सुख हो या दुःख ,बरबस ही झलक आते आंसू।
कितने मासूम हैं, प्रेम में भी, बरस जाते आंसू।
ग़ैर के दर्द में भी ,पलकों से फ़िसल आते आंसू।
पीड़ा ,विरह ,वेदना सभी पर्याय हैं ,ये लाते आंसू।
उसके इंतज़ार का दर्द , तनिक न सह पाते आंसू।
भावों का मिश्रित बोझ लिए ,प्रेम में छलकते आंसू।
तेरी याद में ,ग़म ए तन्हाई में , यूँ छलक आते आंसू।
अति न हो पीड़ा में ,मन का बोझ कम कर जाते आंसू।
टूटते घरोंदों की याद दिला,उन्हें ज़िंदा कर जाते आंसू।
मनोदशा कैसी ?अधर मुस्काते,नैनों से छलकते आंसू।
अकेलापन सताता जब ,एकांत डराता छलकते आंसू।
मासूम दिल सह न पाता,भावों का भार छलकते आंसू।
मिलन की घड़ियां ,देख 'नादान दिल' छलकाता आंसू।
दिल को तनिक ठेस पहुंची नहीं ,बरबस छलकते आंसू।
विडंबना ये कैसी ? समझा नहीं कोई, कहते झूठे आंसू।
कमज़ोर नहीं , आँखों से अपनी बोली कह जाते, आंसू।
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