Kiski dulhan [part 52]

 मोहिनी  ने अपनी साँस रोक ली।भानु का चेहरा कठोर हो गया,उसने पूछा -क्या तुम राजवीर की बात कर रहे हो ?”रूद्र ने कोई उत्तर नहीं दिया ,सिर्फ रत्न प्रताप की तरफ देखा।रत्न प्रताप  ने पहली बार अपनी नजरें झुका लीं।

रणवीर ने धीमे से पूछा—तो इतने सालों से जो कहानी हमें बताई गई…थी ”

रूद्र ने उसकी बात पूरी की—वह कहानी नहीं थी ,वो एक बड़ा झूठ था।”हॉल में सन्नाटा फैल गया।मोहिनी ने रत्न प्रताप की ओर देखा और पूछा - आपने 'राजवीर' को मरा हुआ क्यों बताया?” रत्न प्रताप कुछ  कह न सका मोहिनी ने दोबारा पूछा— बताइये !आपने ऐसा क्यों किया ?”


इस बार रत्न प्रताप ने उसकी ओर देखा ,और धीमे स्वर में बोला -क्योंकि अगर वह वापस आता ,वह रुका.... तो इस हवेली में किसी की जिंदगी सुरक्षित नहीं रहती।”

मोहिनी  ने पूछा—“किसकी?”

रत्न प्रताप ने उत्तर देने के बजाय रूद्र की ओर देखा।

रूद्र  ने कहा—मोहिनी की...

यह सुनकर मोहिनी का चेहरा सफेद पड़ गया और पूछा - मेरी?”

रूद्र ने सिर हिलाया -“हाँ”

भानु आगे बढ़ा और पूछा -राजवीर का मोहिनी से क्या संबंध है ?”

रूद्र  ने उसकी आँखों में देखा ,यही सवाल तुम्हें खुद से भी पूछना चाहिए।”भानु कुछ समझ नहीं पाया।तब रूद्र  ने जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।वह तस्वीर मोहिनी की तरफ बढ़ा दी। मोहिनी  ने वो तस्वीर उसके हाथ से ले ली -''उसमें एक युवा पुरुष था ,उसके साथ एक महिला और पीछे एक छोटी बच्ची थी। मोहिनी ने तस्वीर को गौर से देखा ,उसके हाथ काँपने लगे ,“यह…”उसने तस्वीर में बच्ची के चेहरे को देखा।ये तो वही थी ,वही तीसरी बच्ची लेकिन तस्वीर में वह अकेली नहीं थी ,उसके पीछे दीवार पर वही निशान बना था—दो साँप ,बीच में एक फूल और नीचे तीन अक्षर—M.B.R.

मोहिनी ने धीरे से पूछा—यह तस्वीर कहाँ की है?”

रूद्र ने उत्तर दिया—तुम्हारे पिता के घर की।”

मोहिनी ने उसकी तरफ देखा ,जैसे पूछ रही हो - मेरे पिता?”

रूद्र ने कहा—तुम जिस आदमी को अपना पिता समझती रही…वह कुछ देर रुक गया ,जैसे शब्द ढूंढ़ रहा हो ,उस घर में वह अकेला नहीं था।

मोहिनी कुछ बोल पाती, उससे पहले…हॉल की पुरानी घड़ी ने आवाज की।टन्…एक बजकर पचपन मिनट।

भानु ने घड़ी की तरफ देखा ,फिर मोहिनी की ओर ,उसके चेहरे पर अचानक चिंता उभर आई।

“मोहिनी…”

“क्या?”

“आज रात…उसने, उसकी कलाई पकड़ ली ,अगर तुम्हें फिर कुछ याद आने लगे…वह उसकी आँखों में देखते हुए बोला - मुझे अकेला मत छोड़ना !

मोहिनी ने ,पहली बार बिना किसी झिझक के उसका हाथ थाम लिया ,और विश्वास के साथ बोली - नहीं छोड़ूँगी।”लेकिन उसी क्षण…हॉल के बाहर किसी ने बहुत धीरे से घंटी बजाई।टन…

उस आवाज को सुनकर मोहिनी का चेहरा सफेद पड़ गया और बोली -वही आवाज़... वही घंटी ,जिसे मैं हर रात सुनती आ रही हूँ ,लेकिन इस बार…घंटी हवेली के अंदर नहीं बजी थी।वह मुख्य दरवाजे के बाहर से आई थी और दरवाजे के नीचे से…एक सफेद लिफाफा धीरे-धीरे भीतर सरक आया ,लिफाफे पर सिर्फ एक नाम लिखा था—मोहिनी !और नीचे लिखा था - “आज रात दो बजे अकेली आना !”

कमरे में कुछ पल के लिए ऐसी खामोशी छा गई, जैसे हवेली ने खुद अपनी साँस रोक ली हो।मोहिनी  के हाथ में वह सफेद लिफाफा अभी भी काँप रहा था।उस पर सिर्फ एक शब्द लिखा था—''मोहिनी ''और अंदर एक छोटी-सी पर्ची।“आज रात दो बजे अकेली आना।”

भानु ने पर्ची उसके हाथ से ले ली ,उसने दो बार उसे पढ़ा ,फिर उसकी आँखें घड़ी पर टिक गईं।1:55 AM.“बस पाँच मिनट रह गए ” भानु ने धीमे से कहा।

मोहिनी ने उसकी तरफ देखा।“तुम्हें क्या लगता है,क्या ये मात्र संयोग है?”

