भानु ने, सभी के सामने उस पर्ची को पढ़कर बताया ,जिसने भी ये पर्ची भेजी है ,वो जानता है कि मोहिनी हर रात्रि दो बजे कहीं जाती है।
लेकिन… ये बात तो…बहुत कम लोग जानते हैं,” सोचते हुए रणवीर ने कहा।
रूद्र ने धीरे से जोड़ा—और शायद, किसी ने ये बात सिर्फ जानी नहीं… बल्कि वो बहुत पहले से जानता है।
मोहिनी की आँखों में अचानक ही एक पुरानी सी तस्वीर कौंध गयी ,जैसे कहीं घना अँधेरा ,एक लंबा गलियारा ,पायल की आवाज और…घंटी ,उसने अपना सिर पकड़ लिया ,तब वो बोली - मुझे कुछ याद आ रहा है।”
भानु तुरंत उसके पास आया -“क्या याद आया ?
“घंटी का वो स्वर …मोहिनी ने स्मरण करते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं ,हर रात दो बजे… कोई घंटी बजती थी।”
“कहाँ?”
मुझे नहीं पता ,बस उसका स्वर मेरे कानों में गूंजता था। ”
मोहिनी !याद करो !ध्यान से सोचो ! कि उस घंटी की आवाज कहाँ से और किधर से आती थी ”
मोहिनी ने कुछ क्षण कोशिश की ,फिर अचानक बोली— मुख्य दरवाजा !ध्यान लगाने का प्रयास करते हुए बोली - नहीं ,सब चुप हो गए।
“तो फिर?”
मोहिनी ने बहुत धीरे कहा—शायद ऊपर…उसकी नजर हवेली की छत की तरफ उठ गई। हाँ मुझे याद आया ,घंटी की आवाज़ ऊपर से आती थी।”
रूद्र ने, तुरंत रत्न प्रताप की तरफ देखा ,रत्न प्रताप के चेहरे पर चिंता की लक़ीरें स्पष्ट दिखलाई दे रहीं थीं ,तब वो बोला -“हवेली की ऊपरी मंजिल तो वर्षों से बंद है।”
रणवीर जो अब तक दरवाजे के पास खड़ा सब सुन रहा था, अचानक बोला—क्या ,पूरी मंजिल?”
रत्न प्रताप ने उसकी तरफ देखा ,“हाँ।”
रणवीर ने कुछ सोचते हुए कहा—मुझे, एक बात समझ नहीं आती।”
“क्या?”
“कल रात जब मोहिनी नीचे से वापस आई थी, उसके पैरों में मिट्टी क्यों थी ? मोहिनी ने चौंककर अपने पैरों की तरफ देखा ,तब उसे याद आया। सुबह उसने सचमुच अपने पैर धोते समय ,हल्की-सी मिट्टी देखी थी।
भानु ने ,रणवीर की ओर देखा, ये तुमने, मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”
रणवीर कंधे उचकाते हुए बोला - क्योंकि मुझे लगा था, पहले तुम दोनों खुद समझोगे।”फिर उसने गंभीर होकर कहा— जब बात निकल ही रही है तो एक और बात बताना चाहूंगा। ”
“क्या?”
“वो मिट्टी नीचे वाले तहखाने की भी नहीं थी।”
भानु ,ने सोचते हुए पूछा -“ये तुम्हें कैसे पता?”
क्योंकि मैं बचपन से ही ,इस हवेली की मिट्टी पहचानता हूँ। तब रणवीर ने पर्ची की तरफ देखा और बोला - ये मिट्टी ऊपर वाली मंजिल की है।”
रत्न प्रताप ने तुरंत कहा—“भानु!”
लेकिन तब तक देर हो चुकी थी ,मोहिनी के भीतर जैसे कोई बंद दरवाजा खुल गया ,ऊपर…बंद मंजिल…घंटी…दो बजे…और फिर वह बच्ची,लाल रिबन ! उसकी अपनी आवाज—अगर कोई कहे, कि मैं मर गई… उसकी बात पर विश्वास मत करना। मोहिनी ने अचानक अपना सिर उठाया और बोली - वो बच्ची…”
भानु को लगा, इसे फिर से कुछ याद आ रहा है, उसने, मोहिनी का हाथ थाम लिया और पूछा -“क्या ,तुम्हें कुछ याद आया ?”
“वो ऊपर थी।”
“क्या तुम्हें याद है?”
“पूरी तरह से तो नहीं, मोहिनी की आवाज काँप रही थी ,लेकिन मुझे लगता है… उस रात हम तीनों ऊपर गए थे।”
रूद्र ने तुरंत पूछा—“तीनों,तीन कौन ?”
