Chhlakte aansun

सुख हो या दुःख ,बरबस ही झलक आते आंसू। 

कितने मासूम हैं,  प्रेम में भी,  बरस जाते आंसू। 

ग़ैर के दर्द  में भी ,पलकों से फ़िसल आते आंसू। 

पीड़ा ,विरह ,वेदना सभी पर्याय हैं ,ये लाते आंसू।



उसके इंतज़ार का दर्द , तनिक न सह पाते आंसू। 

भावों का मिश्रित बोझ लिए ,प्रेम में छलकते आंसू।

तेरी याद में ,ग़म ए तन्हाई में , यूँ  छलक आते आंसू। 

अति न हो पीड़ा में ,मन का बोझ कम कर जाते आंसू।

 

टूटते घरोंदों की याद दिला,उन्हें ज़िंदा कर जाते आंसू।  

मनोदशा कैसी ?अधर मुस्काते,नैनों से छलकते आंसू।  

अकेलापन सताता जब ,एकांत डराता छलकते आंसू।   

मासूम दिल सह न पाता,भावों का भार छलकते आंसू।

 

मिलन की घड़ियां ,देख 'नादान दिल' छलकाता आंसू। 

दिल को तनिक ठेस पहुंची नहीं ,बरबस छलकते आंसू।

विडंबना ये कैसी ? समझा नहीं कोई, कहते झूठे आंसू।

कमज़ोर नहीं , आँखों से अपनी बोली कह जाते, आंसू।   

   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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