Kiski dulhan [part 44]

मोहिनी ने अपनी पिछली चीजों को देखने की क्षमता के कारण वो जान जाती  M.V. उसका रक्षक बना था ,जिसके हाथ में एक'' लाल अंगूठी'' थी ,जब मोहिनी ने उस लाल अंगूठी को देखना चाहा तो उसने अपनी मुट्ठियां बंद कर लीं और गंभीर स्वर में कहा—अब हमें यहाँ से जाना होगा।

भानु ने पूछा—"क्यों?

M.V. ने पीछे अंधेरे गलियारे की ओर देखा ,क्योंकि अब उसे पता चल गया है कि मोहिनी को क्या याद आया।"


"किसे?"

M.V. ने कोई उत्तर नहीं दिया ,तभी...दूर से किसी भारी दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आई।घर्ररर...फिर कदमों की धीमी आवाज़ जो  लगातार आ रही थी । 

M.V. का चेहरा गंभीर हो गया और बोला -"वो आ गया "

रत्न प्रताप ने पूछा—"कौन?"

M.V. ने कहा—जिससे, तुमने मोहिनी  को, पिछले पच्चीस साल पहले छिपाया था।"

मोहिनी  ने पूछा—"मेरे पिता?"

M.V. ने उसकी ओर देखा और बोला -नहीं।"वह कुछ क्षण रुका ,फिर बोला—तुम्हारे पिता से भी बड़ा खतरा !अंधेरे गलियारे में कदमों की आवाज़ अब बहुत करीब थी।ठक...ठक...ठक...

साया ने डायरी बंद कर दी,रत्न प्रताप ने तलवार निकाल ली। भानु ,मोहिनी के सामने आकर खड़ा हो गया।और M.V. ने पहली बार अपनी आवाज़ में भय छिपाने की कोशिश नहीं की ,उसने फुसफुसाकर कहा—इस बार वह तुम्हें लेने नहीं आया है, मोहिनी ...एक क्षण का सन्नाटा।

फिर—

वह तुम्हें खत्म करने आया है।"गलियारे के अंधेरे में एक परछाईं दिखाई दी और उसके हाथ में...वही लाल अंगूठी चमक रही थी। नीचे से आती उस आवाज़ को सुनकर मोहिनी के कदम वहीं रुक गए।"मोहिनी..."आवाज़ बहुत धीमी थी ,लेकिन उसमें एक अजीब-सा खिंचाव था। जैसे कोई उसे वर्षों से पुकार रहा हो।

भानु ने तुरंत मोहिनी का हाथ पकड़ लिया और बोला -"तुम नीचे नहीं जाओगी।"

मोहिनी ने उसकी तरफ  देखा ,जैसे वो विवश हो गयी है ,बोली -  वो मुझे बुला रही है।"

इसीलिए तो तुम्हें जाने देना नहीं चाहता, हम नहीं जानते वहाँ क्या है और कौन है ?"

M.V. ने सीढ़ियों की ओर देखते हुए कहा—यदि हमें उससे बचना है तो हमें नीचे जाना ही होगा।"

भानु ने उसकी तरफ़ देखा ,और प्रश्न किया ,अभी तो तुम कह रहे थे ,कि ''सावधान रहो।"

"सावधान रहना और पीछे हटना दोनों अलग बातें हैं। 

रत्न प्रताप ने पहली बार उस सीढ़ी के समीप आकर नीचे देखा ,उनके चेहरे पर पुरानी यादों का डर स्पष्ट दिखलाई दे रहा था ,यह रास्ता तो पिछले पच्चीस सालों से बंद था ,उन्होंने धीमे से कहा,

फिर ये कैसे खुला ? मोहिनी ने पूछा। 

रत्न प्रताप ने उसकी पायल की ओर देखा और बोला -तुम्हारी वजह से।"

मोहिनी ने अपनी पायल कसकर पकड़ ली ,तो क्या, यह चाबी है ?"

ये सिर्फ़ चाबी नहीं है ,M.V. ने जबाब दिया ,ये उस कमरे की पहचान है।"

कौन-सा कमरा? मोहिनी ने प्रश्न किया 

M.V. ने नीचे अंधेरे की ओर देखा,वही कमरा जहाँ उस रात फैसला लिया गया था कि कौन जिएगा... और कौन मरेगा।"

भानु का चेहरा गंभीर हो गया ,और पूछा -क्या उस फैसले में मेरी माँ भी थीं?"

M.V. ने उसकी ओर देखा और कहा -"हाँ।"

भानु ने बिना कुछ कहे और किसी के आगे बढ़ने से पहले ,सीढ़ियों पर अपना पहला कदम रख दिया।मोहिनी भी उसके पीछे चल पड़ी ,रत्न प्रताप और साया भी उनके साथ हो लिए।सीढ़ियाँ बहुत पुरानी थीं ,दीवारों पर नमी थी।कहीं-कहीं पत्थर टूट चुके थे।हर कदम के साथ नीचे से आती ठंडी हवा और तेज़ होती जा रही थी।

मोहिनी को महसूस हुआ, कि जैसे-जैसे वह नीचे जा रही थी...उसके भीतर की कोई बंद स्मृति जाग रही थी।अचानक उसने अपने बढ़ते कदम को रोक दिया और अन्य लोगों से भी बोली -"रुको !"उसके इतना कहते ही ,भानु भी रुक गया और उससे पूछा -"क्या हुआ?"

मोहिनी ने दीवार को देखा ,वहाँ एक छोटा-सा निशान बना था।एक फूल और उसके नीचे दो अक्षर—A.V.

