Kiski dulhan [part 58]

भानु और मोहिनी सच्चाई की तह तक जाना चाहते हैं किन्तु रत्न प्रताप ने उन्हें फिर से रोकना चाहा ,और कहा ,ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है ,इसमें जान को खतरा है। 

तब मोहिनी पूछती है ,किसकी जान को खतरा है ?

रत्न प्रताप ने ,उसकी तरफ देखा ,“तुम्हारा”

मोहिनी ने बिना झिझक जवाब दिया— आप ,मुझे अब डराकर नहीं रोक सकते।”

रत्न प्रताप कुछ कहता, उससे पहले रूद्र बोल पड़ा—आज की रात हम मोहिनी के कमरे पर नजर रखेंगे।”

भानु  ने, 'न' में सिर हिलाया।

रूद्र ने उसकी तरफ देखा ,“क्यों?”


“क्योंकि अगर किसी को पता चल गया कि हम निगरानी कर रहे हैं, तो वह अपना तरीका बदल देगा।”

मोहिनी ने कहा—कह तो तुम ठीक रहे हो ,तो फिर क्या करेंगे?”

भानु ने मेज पर पड़ी पर्ची उठाई ,उस पर लिखा था—“आज रात दो बजे अकेली आना।” हम उसी जगह से शुरुआत करेंगे, जहाँ से यह सब शुरू हुआ था।”

भानु ने पूछा—“क्या ऊपरी मंजिल से....?”

“नहीं ,भानु ने मोहिनी की तरफ देखा ,उस जगह से जहाँ मोहिनी हर रात जाने के बाद लौटती है।”मोहिनी की आँखें आश्चर्य से फैल गईं ,उसने पूछा - क्या तुम्हें पता है,कि मैं कहाँ जाती हूँ?”

रणवीर ने सिर हिलाया ,“नहीं।”

तो फिर तुमने, ऐसा क्यों कहा ?

लेकिन आज रात सब पता चल जाएगा।”

मोहिनी का कमरा - दोपहर तक हवेली में सब कुछ सामान्य दिखने लगा था।रसोई से बर्तनों की आवाज आ रही थी। रणवीर किसी नौकर से बहस कर रहा था। रूद्र अपने कमरे में पुराने रिकॉर्ड देख रहा था और रत्न प्रताप …वह अपने कमरे में बंद था।

मोहिनी खिड़की के पास बैठी ,अपनी माँ मृणाल की पुरानी तस्वीर देख रही थी ,उसकी आँखों में एक अजीब-सी उदासी थी। मोहिनी  ने भावुक होकर तस्वीर को हाथ में लिया ,“माँ…”उसकी आवाज बहुत धीमी थी। अगर आपने मुझे छोड़ा नहीं था, तो फिर मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया? तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।मोहिनी ने तस्वीर रख दी और बैठते हुए बोली -“आइए !”

दरवाजा खुला ,एक नौकरानी भीतर आई ,उसके हाथ में एक छोटी-सी ट्रे थी।“बहूजी ! आपके लिए दूध।”

मोहिनी ने ट्रे की तरफ देखा ,और बोली -“मैंने तो दूध नहीं मँगवाया।”

नौकरानी ने कहा—'छोटे ठाकुर' ने भेजा है।”

“भानु ने?”

“जी।”

मोहिनी ने गिलास उठा लिया ,नौकरानी जाने लगी, तभी मोहिनी ने उसे रोक लिया -“सुनो।”

वह वापस पलटी ,“जी, बहूजी !”

“तुम्हारा नाम क्या है?“जी कमला !”

“कमला ! तुमसे एक बात पूछूँ?”

“जी,पूछिए !”

“क्या तुमने कभी मुझे रात के दो बजे कमरे से बाहर जाते देखा है?”

कमला के चेहरे पर हल्का-सा बदलाव आया किन्तु तुरंत ही सम्भल गयी ,लेकिन मोहिनी की नजरों से छिपा नहीं।

“क्या हुआ? कुछ बोलो !”

कमला ने तुरंत नजरें झुका लीं,“नहीं, बहूजी !मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा। ”

मोहिनी ने गिलास मेज पर रख दिया और सख़्त लहज़े में बोली - तुम,मुझसे झूठ बोल रही हो।”

कमला घबरा गई ,“नहीं, बहु जी…!”

“कमला ! मुझे सब सच-सच जानना है।”

कुछ पल की चुप्पी के बाद कमला ने धीरे से कहा -मैंने आपको कभी बाहर जाते नहीं देखा।”

“तो?”

“लेकिन कई रातों में… आपके अपने कमरे से ही पायल की आवाज आती है।”

मोहिनी का दिल तेजी से धड़कने लगा ,किस समय ?”

कमला ने बहुत धीमे कहा—“रात्रि के दो बजे !”

मोहिनी ने उसका हाथ पकड़ लिया और फिर ?”

कमला ने घबराकर दरवाजे की तरफ देखा,फिर… गलियारे में किसी और के कदमों की आवाज आती है।”

“किसके?”

कमला ने सिर' न 'में हिला दिया ,मैंने कभी किसी को नहीं देखा।”

तुमने,ये मुझे  पहले क्यों नहीं बताया?”

