Dhokha [part 31]

नानी के कहने पर नंदिनी, दीपक को रात के भोजन के लिए बुलाती है।नंदिनी बड़े प्रेम से भोजन बनाकर मेज़ पर सजा दिया। जब दीपक आता है ,तो पूछता है ,अरे !इतना सारा भोजन ,क्या मेरे लिए ही है ?

हाँ ,आज आप ही हमारी नानी के मेहमान हैं ,मुस्कुराते हुए नंदिनी बोली। 

नानी, इतनी मेहरबानी क्यों ? 


ऐसा कुछ भी नहीं है ,ये लड़की तो ऐसे ही ज़्यादा बोलती रहती है ,तुम खाना खाओ !ठंडा हो जायेगा। भोजन के पश्चात ,ऐसे स्वादिष्ट भोजन के लिए' दीपक 'नानी से बहुत-बहुत धन्यवाद कहता है। 

तब नानी कहती है -इसमें धन्यवाद की कोई आवश्यकता नहीं है। पड़ोसी ही तो पड़ोसी के काम आते हैं तुमने हमारी हर परेशानी में हमारा साथ दिया है। मैं बेचारी बुढ़िया, इसको कहां तक साथ लिए घूमती, ऐसे समय में तुम ही हमारे शुभचिंतक बनकर आए। अब क्या हमारा इतना भी फर्ज नहीं बनता है, कि हम तुम्हें एक रात भोजन करवा सकें । 

नानी ऐसी बात मत कहिए ! क्या आप उस बात का ,एहसान उतार रहीं हैं ?अभी तो आपने कहा - 'इंसान ही तो इंसान के काम आता है 'मैंने बस अपनी वही इंसानियत निभाई है। आपने ऐसी बात करके मुझे छोटा कर दिया है।

नहीं, बेटा तुम मेरी बात को अन्यथा  मत ले जाओ !बस तुम्हें घर बुलाकर भोजन कराने की मेरी इच्छा थी।

जब ऐसे समय में भी, [नंदिनी का गर्भवती होना ]आप दोनों अकेली थीं। मैं देख कर भी उन बातों को नजरअंदाज कर जाता तो ,कितना गलत लगता ? ऐसे समय में इन पर हमला हुआ, यह तो सही नहीं था किंतु यह भी पता नहीं चल पाया कि यह हमला किसने करवाया था ?

तब एकदम से नंदिनी बोली- मुझे पूर्ण विश्वास है ,यह हमले रोहित ने ही करवाए थे। जो इंसान अपने भाई को धोखा दे सकता है ,उसको मार सकता है ,वह कुछ भी कर सकता है। चलो, उसे तो सजा मिल ही गई। तभी एक प्लेट में इमरती लेकर नंदिनी आ गई और बोली -लो !मुँह मीठा कर लो !

 इमरती देखते ही, दीपक खुश हुआ और बोला -तुम्हें कैसे मालूम ? मुझे मीठे में इमरती बहुत पसंद है। 

नहीं, मुझे तो कुछ भी मालूम नहीं है ,वह तो मैं अंदाजे से ले आई, और मुस्कुरा कर बोली - एक दिन तुमने खुद ही तो बताया था कि तुम्हें मीठे में इमरती बहुत पसंद है। 

क्या, वो बात तुम्हें अभी तक याद है ,वाह !क्या बात है ? तुम मेरी बात ध्यान से सुनती हो।  

यह कोई आठ का पहाड़ा तो नहीं था, जो याद करना था। यह तो साधारण सी बात थी, तुमने मुझे बताया और मेरे दिमाग में यह बात बैठ गई कि तुम्हें मीठे में इमरती पसंद है। ऐसी तो कई बातें होती हैं लेकिन कई बार हम ध्यान में रख लेते हैं और कई बार नहीं रहता है।

 इमरती खाते हुए दीपक ,नानी से बोला - नानी ,आपकी नंदिनी बहुत गुणी है ,बहुत समझदार है, जिसके भी घर जाएगी, उसकी तो जिंदगी ही बन जाएगी। 

बस -बस मुझे'' चने के झाड़ पर मत चढ़ाओ !''उसको रोकते हुए नंदिनी बोली।

नहीं ,मैं तुम्हें चने के झाड़ पर नहीं चढ़ा रहा हूँ ,तुममें कुछ खूबियां है ,जो शायद तुम भी नहीं जानतीं। 

