नंदिनी ने, नानी को घर आकर बताया ,'उसने दीपक को किसी लड़की के साथ बगीचे में जाते देखा। तब नानी, उससे ही प्रश्न करने लगी -वे कैसी हरक़तें कर रहे थे ?उनके कहने का अर्थ था ,किसी प्रेमी युगल की तरह या फिर किसी और तरह से मिले थे। उनकी बातों का आशय समझकर नंदिनी पहले तो चुप हो गयी फिर उसने बताया -वो कुछ बातें कर रहे थे।
नानी ने किसी जासूस की तरह अपनी आँखों को सिकोड़ा और गहराई से सोचते हुए बोलीं - हो सकता है, उसके ही परिवार की कोई सदस्या हो ,जिसे वह इधर नहीं लाना चाहता था ,या फिर ऐसा भी हो सकता है ,वो उसकी कोई दोस्त हो ,अचानक ही राह में टकरा गयी और तब दीपक ने सोचा ,यहीं कहीं बैठकर दो -चार बातें कर लेते हैं।
ओ... मेरे '' शेरलॉक होम्स ''नंदिनी को नानी पर लाड़ आ गया और उनके क़रीब आकर उनके गले से लिपट गयी। ऐसा कैसे हो सकता है ?नानी ! परिवार का कोई सदस्य होगा ,तो उसे अपने घर लायेगा ,उससे बाहर बगीचे में नहीं मिलेगा।
हां, तुम्हारी बात भी सही है, तो ऐसा करो ! कल उससे स्पष्ट रूप से पूछ लेना। वैसे दीपक ,उसके गले तो नहीं लगा था।
क्या नानी ? बाहर दिन में बग़ीचे में ऐसी हरक़त कौन करता है ?
तुम्हें कुछ नहीं मालूम ,''जब प्रेम का बुखार चढ़ता है, तो न दिन को चैन ,न रात को आराम ,यदि वो कहीं भी मिल जाएं दिल को राहत देने के लिए कम से कम गले तो मिलेगा ही....''
नानी.... आजकल आप बड़ी प्रीत ,प्रेम की बातें करने लगी हो। क्या आपको भी, कभी प्यार हुआ था ?
प्रेम तो ऐसी एक सुखद अनुभूति है ,जिसका आनंद हर इंसान, जीवन में एक बार तो लेता ही है।
क्या सच में ? क्या आपको किसी से प्यार हुआ था ,कहते हुए नंदिनी उनके बिस्तर के करीब ही कुर्सी डालकर बैठ गयी।
देख,कैसी बातें कर रही है ? आकर बैठ गयी नानी की ''प्रेम कहानी '' सुनने के लिए ,चल जा !अब बहुत देर हो गयी ,जाकर सो जा !
नानी सुनाओ ! न... अभी मुझे नींद भी नहीं आ रही ,आपको किससे प्रेम हुआ ?
हमारे ज़माने में ,तुम्हारी तरह का प्रेम नहीं था ,''जिससे विवाह हुआ ,जिसको अपना माना ,उसी से प्रेम होता था।'' हमारी जब तक प्रेम करने की और समझने की उम्र आती, उससे पहले ही हमें विवाह के बंधन में बांध दिया जाता था। हमारे क़रीब जो होता ,वो हमारा अपना होता।
धत... इसमें कैसा प्रेम रहा होगा ? यानि कि आप कहना चाहती हैं ,आपको नाना जी से ही प्रेम था।
और नहीं तो क्या ?प्रेम किसी और से और विवाह किसी ओर से ,मेरे लिए प्रेम की ये परिभाषा नहीं है। वही तो सच्चा प्रेम होता है ,दो साल में मेरा गौना हुआ था। तब पहली बार मैंने तेरे नाना को घूंघट की आड़ में से देखा था।
क्यों ?आपने इससे पहले नाना जी को नहीं देखा था ,विवाह में तो देखा होगा।
हाँ ,किन्तु चेहरा याद ही नहीं रहा ,दो साल की दूरी जो रही। मेरी माँ ने बताया -मुझे विवाह का बहुत चाव था ,उसमें सजना -संवरना ,मेहँदी लगाना, ये सब मुझे बहुत पसंद था। दिन में तो जगी रही ,जब रात्रि में फेरों का समय आया तो मुझे नींद आने लगी। नए कपड़े पहनकर मैं खुश थी ,नानी अतीत में पहुंचकर नंदिनी को कहानी सुना रहीं थीं।
क्या आपको नाना जी को देखने की इच्छा नहीं थी ?