मोहिनी ने उसकी तरफ देखा और बोली -मैं… भानु… और वो !”ऐसा लग रहा था ,कमरे में ,जैसे किसी ने सांस तक नहीं ली ,फिर अचानक ऊपर से आवाज आई ,टन…एक घंटी,सबकी नजर छत की तरफ उठ गई।घड़ी में—2:00 AM. मोहिनी का शरीर जैसे सुन्न हो गया ,उसी क्षण उसकी पायल हल्के से खनकी।
भानु ने नीचे देखा ,पायल के भीतर छिपी छोटी पीतल की चाबी बाहर की ओर खिसक आई थी।
मोहिनी ने, उसे हाथ में लिया और तभी—ऊपर से दूसरी आवाज आई ,टन…!इस बार घंटी के साथ किसी के कदमों की धीमी आवाज भी थी। एक…दो…और तीन…जैसे कोई ऊपर बंद पड़े ,गलियारे में कोई चल रहा हो।
रूद्र ने तुरंत टॉर्च उठाई और बोला - “मैं ऊपर जा रहा हूँ।”
भानु ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक दिया ,तुम अकेले नहीं जाओगे ! तुम मोहिनी के साथ रहो !”
“नहीं।”
मोहिनी ने दोनों को रोक दिया ,उसकी नजर पायल की चाबी पर थी ,तब वो बोली - दरवाजा मैं ही खोलूँगी।”
भानु ने उसकी तरफ देखा ,और पूछा -“क्या तुम्हें यकीन है ?”
मोहिनी ने सिर हिलाकर कहा -“नहीं”वह कुछ पल रुकी ,तब बोली - शायद ये वही जगह है ,जहाँ से मेरी यादें शुरू हुई थीं। तीनों सीढ़ियों की ओर बढ़े।
रत्न प्रताप वहीं खड़ा रह गया ,उसकी आँखों में पहली बार डर दिखाई दे रहा था। रणवीर ने उसकी तरफ देखा और बोला -“चाचा…!किन्तु रत्न प्रताप ने कुछ नहीं कहा।
रणवीर ने धीमे से पूछा—अगर ऊपर सच में कुछ नहीं है…वह रुक गया ,रत्न प्रताप ने उसकी तरफ देखा।रणवीर आगे बोला —तो आप डर क्यों रहे हैं ?”आपने वो कहावत तो सुनी होगी ''न कर ,न ड़र ''
रत्न प्रताप का चेहरा गंभीर हो गया ,लेकिन वह जवाब नहीं दे पाया।
उधर मोहिनी , भानु और रूद्र ऊपरी मंजिल तक पहुँच चुके थे ,वहाँ वर्षों की धूल जमी थी ,एक लंबा गलियारा ,वहां जो भी कक्ष थे ,उनके बंद दरवाजे और सबसे आखिर में—एक पुराना लकड़ी का दरवाजा।उस पर वही निशान बना था—M.B.
मोहिनी ने अपनी पायल की चाबी निकाली ,चाबी ताले में डाली ,एक पल के लिए कुछ नहीं हुआ।फिर—एकदम से क्लिक हो गया ,उसके खुलते ही दरवाजा भी खुल गया।अंदर गहन अंधेरा था ,लेकिन कमरे के बीचोंबीच एक मेज पर पहले से एक छोटा-सा लालटेन जल रहा था और उसके सामने रखा था—एक पुराना रिकॉर्डर उस पर एक कागज चिपका हुआ था ,जिस पर सिर्फ चार शब्द लिखे थे—मोहिनी ! इसे अकेले सुनना। मोहिनी की उँगलियाँ रिकॉर्डर पर टिक गईं।
भानु ने उसे देखा ,और पूछा - “क्या तुम इसे चलाना चाहती हो?”
मोहिनी ने, रिकॉर्डर उठाया किन्तु उसकी आँखों में डर था ,लेकिन इस बार डर के पीछे एक और चीज थी—सच जानने की जिद !आखिरकार उसने बटन दबा ही दिया।कुछ सेकंड तक उसमें सिर्फ खरखराहट सुनाई दी ,फिर एक पुरुष की आवाज आई—“अगर मोहिनी यहाँ तक पहुँच गई है… तो इसका मतलब है कि योजना का पहला हिस्सा असफल हो चुका है।”घबराहट से मोहिनी का चेहरा सफेद पड़ गया ,कैसी योजना ?उसके मन में प्रश्न गूंजा। आवाज फिर आई—और अब उसे सबसे पहले ये जानना होगा कि…”रिकॉर्डिंग अचानक रुक गई ,मोहिनी ने रिकॉर्डर को थपथपाया, किन्तु कुछ नहीं हुआ ,फिर उसके पीछे दरवाजा अपने आप बंद हो गया ,धड़ाम!
भानु दरवाजे की आवाज सुनकर तुरंत पलटा ,दरवाजा अंदर से ही बंद था। रूद्र ने हैंडल खींचा किन्तु दरवाजा नहीं खुला और तभी कमरे के दूसरे कोने से एक बहुत धीमी आवाज आई—“तुमने… बहुत देर कर दी, मोहिनी !”मोहिनी ने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा ,शायद अंधेरे में कोई खड़ा था ,उसका चेहरा दिखलाई नहीं दे रहा था ,लेकिन उसकी उँगली में वही चमक थी—वही लाल पत्थर वाली अंगूठी।
मोहिनी की आँखें डर से फैल गईं और उस अजनबी ने सिर्फ इतना कहा— अब तुम्हें याद करना होगा कि 18 अगस्त 2001 को तीसरा बच्चा कहाँ गया था ? उसके इतना कहते ही ,कमरे की लालटेन अचानक बुझ गई ,वहां अंधेरा छा गया और इस बार—मोहिनी की पायल खुद-ब-खुद बज उठी।छन… छन… छन…
