Kiski dulhan [part 57]

सुबह की पहली किरण, हवेली की ऊँची खिड़कियों से भीतर आ रही थी ,लेकिन मोहिनी की आँखों में अब भी रात का अँधेरा ठहरा हुआ था। उसकी कलाई पर बँधा लाल रिबन, बार-बार उसकी नजरों के सामने आ रहा था। वह पूरी रात सो नहीं पाई थी ,बार -बार एक ही सवाल उसके मन में घूम रहा था—क्या तीसरा बच्चा सचमुच उसके इतना करीब था ,क्या वह उसे रोज देखती थी?और अगर ऐसा था, तो वह उसे पहचान क्यों नहीं पा रही है ? कमरे के बाहर उसे किसी के कदमों की  आहट सुनाई दी। मोहिनी ने अपना सिर उठाया और देखने लगी आखिर वहां कौन है ?


दरवाजा खुला ,तभी भानु भीतर आया ,उसके हाथ में दो कप चाय थी ,मोहिनी को खिड़की पास खड़ा हुआ देखकर उसने पूछा - क्या ,तुम अब तक जाग रही हो?”

मोहिनी ने , खिड़की से बाहर देखते हुए एक गहरी स्वांस लेकर कहा—“नींद ही नहीं आई।”

भानु ने एक कप उसकी तरफ बढ़ाया और पूछा - “क्यों?”

“क्या तुम नहीं जानते ? क्या तुम्हें सच में पूछना चाहिए ?”

भानु ने कप मेज पर रख दिया, पूछना तो नहीं चाहता लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम स्वयं ही बताओ !तुम्हारे मन में क्या चल रहा है ?”

मोहिनी ने उसकी तरफ देखा ,और कहा - मुझे उस बच्चे का नाम याद नहीं आ रहा,जितना भी भूलने का प्रयास करती हूँ ,रह -रहकर वही बातें दिमाग़ में घूमने लगती हैं। 

चाय का घूंट भरते हुए ,भानु ने उसे आश्वासन देते हुए कहा - तुम फ़िक्र न करो ! हम उसे ढूँढ़ लेंगे।”

“और अगर वो ही हमें ढूँढ़ रहा हो तो ?उसकी आँखों में झाँकते हुए मोहिनी ने पूछा। 

भानु कुछ पल चुप रहा ,तब उसे हमारे सामने आना होगा।”

मोहिनी ने सिर हिलाया और बोली -“वह आ चुका है।”

भानु की नजर उसके हाथ पर गई ,अभी भी उसके हाथ में लाल रिबन था। “तुम्हें ऐसा क्यों लगता है?”

क्योंकि जिसने मुझे यह रिबन दिया था, वह जानता था कि मैं उसे पहचान लूँगी।

भानु उसके सामने आकर बैठ गया ,लेकिन हम अभी भी नहीं जानते, कि वह कौन है ?”

“हाँ,मोहिनी ने धीरे से कहा , मुझे यह भी नहीं पता, कि हर रात दो बजे मैं कहाँ जाती हूँ ?”

भानु का चेहरा गंभीर हो गया ,यही वह सवाल था जो पिछली रात के तमाम रहस्यों के मध्य फिर पीछे छूट गया था। मोहिनी हर रात गायब होती थी।कभी कुछ मिनटों के लिए ,कभी उससे भी ज्यादा देर तक और सुबह उसे कुछ भी याद नहीं रहता ,कहाँ गयी ,किससे मिली ?

भानु ने उसकी तरफ देखा और बोला - आज की रात हम इसका जवाब ढूँढ़ लेंगे।”

“कैसे?”

“इस बार मैं सिर्फ तुम्हारे पीछे नहीं आऊँगा।”

मोहिनी ने पूछा—“तो?”

इस बार हम यह पता करेंगे ,कि तुम्हारे गायब होने से पहले क्या होता है ?”

मोहिनी कुछ पल उसे देखती रही और संदेह से पूछा -अगर मैं तुम्हें पहचान ही न पाऊँ?”

भानु ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—तो मैं तुम्हें याद दिलाऊँगा, कि मैं कौन हूँ ?और तुम कौन हो ?”

मोहिनी ने नजरें झुका लीं ,कुछ देर दोनों चुप बैठे रहे ,फिर मोहिनी  ने धीमे से पूछा—“भानु, एक बात पूछूँ?”

“पूछो !”

क्या तुम, मुझसे कुछ छिपा तो नहीं रहे हो?”

भानु  का चेहरा गंभीर हो गया ,किस विषय में?”

“उस रात के बारे में। 17 अगस्त 2001।”

भानु ने तुरंत जवाब नहीं दिया ,मोहिनी ने उसकी चुप्पी देखी ,क्या तुम्हें कुछ याद है ?जो तुम ,मुझे बता सको !”

भानु  ने एक गहरी साँस ली और बोला -“ कुछ अस्पष्ट से दृश्य ”

“कौन से?”

“एक कमरा, बारिश की आवाज, और फिर किसी का हाथ…कहते हुए वो रुक गया।

“किसका हाथ?”

