Rasiya [part 125]

अब तक उर्वशी को, उस अनजान शख़्श से बातें करते हुए काफी समय हो गया था। उसका व्हाट्सएप नंबर भी मिल गया था ,शायद उसे भी लगने लगा था। हम दोनों में अच्छी बन रही है। तब एक दिन उर्वशी ने कहा -दोस्ती का दावा करते हो किन्तु अभी भी विश्वास नहीं है। अब क्यों छुपना चाहते हो ?ऐसा कौन सा बुरा कर्म किया है ,जो मुँह छुपा रहे हो।😀😀😀

 छुपना तो नहीं चाहता, किन्तु.... हो सकता है ,तुम्हें मैं पसंद न आऊं ?😉😉

तुम्हारा क्या किसी से रिश्ता करवाना है ? बाल -बच्चेदार हो ,इस उम्र में भी तुम्हें पसंद -नापसंद की चिंता पड़ी है 😂😂😂 

इस उम्र से तुम्हारा क्या अर्थ है ? तुम क्या मुझे बूढ़ा समझ रही हो ?😠😠😠  हम अभी इतने बूढ़े नहीं हुए हैं । 

जितने भी हुए हों , बूढ़े हुए भी हों तो.... क्या फ़र्क पड़ता है ? एक न एक दिन तो होना ही है।😀😀 

जब की तब देखेंगे। 


तो लगाइये अपनी एक जानदार सी तस्वीर !

हम जानते हैं ,तुम हमें देखने के लिए बेक़रार हो ,हमें डर है ,कहीं आपके पतिदेव को बिना पत्नी के जीवन काटना न पड़े। 

ओहो ! अपने आप पर इतना विश्वास !

हम चीज ही ऐसी हैं ,कोई लड़की ही, ऐसी होगी ,जिसने हमें देखा और  पागल न हुई हो। 

मुझे पागल बनने का कोई शौक नहीं है किन्तु इतनी गारंटी देती हूँ ,वो लड़कियां कोई और रहीं होंगी ,जो तुम्हें देखकर पाग़ल बनी हों किन्तु तुम, मुझे पागल नहीं बना सकते। 

जानता हूँ , लिखकर वो अचानक चला गया ,फिर उसका कोई जबाब नहीं आया। उर्वशी बहुत देर तक उसके जबाब की प्रतीक्षा करती रही। जबाब न आने पर उसने सोचा ,कहीं ये बुरा तो नहीं मान गया। बुरा माना भी हो तो मेरी बला से... यह सोचकर उसने भी फोन एक तरफ रखा और लेट गयी। कुछ देर इसी तरह लेटी रही फिर से फोन की तरफ निग़ाहें उठाकर देखने लगी। कहीं कुछ मैसेज तो नहीं आया। 

उसे, मेरी कोई बात बुरी तो नहीं लग गयी ,ऐसा मैंने कुछ कहा भी नहीं है। बुरी लगी तो मेरी बला से... मैं उसके पीछे नहीं गयी, वो ही मेरे पीछे आया था। उसकी बात वहीँ समाप्त हो गयी थी किन्तु उर्वशी के मन में अभी भी थोड़ी सी उधेड़ -बुन चल रही थी। शाम के समय भी, उसका कोई संदेश अथवा कोई रील भी ,उसने नहीं भेजी। 

अगले दिन जैसे ही उर्वशी ने फोन पर व्हाट्सएप खोला तो चौंक गयी।आज उसकी डीपी पर एक चित्र था किसी लड़के का....

उसे देखकर उर्वशी को क्रोध आया ,और लिखा -तुम क्या जतलाना चाहते हो ?कि तुम अभी भी जवान हो किसी बच्चे की तस्वीर लगाकर मुझे बहका नहीं सकते 😡😡😡 

😁😁😁 मैंने कब कहा,' ये मेरी तस्वीर है।''ओहो' 'दीदार ए यार'' के लिए इतनी तड़प !😀😀😀 

उसका अपने को ,'यार' कहना उर्वशी को अच्छा नहीं लगा। ज्यादा दांत दिखाने की आवश्यकता नहीं है। 😕 तुम अपने को क्या समझे हुए हो ? हीरो हो,तुमसे दो -चार बातें क्या कर लीं ? अपने को' फ़न्ने खां' समझने लगे। 😠😠😠 

एक बात बताऊँ !

उसके पश्चात उसने कुछ नहीं लिखा ,उर्वशी प्रतीक्षा में थी ,ये कहना क्या चाहता है ?किन्तु उसका कोई जबाब नहीं आया। तब हारकर लिखा -अब बताओगे भी...

