वो भले ही, मुझसे लड़ती ,झगड़ती है।
पर मेरी परवाह भी तो, वही करती है।
रिश्ता हमारा भले ही पुराना हुआ है ।
जब मुस्कुराकर मेरी तरफ देखती है।
रिश्ते में नई ताज़गी सी... भर देती है।
हमेशा साथ निभाने का वायदा किया था, हमने !
वक़्त आने पर मुझसे, ज़्यादा वादे निभाती है।
भले ही मुझसे लड़ती है ,संग साथ दिखती है।
आंधी हो तूफां ,मेरे लिए सोचती औ पूछती है।
पूछती ,आज खाने में क्या बनाऊं ?
पूछकर भी, अपनी इच्छा से बनाती है।
हमेशा मेरी सेहत का ख़्याल रखती है।
कभी -कभी गर्मागर्म पकौड़े खिलाती है।
ये पल दो पल का साथ नहीं वर्षों का नाता है।
क्या कोई बाहरी दोस्त ऐसे रिश्ते निभाता है ?
अब तक दुःख -सुख हर पल साथ निभाया है।
अब तो लगता ,वो मेरा ही साया है।
एक उम्र में, भटकता मैं भी था।
पति ही नहीं ,मैं भी जवाँ दिल रखता था।
सही राह दिखलाई उसने, घर बनाया उसने।
नीड़ छोड़, बच्चे गए ,अब वो ही मेरी साथी है।
सुख -दुःख संग झेले,आज भी वही संग नजर आती है।
मेरे अकेलेपन को दूर कर मुझे ही समझाती है।
कभी लगता, ये कितने रूप निभाती है ?
पत्नी ,माँ, बहन,शिक्षक सभी रूपों में नजर आती है।
नार अकेली ,साहस भरा ,कितने ग़म पी जाती है ?
मैं ही उसकी दुनिया हूँ ,वो मेरे इर्द -गिर्द मंडराती है।
सुकून से बैठ !जब मैं आँखें मूँदता हूँ ,चाय ले आती है।
अपनी ही दुनिया में खोई , वो, सुकूँ से मुस्कुराती है।
वो ग़ैर नहीं ,मेरी'' वामांगी ''जीवनभर साथ निभाती है।
ड़रता हूँ ,वो जब चली जाएगी, दुनिया सूनी हो जाएगी।
मैं उसके सहारे जी रहा हूँ ,वो मेरे सहारे जी रही है।
उसकी मुस्कान देख ,मेरी हर शाम हो रही है।
उम्र मोहब्बत का, हमारी ये पैग़ाम दे रही है।
वामांगी'' ही ,हर पड़ाव पर साथ दे रही है।
