Hathon ki lakeeren

हाथों की लक़ीरों में छुपे राज़ कई ,

' उसने 'बनाया पर समझा न कोई।

कहने और समझने वाले कहते,लोग कई।  

आडी- तिरछी रेखाओं में जन्म- मरण का खेल है। 


नक्शा ऐसा, खिंचा हुआ है। 

अब तक बांच सका न कोई। 

मानव जीवन के,' राज़' कई !

कब, क्या, किससे, कैसे हो बिछुड़ना ?

कब, किस मोड़ पर मिल जाये, कोई ?

ये आती- जाती माया की, दिखती लम्बी रेल है। 

मिलना हो उनसे ,चाहा मैंने ,

कब, किससे मिलना होगा ?

रेखाचित्र बना, इन लक़ीरों में।

न जाने, भाग्य में, क्या बदा है ?

जीवन बना रहस्य, जान सका न कोई !

पहेली, इस जीवन की कैसे बूझें  ? 

क्या नक्शा छिपा ?इन लक़ीरों में ?

'कर्म रेखा' भी बनी, इन लक़ीरों में। 

जान पायेगा न रहस्य !उसकी माया का। 

उसने खेल रचाया ,'हाथ की लकीरों' का। 

कैसी ये पहेली ? गूढ़ रहस्य ये जीवन ! 

कर्म द्वारा सुलझा तू , रहस्य लक़ीरों का। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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