अपने को जब तुम ,तन्हा पाओ !
फ़िक्र में अपनों की,तन्हा!दिन न कटते हों।
तब अपने आप को, संभाले रखना !
धैर्य मत खोना ,'अपना ख़्याल रखना।'
दूर हो ,बहुत फ़िक्र होती है, तुम्हारी ,
रह-रहकर याद सताती है ,तुम्हारी !
मन में सुकून रहता,कभी तो आओगे अंगना।
अपनों के लिए ही सही ,अपना ख़्याल रखना।
ख़ुशी के मौक़े !जब तुम्हारी याद दिलातें हैं।
सच कहती हूँ ,अश्रुओं से नैन भीग जाते हैं।
तुम्हें परवाह है मेरी, सोच तुम्हें मुस्कुरा लेती हूँ।
मेरे लिए ही सही, तुम अपना ख़्याल रखना !
स्मरण करना ,उन लम्हों को ,जब हम साथ थे।
जब कभी उदासी या अकेलापन तुम्हें घेर ले !
तन्हा समझ तुम्हें ,जब कोई दोस्ती का साथ दे !
अपने लिए नहीं ,मेरे लिए ही' अपना ख़्याल रखना।'
मुझे ख़ुशी होगी, तुम अकेले नहीं हो, कोई तो साथ है।
भले ही किसी मित्र का , अब काँधे पर तुम्हारे हाथ है।
तुम मेरी अमानत हो ,ये बातें, वो रातें कहीं ,भूल न जाना।
किसी कमज़ोर क्षण ,नाजुक़ घड़ी में अपना ख्याल रखना।
जीवन डगर पर ,चलते -चलते थक जाओ ,कभी ,
थोड़ा आराम कर ,अपने चित्त को सहज कर मुस्कुराना।
प्रेम कोई बंधन नहीं , खुलकर जीवन जीना ,मुस्कुराना।
तुमसे दूर कोई तुम्हारी प्रतीक्षा में है ,'अपना ख़्याल रखना।'
हमारी कुछ तस्वीरें ,उन दिनों की याद दिलाती हैं।
साथ गुज़ारे हैं ,वक़्त हमने ,मुझे हर बार आज़माती हैं।
जीवन डगर हमें फिर से मिलाएगी,हमें ये याद है रखना।
ये दिल तुम्हारे लिए धड़कता ,बस अपना ख़्याल रखना।
जब किसी को फिक्र होती है, हमारी,
जब कोई परवाह करता है ,हमारी ,
सोचता है ,हमारे लिए !
चंद शब्दों में कह देता है -''अपना ख्याल रखना .''
