Ek rikt sthan

 लगाती हूँ, बिंदिया ! पहनती हूँ ,चूड़ियां !

मुस्कुराती हूँ ,एक रिक्त स्थान तेरी यादों का।

सजती -संवरती हूँ ,दिन -रात कटते हैं ,मगर ,

 रिक्त स्थान,जो भरा तेरी चाहत की 'उम्मीदों' में। 


रातों को तारे गिनती हूँ , लोगों से  मिलती हूँ। 

एक रिक्त स्थान,जिसको भरा तेरे' इंतजार' में। 

भर लेती हूँ ,वो रिक्त स्थान,जो सताते ,मुझको !

तेरे समीप न होने का एहसास दिलाते मुझको !

 जीवन की मेरे ,शून्यता को समझ पाओगे ,क्या ?

 प्रश्न को जगह दी,रिक्तता को समझ पाओगे क्या ?

जीवन के कुछ पन्ने, तेरी यादों ,तेरे इंतज़ार के हैं। 

आओगे !जब,जीवन की रिक्तता भर पाओगे क्या ?

तुम हो ,दूर ही सही तेरे होने का एहसास है ,मुझे।

 छूट गए जो ख़ाली पन्ने ,तहरीर लिख पाओगे क्या ?

सब कुछ है ,मेरे क़रीब !एक '' तू'' तेरा इश्क़ नहीं ,

इस जीवन के ''रिक्त स्थान ''को भर पाओगे क्या ? 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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