“मुझे नहीं पता।”

मोहिनी की आँखों में निराशा उतर आई ,तुम्हें भी नहीं पता।”

भानु ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला -मेरा विश्वास करो ! मैं याद करने की कोशिश कर रहा हूँ।”

मोहिनी  ने अपना हाथ नहीं खींचा ,तब वो बोली - आज की रात हम दोनों ही कोशिश करेंगे।”

हवेली का मुख्य हॉल - सुबह के करीब दस बजे मोहिनी नीचे पहुँची ,हॉल में रूद्र , रणवीर  और रत्न प्रताप  पहले से मौजूद थे ,मेज पर कुछ पुराने कागज फैले हुए थे। रूद्र  किसी दस्तावेज को ध्यान से पढ़ रहा था।रणवीर चाय पीते हुए उसे ही देख रहा था ,तब वो बोला -“भैया, आप पिछले आधे घंटे से उसी कागज को घूर रहे हैं।”

रूद्र  ने नजरें उठाए बिना कहा—क्योंकि इसमें मुझे कुछ गलत लग रहा है।”

“क्या?

ये तारीख !”

रणवीर ने कप नीचे रखा ,कौन-सी तारीख? रूद्र  ने कागज उसकी तरफ बढ़ाया -“18 अगस्त 2001।”

रणवीर  ने कागज देखा ,इसमें तो यही लिखा है।”

“हाँ, लेकिन नीचे दर्ज हस्ताक्षर 19 अगस्त के हैं।”

रणवीर  ने अपनी भौंहे सिकोड़कर कहा,“तो,इससे क्या फ़र्क पड़ता है ?”

 जिस दिन तीसरे बच्चे को अलग करने का आदेश दर्ज किया गया, उसी दिन का कागज बाद में तैयार किया गया हो सकता है।”मोहिनी, सीढ़ियों से उतरते हुए यह सब सुन चुकी थी।

इसका मतलब, किसी ने बाद में रिकॉर्ड बनाया होगा ?”

रूद्र  ने उसकी तरफ देखा,और गंभीरता से बोला - ''हो सकता है।”

भानु  भी ,उसके पीछे आकर खड़ा हो गया , ऐसा क्यों किया गया होगा ,उसने प्रश्न किया ?”

भानु ने कागज मेज पर रख दिया, तब वो कुर्सी से खड़े होकर बताता है -'किसी घटना को छिपाने के लिए या फिर किसी पुरानी गलती को सही साबित करने के लिए ऐसा किया गया होगा। ”

रणवीर ने तुरंत कहा— तुम लोग इन कागजों से जितना समझ रहे हो, सच उससे कहीं अलग है।”

मोहिनी ने उसकी तरफ देखा ,तो आप बता दीजिए !क्या सही है ?रणवीर चुप हो गया ,तब मोहिनी  ने आगे बढ़कर रत्न प्रताप से कहा— आप हर बार यही कहते हैं कि हम सच नहीं समझते , लेकिन आप खुद भी सच बताने के लिए तैयार नहीं हैं।”

रत्न प्रताप  ने धीमे स्वर में कहा— क्योंकि इस परिवार में कुछ बातें सिर्फ अतीत की नहीं हैं।”

भानु ने पूछा—तो किसकी हैं?”

रत्न प्रताप  ने उसकी तरफ देखा और बोला -“वर्तमान की भी हैं। कमरे में सन्नाटा छा गया।

रूद्र ने सभी दस्तावेज समेटे ,और बोला -आपके कहने का मतलब है ,कि जो कुछ भी 2001 में हुआ, उसका असर आज भी किसी की जिंदगी पर पड़ रहा है?”

रत्न प्रताप ने कोई उत्तर नहीं दिया ,भानु ने अचानक कहा—तो फिर एक काम करते हैं।”सब उसकी तरफ देखने लगे। ''हम पुराने कागज छोड़कर आज की बात करते हैं।”

रणवीर ने पूछा—“क्या?”

तब रणवीर ने ही , मोहिनी की तरफ देखते हुए कहा -“भाभी हर रात दो बजे गायब होती हैं।”मोहिनी का चेहरा गंभीर हो गया ,रणवीर ने आगे कहा—और अगर यह कोई पुरानी योजना है, तो उसे चलाने वाला आज भी इसी हवेली में हो सकता है।”

रत्न प्रताप  ने कठोर स्वर में कहा—“अपनी बकवास बंद करो !”

रणवीर ने पहली बार उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा—अगर ये बकवास है, तो फिर आप इतना परेशान क्यों हैं?”

रत्न प्रताप ने मेज पर हाथ मारते हुए कहा -क्योंकि तुम लोग खतरे को समझ नहीं रहे हो।”

मोहिनी  ने पूछा—“किसका खतरा,कैसा ख़तरा ?आप हमें स्पष्ट बताते भी तो नहीं ”

आखिर रत्न प्रताप किस खतरे की बात कर रहा था ?क्या वे लोग मोहिनी के 2:00 बजे गायब होने का रहस्य सुलझा पाएंगे, जानने के लिए आगे बढ़ते हैं ,मिलते हैं ,अगले भाग में -किसकी दुल्हन !


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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