दरअसल पुलिस को इन लोगों की बरसों से तलाश थी किन्तु कोई ठोस प्रमाण न मिलने के कारण, पुलिस किसी को भी नहीं पकड़ पा रही थी। ज़ीनत की हालत देखकर ऐसा नहीं लगता था ,वो ऐसा कुछ सोच या कर सकती है। अभी कुछ दिनों पहले ,इस लड़की ने शराब पी हुई थी। किसी से बहुत जोरों से लड़ रही थी। उस पर पत्थर फेंककर मार रही थी। उस आदमी ने पुलिस में शिकायत की ,तब पुलिस ने उस लड़की को पकड़ लिया।
पुलिस के द्वारा पकड़े जाने पर भी, वो उसी आदमी को ही नहीं , न जाने किस -किसको गाली दे रही थी ? बार -बार कह रही थी -लोगों से मेरी ख़ुशी देखी नहीं जाती ,उस साले ,हरामख़ोर ने मेरी चुगली उनसे कर दी।वो समझ नहीं पा रहे थे कि ये किसके विषय में कह रही है।
वह लोगों के घर में घुसकर,किस तरह से घुसपैठ करती थी । इससे आगे की कहानी जानने के लिए ,हम लोगों से जुड़े रहिये ! अख़बार वालों को तो ख़बर चाहिए। यह अच्छी ख़बर है ,उसे तोड़ -मरोड़कर अपने -अपने तरीक़े पेश कर रहे थे। क्या ये लड़की वास्तव में ही एक अपराधी है ? है तो, क्या इसका कोई आपराधिक समूह है ? या फिर ये लड़की उन लोगो के चंगुल में फंस गयी। आख़िर वो कैसे एक झूठी अपराधी बन गयी ?
ज़ीनत के पकड़े जाने पर सुदीप ने ,अपने मित्र महेंद्र से बात की ,वो ज़ीनत के विषय में सम्पूर्ण जानकारी लेना चाहता था। तब वो उसे ज़ीनत के जीजा 'रफीक ' के पास लेकर गया।
आइये !मियां ! आज कैसे आना हुआ ,रफ़ीक ने सुदीप और अपने पड़ोसी महेंद्र को देखकर पूछा।
ये हमारे मित्र' सुदीप' हैं ,तुम्हारी साली'' ज़ीनत ''इनके यहाँ काम करती थी।
क्या वो इनके घर से कुछ चुराकर भागी है ?या कुछ और हरक़त की है।
अरे ! नहीं ऐसा कुछ नहीं है, हमारे यहाँ उसने ऐसा कुछ नहीं किया है ,सुदीप ने उसकी शंका को मिटाया। वैसे उसके बारे में तो आपको पता चल ही गया होगा। आजकल कहाँ है ?
नाम मत लो ! कमज़र्फ का ,उसने तो हमारे ख़ानदान की 'नाक ही कटवा दी'है । इसके माँ -बाप तो मर गए किन्तु इसकी ज़िम्मेदारी हम पर छोड़ गए थे।
इसी बहाने तुम्हें, उसकी सम्पत्ति भी तो मिल गयी , महेंद्र ने रफीक पर व्यंग्य किया।
क्या सम्पत्ति इज्ज़त से भी बड़ी है ? उसने तो हमारी इज्ज़त की धज्जियां ही उड़ा दीं।
रफ़ीक मियां !तुम वैसे ही ,उसकी ज़िम्मेदारी ओटे बैठे थे ,तुमने उसका निक़ाह क्यों नहीं करा दिया ? सुदीप ने पूछा।
क्या बताऊँ ? साहब ! उससे ' निक़ाह' कौन करता ?सुंदर तो थी किन्तु न ज़बान ठीक थी ,न ही कोई काम आता था। उसकी आपा ने सिखाना भी चाहा तो सीखा नहीं ,आये दिन लड़ बैठती थी। सारा दिन घूमती रहती थी ,रोज़ -रोज़ की कलह से मैं भी तंग आ गया था।
क्या बचपन से ही उसकी आवाज ऐसी थी ?
नहीं साहब ! उसके साथ एक हादसा हुआ ,जिसके कारण उसकी आवाज पहले तो चली गयी ,बहुत इलाज़ करवाया ,तब से ऐसी ही हो गयी। वैसे एक बात जानना चाहूंगा ,आप उसके विषय में क्यों जानना चाहते हैं ?आप उसे कैसे जानते हैं ?
