Barsaat ek geet

 बरसात की बूंदों की सरगम अपनी लय से,

 तन को भिगोती, कोई गीत गुनगुना रही है।

 ये तन ही नहीं , प्यार की 'सरग़ोशी' में डूब ,

माटी की सौंधी महक,कुछ नग्में बना रही है।

 


  प्रेमसिक्त ह्रदय में , रसवंति राग सुना रही हैं।  

 चंचल बूंदों के मुक्ता,पंक्तिबद्ध लय बना रही हैं।  

 चंचल मन,  भावविभोर हो, प्रेम गीत गा रही है। 

 बरसात हर उम्र पर असर अपना दिखला रही है।

 

मन में उठती उमंगें ,बालकों को मदहोश कर ,

करतल पर पकड़ बूंदों को उल्लास मना रहे हैं।

पानी में ' कागज़ की नौका' उम्मीदें जगा रहीं हैं।  

बरसात के गीत, सभी को ताल पर नचा रहे हैं।

 

 भीगे बालकों में जीवन की, उमंग जगा रहे  हैं। 

बरसात की बूंदें कृषक को जीवन राग सुना रहीं हैं। 

 उछलते मेंढकों को, धुन पर अपनी  नचा रहे हैं।

हर इक उम्र और जीवन बरसात के गीत गा, रहें हैं।

 

प्रेमी को प्रेम, गीत सुना, प्रियसी को लुभा रही है। 

प्यासे ह्रदयों में ,प्रेम ज्योति जगा,आभा बढ़ा रही है।   

हर उम्र, हर जीवन को कोई नई धुन सुना रही है।

जीवन में आगे बढ़ जाने की सरगम सुना रही है।     

 

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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