Apurntaon ka sansar

खिले- खिले चेहरों की जिज्ञासाएं हैं ,कब हुईं पूर्ण !

पथ की नित नई बाधाओं से,  मंजिलें रहतीं अपूर्ण !

स्वप्न हैं , कुछ मुक़म्मल हुए , कुछ रह गए  अपूर्ण ! 

कभी आसमाँ, कभी जमीं मिली ,मिला न जहाँ पूर्ण। 



कभी अश्रु बहे ,कभी प्यार की उम्मीदें ! रहीं अपूर्ण। 

कभी तक़रार तो, कभी शिक़वे जो हुए , कभी न पूर्ण।  

धन मिला, लालसा बढ़ी , बढ़ती जिज्ञासाएं रहीं अपूर्ण।

हंसी तेरी,मुस्कुराहटों को, वेदना ने, कब होने दिया पूर्ण ?

  

तुम, हम से मिले ,जज़्बात न मिल सके प्रीत रही अपूर्ण। 

कोई कंगाल है तो कोई अमीर है , क़िस्मत से रहे अपूर्ण। 

कोई विचार से तो, कोई व्यवहार से, मानव रहा अपूर्ण।

कोई योगी तो कोई भोगी ,उनका  भी  जहाँ रहा अपूर्ण।

 

नर बिन नारी अपूर्ण , नारी बिन नर,साँस बिन रूह अपूर्ण ! 

शिव से शक्ति मिले ,साथ जब दोनों मिलें, जीवन हो  पूर्ण। 

 भाव है ,विचार हैं ,आशंकाओं से घिरे चेहरा न हुआ कभी पूर्ण।

वायु बिन जीवन ,कंटक बिन पुष्प,चाँद बिन चांदनी होते अपूर्ण।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post