बरसात की बूंदों की सरगम अपनी लय से,
तन को भिगोती, कोई गीत गुनगुना रही है।
ये तन ही नहीं , प्यार की 'सरग़ोशी' में डूब ,
माटी की सौंधी महक,कुछ नग्में बना रही है।
प्रेमसिक्त ह्रदय में , रसवंति राग सुना रही हैं।
चंचल बूंदों के मुक्ता,पंक्तिबद्ध लय बना रही हैं।
चंचल मन, भावविभोर हो, प्रेम गीत गा रही है।
बरसात हर उम्र पर असर अपना दिखला रही है।
मन में उठती उमंगें ,बालकों को मदहोश कर ,
करतल पर पकड़ बूंदों को उल्लास मना रहे हैं।
पानी में ' कागज़ की नौका' उम्मीदें जगा रहीं हैं।
बरसात के गीत, सभी को ताल पर नचा रहे हैं।
भीगे बालकों में जीवन की, उमंग जगा रहे हैं।
बरसात की बूंदें कृषक को जीवन राग सुना रहीं हैं।
उछलते मेंढकों को, धुन पर अपनी नचा रहे हैं।
हर इक उम्र और जीवन बरसात के गीत गा, रहें हैं।
प्रेमी को प्रेम, गीत सुना, प्रियसी को लुभा रही है।
प्यासे ह्रदयों में ,प्रेम ज्योति जगा,आभा बढ़ा रही है।
हर उम्र, हर जीवन को कोई नई धुन सुना रही है।
जीवन में आगे बढ़ जाने की सरगम सुना रही है।
