छत वाले कक्ष में, जब वो लोग पहुंचे ,वहां पहले से ही एक अनजान शख़्स विद्यमान था। उसके वहां होने का आभास होते ही लालटेन बुझ गयी और कमरे में घना अंधेरा छा गया ।
वह अँधेरा कोई साधारण अँधेरा नहीं था ,वहां इतनी शांति छा गयी ,मोहिनी को अपनी ही साँसों की आवाज सुनाई देने लगी ।
भानु उसके ठीक पीछे खड़ा था और रूद्र दरवाजे के पास खड़ा हुआ था।
अचानक सामने आने वाला' लाल पत्थर वाली अंगूठी' वाला वह आदमी न जाने कहाँ गया ? किसी को पता नहीं चला । वे लोग आश्चर्य से उस अँधेरे को टटोल रहे थे ,अभी कुछ सेकंड पहले तो वह आदमी सामने ही था।अब वहाँ सिर्फ खाली अंधेरा था।
“मोहिनी !भानु ने उसे पुकारा और उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा - “तुम ठीक हो?”मोहिनी ने कोई जवाब नहीं दिया ,उसकी नजर जमीन पर थी।वहाँ पड़ी पायल अब भी धीरे-धीरे हिल रही थी।छन…छन…फिर अचानक कमरे में हल्की रोशनी हुई।
उस रौशनी में मोहिनी और भानु ने देखा ,लालटेन अपने आप नहीं जली थी ,रूद्र ने उसे उठाकर जला दिया था।
“वो आदमी कहाँ गया? कहते हुए भानु ने चारों तरफ देखा।
“दरवाजा तो हमारे सामने ही बंद हुआ था ,कहकर रूद्र वहीं घुटनों के बल बैठ गया ,उसने कमरे की फर्श को ध्यान से देखा।फर्श पर धूल की एक पतली परत जमी थी ,उसमें पैरों के निशान थे ,लेकिन अजीब बात यह थी कि निशान कमरे के बीच तक आते थे…और वहीं खत्म हो गए थे। रूद्र ने उँगली से धूल को छुआ और बोला -“वो यहाँ से गया है।”
भानु ने पूछा—“किधर गया ?”
रूद्र ने सिर उठाया -यही तो पता करना है ,वो कहाँ से आया और कहाँ चला गया ?
मोहिनी अचानक पीछे हट गई ,उसके मुख से निकला -“नहीं।”
दोनों ने उसकी तरफ देखा और पूछा -“क्या हुआ?”
मोहिनी ने दीवार की ओर इशारा किया ,“वो…दीवार पर लालटेन की रोशनी पड़ते ही एक हल्का निशान दिखलाई दिया।तीन छोटी रेखाएँ और उनके नीचे एक गोल निशान। मोहिनी धीरे-धीरे उसके पास गई।उसने उँगली से उसे छुआ और अगले ही पल उसकी आँखों के सामने एक पुरानी तस्वीर चमकी।तीन बच्चे ,एक लड़की ,एक लड़का और उनके बीच तीसरा बच्चा ,तीनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए थे।फिर किसी की आवाज—“अगर हम तीनों अलग हो गए… तो कोई भी हमें पहचान नहीं पाएगा।”
मोहिनी ने झटके से आँखें खोल दीं ,भानु ने उसे संभाल लिया ,“क्या फिर से वही याद? मोहिनी ने सिर हिलाया ,लेकिन इस बार कुछ अलग था -“क्या ?”
उस बच्चे का चेहरा…वह रुक गई और बोली - मैंने उसका चेहरा देखा।”
रूद्र तुरंत उसके पास आया -“कैसा था?”
मोहिनी ने फिर से आँखें बंद कर लीं और बोली -“पूरा तो नहीं।”
“फिर?”
“बस....उसकी वो आँखें !
उसकी आँखें !! कैसी थीं ?”
मोहिनी ने बहुत धीमे कहा—वो मेरी तरह थीं ,कमरे में खामोशी फैल गई।
भानु ने मोहिनी को देखा ,“तुम कहना क्या चाहती हो?”
“मुझे नहीं पता ,मेरे साथ ये सब क्या हो रहा है ?घबराते हुए बोली ,उसने अपने माथे पर हाथ रखा ,लेकिन मुझे ऐसा क्यों लगता है कि वो बच्चा सिर्फ़ मुझसे जुड़ा नहीं था…वह रुकी बल्कि…वो मुझे बहुत अच्छी तरह जानता था।”
रूद्र ने कुछ नहीं कहा वह कमरे की दूसरी दीवार की तरफ चला गया ,वहाँ एक पुरानी अलमारी थी।उसने उस अलमारी को खोला।अंदर पुराने रजिस्टर, कुछ फाइलें और कपड़े रखे थे।तब एक फाइल नीचे गिरी।उस फाइल के गिरने से धूल उड़ गई ,रूद्र ने उसे उठाया।
कवर पर सिर्फ तारीख लिखी थी—18.08.2001 मोहिनी गहरी सांसें भरने लगीं। “ये…कहते हुए उसने भानु के हाथ से फाइल ले ली।उसने उस फाइल को खोला। फाइल के अंदर कुछ पुराने कागज थे। पहले पन्ने पर तीन नाम लिखे थे ,लेकिन तीसरे नाम पर काली स्याही फैली हुई थी।
पहला नाम—मोहिनी !