अभी तो महेंद्र ने बताया ,वो हमारे यहाँ काम करती थी ,हमारे ही घर में क्या ?आस -पास के घरों में भी यही काम करती थी। मुझे उसके विषय में जानने में कोई रूचि नहीं है, किन्तु मेरी पत्नी जो उसे सीधा समझती थी ,उसकी सहायता करती थी ,उसकी कहानियां सुनती थी ,उसे ,उसके विषय में जानकर बहुत धक्का पहुंचा ,उसके लिए मैं 'ज़ीनत के विषय में जानना चाहता हूँ।
रफ़ीक ने एक गहरी स्वांस छोड़ी और बोला - अब तो वो पकड़ी ही गयी है ,अब तो उसकी कहानी दुनिया जान जाएगी। उसके साथ हम भी बदनाम होंगे ।
सुदीप ने महसूस किया' रफ़ीक' को अपनी बदनामी की बड़ी फ़िक्र है।
फ़िक्र नहीं होगी, साहब ! लोग तो यही बोलेंगे -'बहन -जीजा ने उसको घर से निकाल दिया।
कोई ग़रीब ,जरूरतमंद तो इससे शादी कर ही लेता। क्या ? कहीं से भी उसके लिए रिश्ता नहीं आया।
यहाँ भी उसने कम ग़ुल नहीं खिलाये , एक लड़के से मिलने लगी,शायद उसे ,इससे हमदर्दी हो गयी होगी ,मैं नहीं जानता, उसकी मुलाक़ात उस लड़के से कैसे हुई ? किन्तु इतना जानता हूँ ,वो उसके बहकावे में आकर उसके साथ कहीं भाग गयी थी। उसके बाद से हमारा, उससे कोई मतलब या रिश्ता नहीं रहा ,कहकर रफ़ीक ने अपना ''पल्ला छाड़ ने लिया। ''
क्या तुम्हें उसके यहाँ होने का, लोगों के घरों में काम करने का कुछ पता ही नहीं चला। पता भी चला तो उससे पूछा नहीं ,कि वो अब तक वो कहाँ थी ? इतने दिनों तक किसके साथ रही ?
देखो जी, साहब ! मुझे अपने काम से ही फुरसत नहीं है ,न ही उसके बारे में जानने में मुझे कोई दिलचस्पी थी।
उसकी बहन को तो पता चला ही होगा ,तभी तो तुम्हारे बच्चे उसके साथ रह रहे होंगे ,जिन्हें वह अपने बच्चे बताती है।
मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है , किससे वो क्या कहती है ?मेरी बीवी को मालूम होगा तो उसने मुझे नहीं बताया ,कहकर वो उठ खड़ा हुआ।
सुदीप और महेंद्र भी उठ खड़े हुए वो समझ गए ,ये इससे ज्यादा जानकारी या तो जानता नहीं ,या फिर बताना नहीं चाहता। चलते समय सुदीप ने उससे पूछा ,वो पुलिस हिरासत में है ,क्या उसको छुड़वाना नहीं चाहोगे ?
मुझे कोई जरूरत नहीं है ,जिसको जरूरत हो वो जाये ,कहते हुए अपने काम में लग गया।
उसकी दुकान से बाहर आकर सुदीप बोला -मुझे नहीं लगता इसको कोई जानकारी नहीं है ,ये इतना सीधा भी नज़र नहीं आ रहा।
हो सकता है ,वो इसके घर में रही हो ,क्या इसने उस पर नजर न डाली होगी ,इसकी बीवी से झगड़े का कारण वही रही हो।
सुदीप ने महेंद्र की तरफ सहमति से उसकी तरफ देखा और बोला -राज़ कुछ गहरा ही लगता है। अच्छा, अभी मैं चलता हूँ।
वैसे अब तो उसकी सच्चाई पुलिस और मिडिया निकाल ही लेगी।
सुदीप को आया देख भूमि ने पूछा -कहां चले गए थे ?
मुझे, मेरे दोस्त महेंद्र ने बताया, उसकी बहन और जीजा वहीं रहते हैं , उसके विषय में जानकारी लेने गया था। पता तो चले, ये माजरा क्या है ?
कुछ पता चला , वह क्यों इतना झूठ बोलती है ? किसी पर भी कुछ भी इल्जाम लगा देती है।
अपने घर की बात ठीक से कौन बताता है ? मुझे तो लग रहा था, उसका जीजा भी कुछ छुपा रहा है , लगता है उसकी संपत्ति के लालच में उन्होंने इसे रखा हुआ था। हो सकता है ,अपने बच्चों को इसकी निगरानी के लिए ही छोड़ रखा हो जिन्हें यह अपने बच्चे रहती है।
किसी की जिंदगी में क्या कुछ चल रहा है ? कुछ पता नहीं चलता , देखने से तो सीधी सी, पागली सी लगती है जैसा कि आपने मुझे बताया था लेकिन उसके साथ बहुत कुछ हुआ है ,मुझे ऐसा लगता है।
