Rangon ki kahani

 मम्मी मुझे रंगों के विषय में बताइए ! हमारी मैडम ने रंगों की कहानी लिखने के लिए कहा है। कहते हुए, कृति अपनी मम्मी के इर्द-गिर्द घूम रही थी। मम्मी ! ये रंग कहां से आते हैं ? ये  रंग इतने सारे ही क्यों होते हैं ? हम इन रंगों के विषय में कैसे जान सकते हैं ?

बिटिया के प्रश्न सुनकर कावेरी मुस्कुराई और बोली - क्या तुम रंगों को नहीं जानती हो ? रंग तो हमारे इर्द -गिर्द ही रहते हैं। हमारी ज़िंदगी में ,रंग बड़े ही महत्वपूर्ण हैं। हमारे आसपास न जाने कितने रंग बिखरे होते हैं ? कभी तुमने ध्यान नहीं दिया। कपड़ों से लेकर प्रकृति में रंग ही रंग है और इन रंगों के सही तालमेल से ही प्रकृति सुंदर नजर आती है।'' विभिन्न रंगों से सजी 'रंगोली 'होली के भी रंग अनेक !


गिरगिट की भांति ,इंसान भी बदलता रूप अनेक ! कहकर मुस्कुराईं - ' भइया के भी गाल लाल हुए ,थप्पड़ जो मारा पापा ने....  क्रोध के कारण' नाक लाल हुई ,हमारी बिटिया रानी की। गुस्से से हुए लाल टमाटर' ,लाल गाजर और चुकंदर भी इठलाता आया। 'रक्त कोशिका लाल, सेहत का राज़ यहां समझ है ,आया। तुम्हारी प्यारी मुस्कान ने गालों पर लाल रंग छलकाया।  

हमारी बगिया में देखो !-लाल ग़ुलाब मन को भाया,गुड़हल, डेहलिया ने भी अपना चटक रंग दिखलाया । 

तब उन्होंने पूछा - अभी तुमने देखा, मैं बगीचे में कार्य कर रही थी, हरा रंग था, हरे रंग की पत्तियां ! धरा पर उगी हुई थी ,हरे रंग की धनिया !  हरे रंग की घास थी।  कुछ जीव-जंतु  तो हर रंग के होते हैं जैसे कि टिड्डा ! पक्षी भी हरे रंग का होता ,जैसे -मिट्ठू तोता ! 

तुम्हें पता है ,उसकी सुंदरता किस तरह से बढ़ती है ,जब उसकी गर्दन में लाल रंग की पट्टी बनी होती है। प्रकृति ने रंगों का, खूब अच्छा उपयोग किया है। तुम ही सोचो ! कल्पना करो !यदि तोता हरा ही होता उसके गले में लाल पट्टी न होती, चोंच नारंगी न होती। तो कैसा लगता ? हरा रंग हमको शांति देता है, सुकून देता है। 

उसकी बातें सुनकर, कृति सोच रही थी ,और बोली -मम्मी ! लाल रंग ! से देखो ! पापा ने लाल रोली से तिलक लगाया , मम्मी के माथे की बिंदी , मांग में लाल  सिंदूर ही भाया । मेहँदी का हरा रंग है ,उसमें भी लाल रंग समाया। 

बहुत सुंदर ! मेरी बिटिया को रंगों का राज अब समझ है ,आया !  यह रंग सुंदरता का ही नहीं, बल्कि प्रेम का प्रतीक भी है ,इसलिए हमारा दिल भी लाल ही होता है।' गुलाब का फूल 'जो, हमेशा चाचा नेहरू की जेब में लगा रहता  था। लाल रंग 'ऊर्जा' पैदा करता है। लाल रंग मंगल कार्यों में प्रयोग में किया जाता है। क्या तुम जानती हो, लाल रंग के सिंदूर से ही ' स्वास्तिक 'बनाया जाता है।