क्यों नहीं होगी ,किन्तु तेरे नाना अपने ख़ानदान के इकलौते चिराग़ थे ,इसीलिए बारात खूब धूमधाम से आई। खूब पटाख़े छूटे किन्तु तब तक मैं बहुत थक चुकी थी । सुबह से कोई न कोई रस्म हो रही थी।मैंने भी छत पर चढ़कर पटाखों का आनंद लिया। घुड़चढ़ी भी देखी, जब फेरों का समय हुआ। तब मुझे नींद आने लगी। पंडित के मंत्र तो मेरे लिए जैसे लोरी का कार्य कर रहे थे। घूंघट में बैठी मैं सो रही थी। जब पंडित जी ने कहा ,आगे हाथ बढ़ाओ ! मैं बैठी रही ,तब मेरी माँ ने मुझे जगाने का प्रयास किया और मेरा हाथ पकड़कर सभी रस्में करवाईं।
तब नानी आपने नाना जी को अपनी ससुराल में तो देखा ही होगा। हाँ ,मैं गाड़ी में बैठी सोती रही ,घर पहुंची तो वही रस्में। नई जगह थी ,बहुत बड़ा घर था ,उतने ही मेहमान ,बहुत भीड़ थी। मैं एक सप्ताह वहां रही और घर आ गयी।
क्या आपसे, नाना जी नहीं मिले ?
न... बस घूंघट में से ही दूर से उन्हें देखा था। जब वहां बैठी महिलाओं ने मुझे दिखलाया ,वो देख !जो कुर्ते पायजामें में खड़ा है, वही तेरा दूल्हा है। उसके बाद दो साल तक एक झलक भी नहीं देखी ,वो छवि भी विस्मृत हो गयी।
कभी अकेले नहीं मिले।
नहीं ,गौने से पहले नहीं मिलते थे इसीलिए वो भी पतंग उड़ाते घूम रहे थे, किन्तु जब मुझे होश आया और प्यार की अनुभूति होने लगी। तब उनका स्मरण होता ,मन में यह भावना रहती,दूर किसी गांव में कोई तो है जो मेरा अपना है। जिसके लिए मैं हूँ। यह आभास गांव की सहेलियों के साथ अधिक होता ,जब वे मेरे विवाह की बातें मुझे स्मरण करातीं।
ये कैसा प्रेम है ?जिसको जाना नहीं समझा नहीं ,मेरे हिसाब से देखा भी नहीं ,उसकी छवि ही स्मरण रही।
''वही तो सच्चा प्रेम होता है ,जिसे देखा नहीं ,उसकी मात्र अनुभूति ही तुम्हारे ह्रदय को आनंदित कर दे ,उसका एहसास तुम्हारे रोमकूपों को पुलकित कर दे ! देखने के पश्चात प्रेम नहीं आकर्षण बढ़ता है ,जो कि उस उम्र में सभी के साथ होता है। सच कहूं तो आज प्रेम नहीं सौदेबाज़ी होती है। ये ठीक नहीं ,दूसरा.... कहते -कहते नानी रुक गयीं।
नंदिनी ,को देखकर बोलीं -''जीवन में कभी -कभी दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं ,कभी -कभी परिस्थितियां भी प्रेम पर हावी हो जाती हैं। अब तुम्हें ही देख लो ! तुमने तो सच्चा प्रेम किया था। ख़ैर अब इन सब बातों को छोडो !और जीवन में आगे बढ़ो !तुम कल दीपक से बात कर लेना।
नहीं नानी ! अब मैं कुछ भी ऐसा नहीं करूंगी और न ही मैं ,दीपक से कुछ पूछूंगी यदि उसे बताना होगा तो स्वयं ही बता देगा।
यदि उसे बताना ही होता, तो फिर उसे, बगीचे में नहीं ले जाता, नानी ने कहा-' इसका अर्थ है, कि वह उस रिश्ते को यहां सबसे छुपाना चाहता है, इसीलिए वह उसे बगीचे में गया वरना बगीचा को इधर भी है।
हां, नानी आप सही कह रही हैं, कह कर नंदिनी फिर से उदास हो गई।
नानी बोली- तू तो उसे पसंद करती ही नहीं है ,फिर तू क्यों उदास हो रही है ? मुस्कुराते हुए उसके चेहरे की तरफ देखा।
अब नानी, आप मेरी'' टांग खींच रही हैं,'' नंदिनी गुस्से से, नानी को'' आंखें दिखाते हुए बोली। ''
जब तू ही ऐसी बातें करेगी, तो मुझे भी ऐसी ही बातें करनी हो पड़ेंगी। हो सकता है ,उसकी कोई रिश्तेदार हो या कोई किसी दोस्त की पत्नी हो। उसकी मदद करना चाहता हो ,जैसे कभी उसने हमारी की थी। तूने पहले ही यह कैसे सोच लिया ? कि वह गलत हो सकता है। अभी ना ही तू, उसके विषय में कुछ जानती है न ही उसके विचार जानती है ,फिर उदास होने से क्या लाभ ? आज नहीं मिल पाया तो कल मिलेगा ,कल बात कर लेना, नानी ने नंदिनी को समझाया।
नानी की बात सुनकर नंदिनी को थोड़ी राहत मिली। तब बोली -नानी ,अब बहुत देर हो गयी ,मैं सोने जाती हूँ।
अपनी समीक्षाओं द्वारा बताइये !आपको कहानी कैसी लग रही है ?आपकी समीक्षाएं हमारा उत्साहवर्धन करने के साथ-साथ आगे बढ़ने में सहयोग करती हैं। ऐसी ही कहानियों को पढ़ने के लिए फॉलो भी कीजिये !धन्यवाद 🙏