कमला की आँखों में डर उतर आया ,क्योंकि मुझे मना किया गया था।

मोहिनी का हाथ ढीला पड़ गया ,“किसने मना किया ?”

कमला ने अपने होंठ खोले ही थे , उसी समय बाहर से किसी ने आवाज लगाई—“कमला !”

वह चौंक गई , अब मुझे जाना होगा, बहूजी !”

मोहिनी  ने उसका हाथ छोड़ दिया ,“कमला…वह दरवाजे पर रुक गई।मोहिनी ने कहा—आज की रात अगर तुमने कुछ देखा… तो मुझे बताना।”कमला ने धीरे से सिर हिलाया और फिर वह चली गई।मोहिनी  कुछ देर तक दरवाजे को देखती रही।अब उसके सामने एक नया सवाल था। अगर वह खुद अपने कमरे से बाहर नहीं जाती…तो फिर उसकी पायल की आवाज, किसके कदमों के साथ गलियारे में सुनाई देती है?और वह दूसरा व्यक्ति कौन था?

शाम का एक अनकहा सवाल - शाम ढलते ही भानु कमरे में आया।मोहिनी बिस्तर पर बैठी थी ,उसके सामने एक छोटा-सा कागज रखा था।

भानु ने पूछा—“क्या हुआ?”मोहिनी ने कागज उसकी तरफ बढ़ाया ,और बोली -“कमला ने बताया।भानु  ने वो कागज़ पढ़ा ,फिर उसकी आँखें गंभीर हो गईं ,गहन सोच के साथ बुदबुदाया -किसी और के कदमों की आवाज?”मोहिनी ने हाँ में सिर हिलाया।

क्या उसने किसी को देखा?”

“नहीं”

भानु कुछ पल सोचता रहा ,तो इसका मतलब है कि रात को तुम्हारे कमरे के बाहर कोई आता है।”

मोहिनी  ने धीमे से कहा—या फिर कोई मुझे बाहर ले जाता है।”

भानु ने ,उसकी तरफ देखा ,आज की रात हम इसका पता लगाएंगे।”

मोहिनी ने पूछा - अगर मुझे कुछ याद नहीं रहा?”

भानु, उसके पास बैठ गया ,तो भी हम सच के करीब होंगे।”

मोहिनी ने उसकी आँखों में देखा ,“तुम्हें, मुझ पर भरोसा है,न...?”

भानु ने बिना देर किए कहा—“हाँ।”

“अगर मैं तुम्हें कुछ ऐसा बताऊँ जो तुम्हें पसंद न आए?''तब ,मोहिनी ने नजरें झुका लीं।''

“और अगर उस रात… 2001 में… मैंने कुछ ऐसा किया हो, जिसकी वजह से तीसरा बच्चा हमसे अलग हुआ हो तो  ...

भानु के चेहरे के भाव  बदल गये ,वह कुछ पल चुप रहा ,फिर उसने कहा—तो हम यह जानेंगे कि उस समय तुम कितनी छोटी थीं, तुम्हें क्या पता था और तुम्हारे साथ क्या हुआ था ,ऐसा तुमने क्यों किया ?”

मोहिनी की आँखों में आँसू आ गए।भानु ने उसका हाथ पकड़ लिया ,और उसे समझाते हुए बोला -“तुम्हारे बचपन की किसी घटना का पूरा बोझ तुम्हारे कंधों पर नहीं डाला जा सकता।”

मोहिनी ने धीरे से पूछा— यदि तुम भी उस घटना का हिस्सा हुए ?”

भानु  ने उसकी तरफ देखा ,तो मैं भी अपने हिस्से का सच जान लूँगा। कुछ देर दोनों के बीच कोई शब्द नहीं था। दोनों के ही मन में सच्चाई को जानने की जिज्ञासा तीव्र थी और अपने हिस्से की गलती या फिर परेशानी को उठाने और समझने के लिए तैयार थे। तब मोहिनी ने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और भानु से बोली - आज की रात मुझे अकेला मत छोड़ना !कहकर वो भानु का भरोसा पाना चाहती थी। ”

भानु  ने कहा— विश्वास रखो ! नहीं छोड़ूँगा।”खिड़की के बाहर अँधेरा गहराने लगा था।हवेली की पुरानी घड़ी ने अभी सात बजाए थे और उसी क्षण मोहिनी के फोन पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।संदेश में सिर्फ एक लाइन थी—“आज रात दो बजे, अपने पति से दूर रहना वरना वह भी वही याद कर लेगा, जिसे तुम दोनों भूल चुकी हो।”मोहिनी ने संदेश भानु को दिखाया।

भानु ने वो संदेश पढ़ा ,उसका चेहरा सख्त हो गया और बोला -ऐसे संदेश भेजकर अब वे  हमें अलग करना चाहते  हैं ।”

मोहिनी  ने पूछा—“कौन?”

भानु ने फोन मेज पर रख दिया ,वही जिसे डर है कि आज रात हम दोनों को सच याद आ जाएगा।”उसने मोहिनी  की तरफ देखा और वायदा किया-'' अब हम अलग नहीं होंगे।”और तभी हवेली की पुरानी घड़ी ने आठ बजाए। रात अभी बाकी है और दो बजे तक… बहुत कुछ बदल सकता था।

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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