 दुल्हन के हाथों में लाल रंग की चूड़ियां, लाल रंग की बिंदिया, लाल रंग की साड़ी उसे अन्यों से विशेष बनाती हैं । सुहागन औरतें अधिकतर  'लाल रंग' के वस्त्र धारण करती हैं। 

पीला रंग' हल्दी' में भी होता है, सोने का है ,पीला रंग !बैसाखी पर पीले वस्त्रो का उपयोग किया जाता है। सूरजमुखी का फूल, सूरज की किरणें  'पीत वर्ण ' ही तो होती हैं।  किंतु अब तुम यह सोचो !यदि सूरजमुखी के मध्य काले  बीज न हों  तो वह कैसा लगेगा ? तब प्रकृति ने , काले  बीजों से उसे सजाया।  

नीला या आसमानी रंग तो आसमान से आया। जल का नील वर्ण का  होता। आकाश अनंत है तो जल  जीवन है। तुम्हारी स्कूल की यूनिफॉर्म में भी तो नीला रंग ही है। कुछ फूल भी नीले होते हैं। 

 कभी तुमने इन फूलों को देखा है, ईश्वर ने कितनी सुंदर कलाकृति की है। ऐसा लगता है - जैसे ब्रश से इनको सजाया है। 

सफेद रंग शांति का प्रतीक है, सफेद कबूतर उड़ते हुए कितने अच्छे लगते हैं। कभी-कभी बादल भी सफेद हो जाते हैं। खाने की वस्तुओं में ,दूध ,दही ,पनीर ,चावल ,मूली सभी सफेद रंग के होते हैं। जो हमारी सेहत  के लिए भी लाभप्रद हैं। इस सफेद में यदि लाल रंग मिल जाए तो दूसरा ही रंग गुलाबी बन जाता है। नीला मिल जाए तो आसमानी बन जाता है। यह सफेद रंग सब रंगों को एक नया ही रूप दे देता है और सब में समाहित हो जाता है।

'' सफ़ेद फूल अपनी बगिया में खिले ऐसे ,चांदनी संग सितारे मुस्कुरा रहे हों जैसे '' मोगरा ,चमेली ,हरसिंगार ,गुलाब ,कनेर ! श्वेत रंग  के लिए ,उज्ज्वल ,निर्मल ,स्वच्छ ,धवल ,शुभ्र ,इत्यादि शब्दों का प्रयोग करते हैं। 

काला रंग, जो अंधेरे का प्रतीक है ,रात का प्रतीक है, दुख का प्रतीक है।

 हमारे बाल भी तो काले हैं, हमारी भौंहे भी काली हैं। 

सही कहा ,रात न आये तो, उजियारे का क्या महत्व ?हम विश्राम ही न करें ,सुकून की नींद न ले पाएंगे। दुःख न हो तो, सुख को कैसे जानेंगे ? तुम कल्पना करो !यदि हमारे बाल काले  न होकर किसी और रंग में होते तो हम कैसे लगते, हमारी पलकें , किसी और रंग की  होतीं  तो...  हम लोग कैसे लगते हैं ?अंधियारी रात  न हो तो आसमान पर तारे कैसे चमकते ?

हर रंग का अपना अलग महत्व है ,एक- दूजे की रंगत बढ़ाते,एक -दूजे में समा, नया रंग बन जाते। सभी रंग मिलकर बगिया को सजाते। रंग -बिरंगी दुनिया देख ,हम !मन ही मन हर्षाते। रंगो के मेल से 'वर्षा ऋतु ''में ''इंद्रधनुष '' बन जाते। रंगों से ही विभिन्न स्वप्न हम सजाते। रंगों से ही विभिन्न मिठाई ,रसगुल्ले ,जलेबी ,इमरती बर्फी ,टॉफी ,चॉकलेट सभी बच्चों को ललचाते। अब देखा !रंगों की  कितनी बड़ी  दुनिया है ?

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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