किसे ख़बर जीवन पथ पर इतने संघर्ष मिल जायेगें।
किसे ख़बर....दुःख में, अपने भी न साथ निभाएंगे।
किसे ख़बर थी ?इन राहों में, हम तुम यूँ मिल जायेंगे।
सुख में साथ निभाने वाले, दुःख में साथ छोड़ जायेंगे।
किसे ख़बर थी ,जीवन के मोड़ इतने दुष्कर हो जायेंगे।
किसे ख़बर जीवन की तपती धूप में अकेले रह जायेंगे।
किसे खबर....सपनों के रंग इस क़दर बिख़र जायेंगे।
किसे खबर थी ?ख़्वाब पलकों में ही, छिपे रह जायेंगे।
किसे ख़बर थी ? जीवन में संघर्षो का भूचाल उठेगा।
कलयुग में यूँ पाप बढ़ेगा ,अपना ही अपने को छलेगा।
किसे ख़बर थी? विश्वास की डोर उलझ यूँ टूट जाएगी।
किसे खबर थी ? झूठे रिश्तों की पहचान न हो पायेगी।
किसे ख़बर चाहत में,मंज़िल की, छाले नजर न आएंगे।
किसे ख़बर चाहत जीने की ,कितने अश्रु हमें रुलायेगें ?
किसे ख़बर तूफ़ानों में , उम्मीदों का कोई दिया जलेगा।
किसे ख़बर साहस के बलपर मानव जीवन जी जायेगा।
