केतकी अपने भाई के विवाह में ,अपनी बहनों के साथ बारात में जाती है। वहीं पर उसे ये लड़का मिला था। जो बार -बार उसके क़रीब आने के बहाने ढूंढ़ रहा था। इस बात को केतकी की बहनों ने महसूस किया और इस बात को वे मज़ाक में ले गयीं और बोलीं - पता तो करें ,ये कौन है , कहां से है ,कितना पढ़ा -लिखा है ? केतकी को छेड़ते हुए बोलीं।
जब तक केतकी बारात में,अन्य कार्यक्रमों में शामिल रही ,तब तक वह लड़का भी उसके इर्द -गिर्द ही मंडराता रहा। केतकी की बहनें तो, अपने पतियों के साथ अपने बच्चों को लेकर शीघ्र ही वापस लौट आईं किंतु केतकी भाभी को विदा कराकर उनके साथ ही आई। जब वे लोग वापस आ रहे थे। तब भी भीड़ में खड़े होकर, उन्हें ही देख रहा था या यूँ कहें ,केतकी को देख रहा था। किन्तु ऐसे में न ही ,उसका साहस हुआ ,वो केतकी से कुछ कह या पूछ पाता और न ही केतकी ने,` उसमें कोई दिलचस्पी दिखलाई, किन्तु उसे इतना एहसास तो हो गया था ,मुझमें भी कोई बात तो है ,जो वो लड़का इस तरह उसे देख रहा था।
दरअसल जब से केतकी ने ,खेती -बाड़ी संभाली है ,उसे अपने रहने -सहने की सुध ही न रही ,और लोगों ने उसे ,केशवदास जी की बेटी नहीं, बेटा कहा। तब से अपने को उनका बेटा ही समझने लगी थी। भाई के विवाह में भी ,अच्छे कपड़े तो पहने ,थोड़ी सजी थी किन्तु अब भी उसकी लापरवाही बरक़रार थी। किसके लिए सजना है ,क्यों सजना है ?
जब भी उसकी मम्मी उसके प्रति चिंता व्यक्ति करती ,पता नहीं ,इस लड़की को क्या हुआ है ? पहले तो हमें भी रहने -सहने का तरीका समझाती थी किन्तु अब दिन पर दिन लापरवाह होती जा रही है।
भाभी !तुम चिंता न करो ! ये उम्र ही ऐसी है ,मन में अनेक विचार आते रहते हैं। ऐसे में बच्चा स्वयं ही नहीं समझ पाता कि उसे क्या चाहिए या वो क्या करना चाहता है ? जो कर रही है ,उसे करने दीजिये !अपने आपको ,उसे समझने का समय दीजिये। वक़्त आने पर सब समझने लगेगी और शृंगार भी करेगी, जब उसकी ज़िंदगी में कोई राजकुमार आ जाएगा ,अपने लिए नहीं तो उसके लिए तो करेगी।
अब भाई के विवाह को भी,दो माह हो चुके थे। आज इस लड़के को अचानक यहाँ देखकर, केतकी को आश्चर्य हुआ कि वह मेरे पिता से क्यों मिलना चाहता है ? केतकी के पेट में अज़ीब सी गुदगुदी होने लगी ,मन में प्रसन्नता के कारण ,चेहरे पर न जाने क्यों मुस्कान आ जाती ? केतकी अपने विचारों को नियंत्रित करना चाहती थी किन्तु न जाने क्यों कुछ भी उसके नियंत्रण में नहीं था।
उसने ट्रैक्टर ,उसके स्थान पर खड़ा किया और अपने हाथ -मुंह धो कर, घर के लिए रवाना हो गई ,उसने चुपके से घर के अंदर प्रवेश किया। वह सोच रही थी ,शायद वह लड़का, इस समय उनके घर पर ही होगा। किंतु उसने वहां जाकर देखा, मम्मी तो अंदर काम कर रही है ,पिता घर पर हैं, ही नहीं , घर में शांति है ,दोनों भाई ऊपर पढ़ रहे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है ? क्या वो यहाँ आया ही नहीं ,या फिर मिलकर चला गया ,उसे घर तो मिल गया होगा ?इतने प्रश्नों के जबाब ढूंढ़ रही थी। उससे रहा नहीं गया,बोली - मम्मी ! क्या आज कोई यहाँ आया था ?