दूसरा—भानु !
तीसरे के सामने—रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं लिखा था ,मोहिनी ने उस पन्ने को घूरते हुए पूछा—रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं?
रूद्र ने सिर हिलाया और बोला -इसका मतलब ये नहीं कि तीसरा बच्चा था ही नहीं।”
“तो?”
“इसका मतलब है, कि किसी ने उसका रिकॉर्ड हटाया है। ”
मोहिनी की आँखें फैल गईं।
“किसने हटाया होगा ?”
रूद्र ने जवाब कोई जबाब नहीं दिया ,भानु ने फाइल पलट दी ,अगले पन्ने पर एक छोटी-सी तस्वीर चिपकी थी।तस्वीर में तीन बच्चे थे ,वही तस्वीर जो 18 अगस्त 2001 के समय की थी ,लेकिन इस बार तस्वीर के पीछे कुछ लिखा हुआ था।
भानु ने उसे पढ़ा—सुबह 7:15 — तीनों सुरक्षित।”
मोहिनी की आँखें तस्वीर पर जम गईं ,तीनों सुरक्षित थे…? उसकी आवाज में अविश्वास था ,तो फिर तीसरा बच्चा गायब कैसे हुआ?
रूद्र ने तस्वीर पलटकर देखी ,पीछे एक और लाइन थी ,स्याही बहुत हल्की थी।वो उसे लालटेन की रोशनी के पास ले गया ,उस पर लिखा था—7:40 पर आदेश मिला—तीसरे बच्चे को अलग कर दो !”
भानु का चेहरा कठोर हो गया और पूछा -ये किसका आदेश था ?नीचे नाम नहीं था ,सिर्फ एक अक्षर - R
मोहिनी ने, तुरंत भानु की तरफ देखा फिर रूद्र की तरफ और बोली - फिर वही'' R ”
रूद्र ने सिर हिलाया ,“हाँ।”
भानु ने फाइल बंद कर दी ,अब ये सिर्फ संयोग नहीं है। उसी क्षण बाहर किसी के कदमों की आहट सुनाई दी।तीनों चुप हो गए।कदम धीरे-धीरे कमरे के सामने आकर रुक गए ,फिर दरवाजे के नीचे से एक कागज अंदर सरका।
मोहिनी पीछे हट गई ,भानु ने वो कागज उठाया ,उस पर सिर्फ एक वाक्य था—“जिसे तुम खोज रहे हो, वह तुम्हें खोज रहा है। नीचे—18 अगस्त लिखा था।
बस इतना,मोहिनी ने कागज अपने हाथ में ले लिया ,उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं।“अगर वो बच्चा जिंदा है…भानु ने उसकी तरफ देखा,“तो?”मोहिनी ने उसकी बात पूरी की—तो वो अब बच्चा नहीं है।”
रूद्र ने पहली बार गंभीरता से कहा—और शायद यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से कोई तुम्हें बार-बार अतीत याद दिला रहा है।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसे लगता है कि तुम अकेली वो इंसान हो, जो उसे पहचान सकती हो।”
मोहिनी कुछ बोलती, उससे पहले बाहर से आवाज आई ,इस बार आवाज एक महिला की थी जो बहुत धीमी किन्तु परिचित लग रही थी ,“मोहिनी…!
घबराहट के कारण मोहिनी का चेहरा बदल गया।यह आवाज…उसने बहुत साल पहले कहीं तो सुनी थी ,वो सोच रही थी ,बहुत करीब से उसकी आँखों में आँसू आ गए “माँ…”
भानु ने तुरंत उसकी कलाई पकड़ ली -“रुको।”
मोहिनी ने दरवाजे की तरफ देखा ,“वो मेरी माँ की आवाज है ।”
रूद्र ने धीरे से कहा—आवाज सुनना और उस आवाज के पीछे सच होना—दो अलग बातें हैं ,लेकिन मोहिनी अब उसकी बात नहीं सुन रही थी। उसने आगे बढ़कर दरवाजा खोला ,गलियारा एकदम खाली था।सिर्फ दूर एक छोटी-सी मेज पर कुछ रखा था।मोहिनी आगे बढ़ी और मेज के क़रीब पहुंची मेज पर एक पुराना टेप रिकॉर्डर था।उसके ऊपर हाथ से लिखा था—“मृणाल — 18 अगस्त 2001 — 8:05 AM”मोहिनी वहीं रुक गई।भानु उसके पीछे आकर खड़ा हुआ। रूद्र ने रिकॉर्डर उठाया और बोला -“इसे यहीं नहीं सुनेंगे।”
मोहिनी ने पूछा—“क्यों?”
“क्योंकि जिसने इसे यहाँ रखा है, वह चाहता है कि हम यही करें।”
भानु ने उसकी बात समझ ली ,“मतलब? भानु ने रिकॉर्डर को अपनी जेब में रख लिया “मतलब अब हम उसके नियमों पर नहीं खेलेंगे।”
भानु ने पहली बार हल्की-सी राहत महसूस की ,लेकिन तभी उसकी नजर फर्श पर पड़ी ,वहाँ एक बहुत छोटा और पुराना लाल रिबन पड़ा था।
