हालाँकि कस्तूरी अपने पति चतुर के कामों में कोई दिलचस्पी नहीं लेती थी। चतुर भी, उसकी तरफ से निश्चिन्त था। चतुर जो भी कर रहा है ,कस्तूरी उसमें कोई व्यवधान नहीं डालेगी। यहाँ पर चतुर गलत था ,आख़िर कस्तूरी थी तो एक औरत ही... उसका पति किसी अन्य महिला के संग अधिक समय बिताता है। दोनों काम के नाम पर अकेले कमरे में रहते हैं। शिल्पा और चतुर के संबंधों को समझने में, उसे ज्यादा समय नहीं लगा और एक दिन उसने चतुर से कह ही दिया -मुझे इतना भी नादाँ समझने की गलती मत करना ,मैं कुछ कहती नहीं तो, क्या कुछ समझती नहीं हूँ ?
ये सब क्या ? से तुम्हारा क्या मतलब है ? क्या मैं, तुम्हें छोड़कर कहीं चला गया ? या अपना घर छोड़कर मैं कहीं बाहर जा रहा हूँ। वो ही तो यहाँ आती है,उसका काम है ,वो थोड़ी परेशान है, तो उसे थोड़ा सा हंसा देता हूँ ,तुम्हारे इतने सारे प्यार में से उसे इत्तु सा प्यार दे देता हूँ। कहते हुए उसने अपनी बाहें फैलाई और कस्तूरी को अपनी बाँहों में खींच लिया, बाक़ी तो सब तुम्हारा ही है।
अब तक मैं, कितनी महिलाओं से मिला हूँ कित्नु वे आती और चली जाती हैं। मुझे अपने काम के लिए इतना तो इन्हें बहलाना -फुसलाना पड़ता ही है वरना इतने कम पैसों में अध्यापिका कहाँ मिल रही हैं ?हमारा स्कूल भी अभी नया है। वो अपने पति से लड़कर हमारे स्कूल के लिए आती है ,ये क्या कम बड़ी बात है ? तब मैं उससे प्यार के दो बोल ,बोल देता हूँ। तो इसमें क्या बुराई है ?तुम्हारा अधिकार तो किसी को नहीं दे रहा। तुम ही तो मेरा पहला प्यार हो, कहते हुए उसे लेकर शयनकक्ष की ओर बढ़ चला।
कस्तूरी को उसने निरुत्तर कर दिया ,तब बोला -ये यहाँ आती है ,हमारे स्कूल के लिए परिश्रम करती है। क्या बुराई है ,तुम कहोगी तो कल ही उसे स्कूल से निकाल दूंगा किन्तु इतने शीघ्र कोई नई अध्यापिका मिलना भी तो सम्भव नहीं है। मुझे थोड़ा समय तो दो ! तुम तो मालकिन हो ,भला हम तुम्हें परेशान कैसे कर सकते हैं ? अब बताओ ! क्या करना है ?
वो जानता था पत्नी का असंतुष्ट होना ही गलत है,जिस भी महिला से वो आज तक मिला है ,वे सभी अपने पति से सम्मान और प्यार की उम्मीद करती हैं। जब वो दिनभर की थकी कमरे में आती है ,उसे चाहत होती है ,उसका पति उसके काम की ,वो जो इस परिवार के लिए समय दे रही है ,उसकी सराहना करे किन्तु पति को तो लगता है ,अब तो इससे विवाह हो गया। घर को संभालना इसका काम है और ये काम तो सभी औरतें करती हैं ,ये कोई अनूठा कार्य कर रही है। हमारी माँ भी करती थी किन्तु क्या किसी ने उस औरत का मन पढ़ने का प्रयास किया या उससे जानना चाहा ,उसकी ख़ुशी किसमें है ?