“नहीं।”

“तो फिर?”

भानु ने कोई जवाब नहीं दिया ,उसकी नजर दरवाजे पर टिकीं थीं । वही पुरानी घंटी, जो कुछ क्षण पहले मुख्य दरवाजे के बाहर बजी थी, अब फिर धीरे -धीरे हिल रही थी लेकिन वहां हवा बिल्कुल भी नहीं थी।

रूद्र  ने पर्ची भानु के हाथ से ले ली।उसने कागज को रोशनी के सामने किया, फिर उसकी तह को देखा और बोला -“ये हवेली के अंदर का ही कागज है। उसने जैसे कोई रहस्य उजाग़र किया हो। 

भानु  ने अविश्वास से तुरंत उसकी तरफ देखा और पूछा -“तुम्हें कैसे पता?”

रूद्र ने पर्ची के किनारे पर उँगली फिराई और विश्वास से बोला  -इसमें इस्तेमाल हुआ कागज बाहर से खरीदा हुआ नहीं है। हवेली के पुराने स्टोर में इसी तरह का कागज रखा जाता था।”

यह सुनकर रत्न प्रताप का चेहरा अचानक बदल गया और बोला -रूद्र  ! ये तुम क्या कह रहे हो ?

रूद्र ने उसकी तरफ देखा ,“क्या?”

“तुम्हें जितना पता है, उससे ज्यादा जानने की कोशिश मत करो !रत्न प्रताप कठोर शब्दों में बोला। 

रूद्र  हल्का-सा मुस्कुराया ,आपको याद है ,यही बात आपने, मुझसे दस साल पहले भी कही थी।”

रत्न प्रताप चुप हो गया। मोहिनी ने दोनों को शंकित नजरों से देखा और पूछा -“दस साल पहले क्या हुआ था?”इस बार रूद्र ने जवाब नहीं दिया।

भानु भी शांत खड़ा उन्हें देखता रहा ,मोहिनी की बेचैनी बढ़ गई।“हर बार यही होता है ,कोई आधी बात कहता है, फिर सब चुप हो जाते हैं। मेरी जिंदगी में जो कुछ हुआ, उसमें हर कोई कुछ न कुछ जानता है… बस मैं ही नहीं जानती ,कहकर वो अपनी जगह बैठ गयी उसकी आँखों से अश्रु बह चले। 

भानु  ने उसकी तरफ कदम बढ़ाया और बोला -“इस बार ऐसा नहीं होगा।”

“तो फिर मुझे बताओ !मैं क्या करूं ?”

भानु  कुछ क्षण उसके क्लांत मुख को  देखता रहा ,तब बोला -ये राजवीर कौन है? कमरे में फिर से खामोशी छा गई।रूद्र ने पहली बार नजरें झुका लीं।

रत्न प्रताप ने कठोर स्वर में कहा— इस विषय या नाम पर कोई बात नहीं होगी ,इस नाम को यहीं खत्म करो !”

मोहिनी ने पर्ची मेज पर रख दी और बोली -“नहीं” उसकी आवाज पहले से अधिक दृढ़ थी ,अब और नहीं।”

भानु ने उसका हाथ पकड़ लिया ,और उसे सांत्वना देने के लिए बोला - मोहिनी …!

मोहिनी उससे बोली ,अगर वो आदमी जिंदा है, जिसे तुम लोगों ने मरा हुआ बताया था। अगर उसका संबंध मेरे अतीत से है और अगर आज रात किसी ने मुझे दो बजे अकेले बुलाया है, तो मैं अब भागूँगी नहीं।”

रूद्र  ने उसकी तरफ देखा और दृढ़ता से बोला -“तुम अकेली नहीं जाओगी।”

मोहिनी  ने तुरंत कहा— पत्र में साफ लिखा है—मुझे अकेले  जाना है ।”

“और इसी वजह से, तुम अकेली नहीं जाओगी ,रत्न प्रताप बीच में ही आदेशात्मक स्वर में बोला -अगर तुममें से किसी ने उस जगह जाने की कोशिश की तो—”

“तो?”रूद्र  ने पहली बार रत्न प्रताप की बात काट दी।

“क्या होगा ?रत्न प्रताप !”

रत्न प्रताप चुप हो गया रूद्र उसके बिल्कुल सामने आकर खड़ा हो गया।“तुमने बहुत सालों तक सबको डराकर रखा है लेकिन अब वो समय खत्म हो चुका है।”

भानु ने दोनों को देखा और बोला - मुझे लगता है, हमें अभी एक और बात समझनी होगी।”

उसने वो पर्ची उठाई ,जिसने ये भेजी है, उसे पता था कि मोहिनी हर रात दो बजे गायब होती है।”मोहिनी  के चेहरे का रंग उड़ गया।


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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