मोहिनी ने उँगली से उसे छुआ और उसी क्षण...उसके सामने एक दृश्य चमका।एक छोटी बच्ची दीवार पर वही फूल बना रही थी ,पास एक छोटा लड़का खड़ा था।"ये क्या है?"मोहिनी ने पूछा।

बच्ची ने कहा—"हमारा निशान।"

"क्यों?"

"क्योंकि जब हम बड़े होंगे,.तो हम एक-दूसरे को इसी से पहचानेंगे,मुस्कुराकर बच्ची ने कहा और वो दृश्य टूट गया,मोहिनी ने अपनी आँखें खोल दीं।

भानु, उसे देख रहा था और उससे पूछा -"क्या हुआ?"

मोहिनी ने दीवार की ओर इशारा किया ,क्या तुम्हें याद है ,ये निशान हमने बनाया था।"

भानु कुछ क्षण चुप रहा ,फिर उसने उसी जगह हाथ रखा,"मुझे भी...कहते हुए वो रुक गया"कुछ याद आया। 

मोहिनी ने उसकी ओर देखा और पूछा -"क्या?"

भानु ने अपनी आँखें बंद कीं और बोला -"तुम रो रही थीं और मैं तुमसे कह रहा था..."उसने धीरे-धीरे कहा -"डरो मत ! मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा।"

 मोहिनी की आँखों में आँसू आ गए ,दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे को देखते रहे।यह पहली बार था जब उनके अतीत की कोई याद...एक जैसी ही थी।

साया ने उन्हें आगे बढ़ने का संकेत दिया और बोला -"समय कम है। नीचे पहुँचते ही एक लंबा गलियारा सामने था।गलियारे के अंत में एक बड़ा लोहे का दरवाज़ा था।दरवाज़े पर वही निशान बना था—दो साँप।लेकिन इस बार दोनों साँपों के बीच...एक छोटी बच्ची का हाथ बना हुआ था।मोहिनी धीरे-धीरे उसके पास गई।उसे ध्यान से देखकर बोली -"यह निशान पहले वाले से अलग है।"

M.V. ने कहा—क्योंकि यह दरवाज़ा बाकी दरवाज़ों से अलग है।"

"कैसे?"

"यह बाहर जाने के लिए नहीं है।"

"तो?"

M.V. ने कहा—यह अंदर जाने के लिए है।"

भानु ने ताले को देखा और पूछा -इसकी "चाबी?"

मोहिनी ने अपनी पायल से चाबी निकाली ,उसने ताले में डाल दी।क्लिक करके दरवाज़ा खुल गया।अंदर एक गोल कमरा था ,कमरे के बीचोंबीच पत्थर की एक मेज़ और मेज़ पर...एक पुराना टेप रिकॉर्डर रखा था मोहिनी की आँखें आश्चर्य से फैल गईं ,"यह यहाँ कैसे?रत्न प्रताप अचानक पीछे हट गए।

साया ने उनकी ओर देखा और पूछा -क्या तुम इसे जानते हो ?"रत्न प्रताप ने कुछ नहीं कहा।

मोहिनी ने पूछा—क्या इसमें उस रात की रिकॉर्डिंग है?"

रत्न प्रताप की चुप्पी ही उत्तर थी।

भानु ने रिकॉर्डर उठा लिया ,उसमें अभी भी एक पुरानी कैसेट लगी थी,उसने जैसे ही प्ले बटन दबाया।कुछ सेकंड सिर्फ़ शोर सुनाई दिया।फिर...एक महिला की आवाज़ सुनाई दी ,अगर यह रिकॉर्डिंग किसी दिन मोहिनी तक पहुँचे...अपना नाम सुनकर मोहिनी का दिल जैसे धड़कना भूल गया।वह आवाज़...मृणाल की थी ,तो उसे बताना कि मैंने उसे छोड़ा नहीं था मोहिनी की आँखों से आँसू निकल पड़े।

भानु ने रिकॉर्डर और कसकर पकड़ लिया।

आवाज़ आगे आई—मैंने उसे बचाने की कोशिश की थी लेकिन मुझे पता था कि जिस आदमी से मैं उसे बचा रही हूँ..."कुछ सेकंड शोर सुनाई दिया फिर—वह उसे ढूँढ़ ही लेगा।"

मोहिनी ने फुसफुसाकर कहा—"कौन था ?वो !"

रिकॉर्डिंग में मृणाल की आवाज़ काँप रही थी ,उसका नाम...टेप अचानक अटक गया ,टक...टक...टक...फिर आवाज़ बंद ,भानु ने रिकॉर्डर को थपथपाया ,ताकि उस अनजान शख्स का पता तो चल सके। 

"नहीं!"M.V. ने तुरंत कहा—"इसे मत छुओ !"

"क्यों?"

"क्योंकि..."M.V. की निगाह कमरे के दूसरे कोने पर थी..यह रिकॉर्डिंग पूरी नहीं हुई थी।"

मोहिनी  ने उस दिशा में देखा ,वहाँ एक छोटी लकड़ी की अलमारी थी।उस पर धूल जमी हुई थी।लेकिन धूल के मध्य ...एक जगह साफ़ थी।जैसे अभी-अभी किसी ने वहाँ हाथ रखा हो।

भानु  ने अलमारी खोली ,अंदर कई पुरानी कैसेटें थीं।हर एक पर तारीख लिखी थी। 15 अगस्त 2001से लेकर 18 अगस्त 2001 लेकिन 17 अगस्त वाली कैसेट गायब थी।

मोहिनी  ने कहा—"यही चाहिए।"

साया ने सिर हिलाया,"हाँ।"

"तो वो कहाँ है?"



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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