चतुर की बाँहों में सिमटी कस्तूरी को लगा ,मैं तो बेवज़ह ही परेशान हो रही थी ,ये सही तो कह रहे हैं।जो कुछ भी कर रहे हैं ,अपने परिवार के लिए ही तो कर रहे हैं। ये कहीं बाहर नहीं जाते ,स्कूल हमारा है ,जब चाहे, उसे निकालकर बाहर कर सकते हैं ,मैं तो मालकिन हूँ ,यह सोचकर आज उसे एहसास हुआ ,उसका भी कोई महत्व है। यह सोचकर उसे चतुर पर प्यार आया।
अब आप ही सोचिये !जो इंसान शहर में रहकर ,न जाने कितनी अमीरजादियों ,भाभियों को बहला -फुसला सकता है ,तो क्या वो अपनी बीवी को समझा नहीं सकता ,उससे तो उसने 'प्रेम विवाह' किया है।
एक दिन जब शिल्पा, स्कूल में आई तो चतुर का चेहरा उतरा हुआ था। शिल्पा ने उसकी परेशानियों को समझने के का प्रयास करते हुए उससे पूछा -सर ! आज क्या बात है ? कुछ परेशान लग रहे हैं।
हां, थोड़ा परेशान तो हूं किंतु मैं संभाल लूंगा कहते हुए उसने, ऐसे जतलाया कि वह उसे अपनी परेशानी बताना ही नहीं चाहता है किंतु ऐसा नहीं था। वह उसे वास्तव में ही, अपनी परेशानियों से अवगत कराना चाहता था।
शिल्पा ने उससे दुबारा पूछा -सर ! आप मुझसे नहीं बताएंगे तो और किसे बताएंगे ?अब वो, चतुर पर अपना अधिकार समझने लगी थी। बताइये! मुझसे क्या छुपा रहे हैं ?
नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, यह कहकर वह वहां से चला गया। स्कूल अपने समय पर, लगा और जब लंच टाइम हुआ तब शिल्पा ने सोचा -अब मुझे सर से पूछना चाहिए ,आख़िर बात क्या है ? जो इस तरह परेशान दिख रहे हैं।
अब वह बेझिझक उसके घर तक भी जाने लगी थी, घर भी कोई ज्यादा दूर नहीं था। दोपहर के भोजन के समय में वह उसके घर गई और वहां देखा, तो चतुर बैठा हुआ कुछ सोच रहा था।
औपचारिकता निभाते हुए शिल्पा ने पूछा -सर ! क्या मैं अंदर आ सकती हूं ?बाहरी लोगों के सामने तो वे ऐसा ही व्यवहार करते थे।
चोंकने का अभिनय करते हुए , चतुर ने पूछा- अरे मैडम !आप यहां कैसे आ गई ? कोई आवश्यकता थी तो मुझे बुला लेंतीं।
आपसे यही पूछने आई थी, आप सुबह से परेशान लग रहे हैं, क्या कुछ हुआ है ?अब तो शिल्पा को उसकी परेशानी ,अपनी नज़र आती थी।
नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है, तब भी चतुर ने अपनी परेशानी को टालना चाहा।
तभी कस्तूरी अंदर से आकर बोलती है - ये आपके स्कूल की एक ज़िम्मेदार अध्यापिका हैं। ये आपकी बात को नहीं समझेंगी तो और कौन समझेगा ? तब चतुर से बोली -आप इन्हें अपनी परेशानी बताइए !
तब शिल्पा ने कस्तूरी से पूछा -क्या तुम, इनकी परेशानी का कारण जानती हो।
हां मैं जानती हूं,बहनजी ! ये तो आपको नहीं बताएंगे किंतु मैं बता देती हूं , कि इस बार कुछ ही बच्चों की फीस आई है।
तो....इसमें परेशानी किस बात की है ? शिल्पा ने ,उनकी बात को ना समझते हुए पूछा -तो क्या हुआ ? यह सब तो चलता ही रहता है।
अपनी जगह, आपकी बात सही है, किंतु अब महीना शुरू होने वाला है और अभी तक फीस भी पूरी नहीं आई है, शिक्षिकाओं को अपना वेतन भी तो चाहिए या नहीं। उन्हें हम दो-चार दिन रोक सकते हैं इससे ज्यादा तो नहीं रोक सकते।
चतुर अपनी पत्नी को डांटते हुए कहता है, तुम भी न.... मैडम !को अपनी समस्या बतलाने लगीं। इसमें यह क्या कर सकती हैं ? इन्हें तो खुद ही ,अपना वेतन चाहिए।
ऐसी कोई बात नहीं है, शुरू में प्रवीण ने, मुझसे मेरा वेतन पूछा था, मैंने भी, अपने घर में झूठ बोला है - कि मुझे 8000 वेतन मिल रहा है। घर खर्चे में से पैसे बचाकर, उन्हें दिखला देती थी। शुरू में तो प्रवीण नाराज रहे, और उन्होंने कहा -अब तुम्हें घर खर्च के लिए कोई पैसा नहीं मिलेगा। अब तो तुम कमाने लगी हो, किंतु अब धीरे-धीरे हमारे संबंध सुधार रहे हैं इसलिए अब मैं जितने भी पैसे प्रवीण से मांगती हूं ,दे देते हैं।