नहीं तो.... कोई भी नहीं आया, तुझे ऐसा क्यों लग रहा है ?
मैं जब खेत पर काम कर रही थी, तब मुझसे कोई पापा के लिए पूछ रहा था ,उसने मुझसे ,हमारे घर का पता पूछा, मैंने उसे घर का रास्ता बता दिया था।
कौन हो सकता है ? तूने उससे पूछा नहीं , क्या काम है ?
मुझे बताता तो मैं, उसकी समस्या वहीं हल कर देती ,किन्तु उसने कुछ नहीं बताया। मैंने, उसे घर का रास्ता सुझा दिया। हो सकता है ,उसे घर ही न मिला हो। ह्रदय में न जाने कहाँ से वेदना आकर सिमट गयी। पता नहीं क्यों ?उसे देखकर जो मन अपने आप ही प्रसन्नता से फूला नहीं समा रहा था। अब वहीं वेदना ने स्थान ले लिया।
कहीं मुझे ,उसे पहचानने में कोई गलती तो नहीं हो गयी ,उसे भाई के विवाह में ही तो देखा था ,उसके जैसा दिखता हो ,और मैंने, उसे वही समझ लिया। अब उसे ,अपने आप पर ही संदेह होने लगा। यदि वो आया था फिर कहाँ गया ?उसे तो पापा से मिलना था। पापा भी तो यहाँ नहीं हैं ,हो सकता है ,उसे कहीं राह में ही मिल गए हों। चारपाई पर लेटी यही सब सोच रही थी। न जाने कब उसकी थकावट उसे नींद के घेरे में ले गयी।
केतकी !उठ खाना खा ले !जब माँ ने उसे सोते हुए देखा तो बुदबुदाई - सारा दिन किसी न किसी काम में लगी रहती है ,थक गयी होगी ,भूखी भी होगी ,सोचते हुए उसे आवाज लगाई।
केतकी तेजी से उठी ,और चुपचाप नहाने चली गयी, अपने कपड़े बदले ,भोजन करके चुपचाप खिड़की के पास आकर बैठ गई। मन ही मन सोच रही थी आखिर वह लड़का कहां गया ? न जाने क्यों उसके न मिलने पर वह उदास हो गई ? किसी से कुछ कह भी नहीं सकती थी ,ये बात तो सिर्फ़ वो ही महसूस कर रही थी। जबकि वे लोग भाई के विवाह से वापस आए थे , तब भी वो, इतनी उदास नहीं हुई थी। न ही, उसे कुछ महसूस हुआ और आज न जाने कैसी बेचैनी है ? उसे लगा था यह मेरे लिए ही इस गांव में आया है।
तभी उसे ध्यान आया ,उसकी भाभी भी तो उसी गांव की है, क्या उनसे पूछूं ? कि वह लड़का कौन है ,आज तक कभी पूछा ही नहीं ,मैं तो उसका नाम भी नहीं जानती। आज भाभी याद आ गयी , वो तो भाई के साथ नौकरी पर गई हैं । यह सोचकर वह शांत हो गई।
तब विचार आया ,हो सकता है किसी और से मिलने आया हो ,यदि ऐसा होता तो मेरे घर का पता क्यों पूछता ? या फिर पापा से मिलकर चला गया हो। यदि उनसे मिला तो उसने पापा से क्या कहा होगा ,क्यों मिलने आया था ? तभी उसे खिड़की से, पापा आते दिखलाई दिए ,उन्हें देखते ही ,उसकी निराशा फिर से उम्मीद में बदल गयी। अंदर ही अंदर मन में ,फिर एक मीठी सी लहर दौड़ गई ,शायद वो मेरे लिए रिश्ते की बात करने के लिए पापा से मिलना चाहता हो। यही सोचकर एकाएक उसके चेहरे पर मुस्कुराहट छा गई।