तुम पूछोगी,तभी  तो बताऊंगा। अब तुमने आदेश दिया है, तो बताता हूँ। वैसे तुम गुस्से में भी बहुत अच्छी लगती हो 😁😁😂😂😂

क्या ये बताना था ? क्रोध में उर्वशी ने लिखा -तुम्हें कैसे मालूम ? मैं कैसी दिख रही हूँ ? 

बस, ऐसा महसूस हो रहा है ,ये मेरी कल्पना है,तुम्हारे गाल और नाक लाल हो चुके हैं। अनायास ही उर्वशी की नजर सामने रखे आईने पर गयी।  तुम मेरे सामने हो और मुझसे रूठी हो ,मैं मना रहा हूँ। 

अभी मुझे काम है ,लिखकर उर्वशी ने फोन बंद कर दिया। कैसा इंसान है ? एक फोटो लगाने में इतना समय लगा रहा है। मुझे लगता है ,ये मुझे जानता है और ये नहीं चाहता, मैं भी इसके विषय में जानू ,मेरे पास टाइम पास करने आ जाता है। मेरे पास ही क्यों ? न जाने किस -किसके साथ समय बिताता होगा ? लगता है ,इसके पास कोई काम -धाम नहीं है। ये जान गया है कि मैं उसकी तस्वीर में दिलचस्पी दिखला रही हूँ इसीलिए ये ड्रामे कर रहा है। 

इसमें गलत भी क्या है ? जो मुझसे बात कर रहा है ,वो मुझे जानता है किन्तु मैं नहीं जानती। उसके विषय में जानने का मेरा हक़ तो बनता है। किस अधिकार की बात सोच रही हूँ , मैं ! अचानक ही उसके अंतर्मन ने उसे झिंझोड़ा !'' एक अनजान इंसान तुझसे बात कर रहा है ,तूने उसे ब्लॉक क्यों नहीं किया ? सारा झंझट ही समाप्त हो जाता किन्तु तुझे तो, उसके विषय में जानना था। ये कैसी ज़िद है ? उसे इतना मौका भी तूने ही दिया है वरना इस तरह का मज़ाक कभी न करता।

  आज उसकी डीपी पर एक नई तस्वीर थी। उर्वशी का शक़ सही निकला जो उसने ,उसकी बातों से अनुमान लगाया था , वो अनुमान सही था। भले ही, उसने अपनी एक भी तस्वीर नहीं लगा रक्खी थी । उसकी बातें भी कभी -कभी उर्वशी को किसी की याद दिलातीं थीं ? किन्तु विश्वास नहीं होता था। पता नहीं, वो अब कहाँ होगा ?

 वो भी ऐसे ही लोगों के दर्द दूर किया करता था। लोगों के नहीं, सिर्फ़ महिलाओं के ,उसकी बातों में न जाने कैसा जादू था ? हर महिला उसकी बातों का अनुसरण करती थी । तभी स्मरण हुआ ,उसकी पत्नी का नाम भी तो कस्तूरी था ,मन ही मन अंदाजा लगाती थी ,कहीं ये वही तो नहीं।उर्वशी के मन में बार -बार यही विचार आता था अपने मन की शंका को दूर करने के लिए बार -बार उसकी एक तस्वीर डीपी पर लगाने के लिए बार -बार उससे कह रही थी। 

इस बात को शायद वो भी समझता था, यदि इसने मेरा चित्र देख लिया तो समझ जाएगी कि मैं कौन हूँ ? किन्तु अब उर्वशी ने दोस्ती का वास्ता दिया था।  

उस अनजान शख़्स को भी शायद अब उस पर विश्वास हो गया था. कि उर्वशी उससे बातें करती है, तब उसने अपनी एक तस्वीर लगाई। 

उस तस्वीर को देखकर उर्वशी को जैसे झटका लगा, यह कौन है ? जानी -पहचानी शक्ल है, बहुत सोचने के पश्चात  उसे याद आ गया -'सी.बी एच . यानी कि '' चतुर भार्गव'' ओ माय गॉड मैंने यह बात पहले क्यों नहीं सोची ? क्या दुनिया वास्तव में ही गोल है ? उसे बड़ा आश्चर्य हुआ , अब तो उनकी उम्र भी बढ़ गई है ,बाल काले ,सफेद दाढ़ी,चेहरे पर कुछ झुर्रियां भी आ गई हैं । उम्र तो मेरी भी बढ़ गई है , किंतु इनसे तो मैं छोटी हूं , किंतु आज भी इनकी आदत गई नहीं है। दिखाने के लिए शायद बाल रंगे होंगे ,सोचकर मुस्कुराई। 

तब उधर से एक संदेश आया है और पूछा - पहचान लिया ,अब क्या कहती हो ?

सर ! मैं बहुत परेशान थी, मैं इतनी दिनों से सोच रही थी कि आखिर यह इंसान कौन है ? किंतु आज पता चल गया, आप हैं। 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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