तभी नानी गंभीर हो गईं और बोलीं - यही चिंता तो हमें सताये  जा रही है। ये अभी शादी करने के लिए तैयार नहीं है और इसके घर वाले परेशान हो रहे हैं ,तुम तो सारी बात जानते ही हो। न जाने, कोई ऐसा लड़का हमें मिलेगा या नहीं मिलेगा। मिलेगा भी तो न जाने कब मिलेगा ? जो इसके हर हालात को समझते हुए भी इससे विवाह कर ले। 

नानी, आपसे मैंने कितनी बार मना किया है ?आप फिर से उन्हीं बातों को लेकर बैठ गयीं,नंदिनी नाराज होते हुए बोली। 

उनकी चिंता अपनी जगह सही है ,दीपक ने, नानी का समर्थन किया। 

अच्छा बेटा, तुम बताओ ! तुम्हारा विवाह हो गया , तुम्हारे परिवार में और कौन-कौन है ? 

नानी, मेरे परिवार में मेरी मां और मेरी बहनें हैं ,पिता हैं, अभी मैं चलता हूं, मुझे बहुत देर हो चुकी है। कल मुझे अपने ऑफिस भी जाना है , यह कहकर वह एकदम से उठ खड़ा हुआ।

नंदिनी जा! उसे बाहर तक तो छोड़ आ !

नहीं, नानी मैं अपने आप चला जाऊंगा ,मैं कोई बच्चा नहीं हूं में ,पास  में ही तो रहता हूं ,दो कदम पर मेरा घर है आप इसे यही रखिए ! यह कहकर वह बाहर निकल गया। 

उसके जाने के पश्चात,तब नानी खुश होते हुए बोली - इसका अर्थ है ,यह अभी तक कुंवारा है, इसका विवाह नहीं हुआ है , इसके परिवार में इसकी मां और बहन ही है। 

नानी ,ज्यादा खुश होने की आवश्यकता नहीं है।  मैंने ,इससे पहले भी पूछा था ,तब भी इसने यही बताया था किंतु जब विवाह की बात आती है, तो यह बात को टाल जाता है , आपने देखा नहीं, कितने आराम से बैठा बातें कर रहा था और जैसे ही आपने उसके विवाह के विषय में पूछा तो, उसने अपने परिवार के विषय में बताया और उठकर चला गया। मुझे तो लगता है, अवश्य ही कोई बात है। 

तुम्हें तो हर चीज में कमी नजर आती है, अभी धीरे-धीरे उससे बात करेंगे ,हम एकदम से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे।

 और हमें पहुंचना भी नहीं है, जैसा चल रहा है, उसे ठीक ऐसा ही चलने देते हैं, नंदिनी ने, नानी को जवाब दिया। 

आजकल नंदिनी इसके साथ ही आती -जाती है, यह तो नंदिनी भी समझ गई है ,कि मेरे परिवार वाले ,दीपक से मिलने पर नाराज नहीं है और समर्थन भी कर रहें हैं । अब दीपक के मन में क्या है ? वह जानना जरूरी है।

अब आगे क्या होता है ? यह तो समय ही बताएगा ,हो सकता है ,धीरे-धीरे इन दोनों में प्यार हो जाए और स्वयं दीपक ही कहे -' कि मैं नंदिनी से शादी करना चाहता हूं। 'इसलिए इस रिश्ते को थोड़ा मौका देना चाहिए।

 'दीपक 'प्रतिदिन की तरह तैयार होकर' नंदिनी'की प्रतीक्षा कर रहा था किन्तु अभी तक नंदिनी नहीं आई।  अब यह उसकी आदत में शामिल हो चुका था ,नंदिनी को साथ लेकर जाता और शाम को नंदिनी के साथ ही लौटता इतने पर भी उसका मन नहीं भरता, तो वह छत पर या फिर बगीचे में टहलते हुए ,उससे अनेक बातें करता। उससे बातें करना उसे अच्छा लगता था, जिस दिन बात नहीं होती थी उसी दिन ऐसा लगता है जैसे आज दिन ही नहीं निकला। 

आज नंदिनी अभी तक नहीं आई, जब नंदिनी नहीं आई तो उसने सोचा ,'उसके घर जाकर पूछना चाहिए' वह घर गया अंदर झांक कर देख रहा था तभी उसकी दृष्टि नानी पर गई, नानी ने भी उसे देख लिया था। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post