हैं ,तब मुझे उन महिलाओं पर क्रोध नहीं ,ऐसी महिलाओं पर तरस आता है ,किस तरह वो इसका खिलौना बन गयी ?
जब तुम उनके करीब आई थी, तो क्या मुझे गुस्सा नहीं आया था ? तुम क्या सोचती हो, मैं कुछ जानती नहीं समझती नहीं ,कमरा बंद करके तुम दोनों कौन सा काम कर रहे थे ? मुझे शुरू -शुरू में क्रोध भी आया था किंतु मैं तुम्हारा गिरता चरित्र देख रही थी, तुमसे बेहतर तो कम पढ़ी -लिखी महिला ही ठीक रही। पढ़ -लिखकर पर किस तरह तुम्हारा हनन हुआ ?ये भी न समझा सकी। मेरे मन में जो तुम्हारे प्रति सम्मान था ,वो कब का समाप्त हो गया ? मैंने उनसे कहा भी ,'ये सब क्या चल रहा है ?'
मेरे पति ने मुझे विश्वास दिलाया,''तुम ही मेरा पहला और आख़िरी प्यार रहोगी।'' चाहे कोई भी मेरी जिंदगी में कितनी बार भी आ जाए, मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगा। यही विश्वास हम दोनों को एक दूसरे से बांधे हुए हैं।अपने काम के लिए उन्हें, तुम जैसी औरतों से काम कैसे निकलवाना है ? वे बख़ूबी जानते हैं।
तुम जैसी औरत से तुम्हारा क्या मतलब है ? घूरते हुए शिल्पा ने उसे देखा। तुम कैसी औरत हो ?जो अपने पति का साथ दे रही हो ,सच्चाई जानकर भी उसके साथ हो।
मैं अपने पति की कमजोरी नहीं ,एक आदमी तभी कमज़ोर पड़ जाता है ,जब उसकी पत्नी उसके साथ खड़ी दिखाई न दे।
ये तुम्हारा कैसा प्यार है ? वो, दूसरी औरतों की भावनाओं से खेलता है ,उनका इस्तेमाल करता है और तब भी तुम उसका समर्थन करती हो।
ये उनका काम निकलवाने का तरीक़ा है ,अच्छा ये बताइये ! मेरे पास तो कोई पुरुष नहीं आता , क्योंकि मैं कभी किसी पराये पुरुष के सामने कमजोर नहीं पड़ती। किसी के सामने अपने घर की बातें नहीं करती। बैठे -बिठाये किसी की झोली में गिरने की, कोशिश नहीं करती। मुझसे तो कोई हमदर्दी नहीं जताता, इसीलिए वो, जिसके साथ भी जो करते हैं ,उनके व्यापार का ही एक हिस्सा है।
आप ही बताइये ! यदि वे आपसे इतने प्रेम से बात नहीं करते ,आपको सम्मान नहीं देते, तो क्या आप हमारे स्कूल में पढ़ाने आतीं ? उन्होंने आपकी ऐसी कैसी प्रशंसा की ? आप तो दौड़ी चलीं आईं ,जबकि आपको तो नौकरी की आवश्यकता ही नहीं थी।
