Kise khabar....

 किसे ख़बर जीवन पथ पर इतने संघर्ष मिल जायेगें। 

 किसे ख़बर....दुःख में, अपने भी न साथ  निभाएंगे।

किसे ख़बर थी ?इन राहों में, हम तुम यूँ मिल जायेंगे।

सुख में साथ निभाने वाले, दुःख में साथ छोड़ जायेंगे।

 


किसे ख़बर थी ,जीवन के मोड़ इतने दुष्कर हो जायेंगे। 

किसे ख़बर जीवन की तपती धूप में अकेले रह जायेंगे। 

किसे खबर....सपनों के रंग इस क़दर बिख़र जायेंगे। 

किसे खबर थी ?ख़्वाब पलकों में ही, छिपे रह जायेंगे।

 

किसे ख़बर थी ? जीवन में संघर्षो का भूचाल उठेगा।

कलयुग में यूँ पाप बढ़ेगा ,अपना ही अपने को छलेगा।  

किसे ख़बर थी? विश्वास की डोर उलझ यूँ  टूट जाएगी। 

किसे खबर थी ? झूठे रिश्तों की पहचान न हो पायेगी।


किसे ख़बर चाहत में,मंज़िल की, छाले नजर न आएंगे।

 किसे ख़बर चाहत जीने की ,कितने अश्रु हमें रुलायेगें ?

किसे ख़बर तूफ़ानों में , उम्मीदों का कोई दिया जलेगा।

किसे ख़बर साहस के बलपर मानव जीवन जी जायेगा।        

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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