Zeenat [part 59]

पुनीत अब नाराज़ होने लगा था ,वो देख रहा था ,भूमि उसकी बातों में कुछ ज्यादा ही ध्यान देती है। उसने भूमि से कई बार कहा ,''इससे ज़्यादा बात करने की ज़रूरत नहीं है किन्तु भूमि अपने मन को या अपने अहम को संतुष्ट करना चाहती थी। उसे लगता था ,जिसे लोग 'पगली' कहते हैं , जिसे कोई अपने नज़दीक बैठाना भी पसंद नहीं करता ,भूमि , ज़ीनत के जीवन में कोई बदलाव लाएगी। उसकी हैरान, परेशान ज़िंदगी को सही राह दिखाने में सफ़ल हुई तो ,वह इसी तरह के अन्य कार्य भी करेगी। 

ये उसका पहला प्रयास था ,ये सब पुनीत समझ रहा था। जब उसने भूमि को समझाना चाहा ,तब भूमि बोली -मैं उसके जीवन के विषय में जानकर ,उस पर एक लेख लिखूंगी।


 

न जाने, ये क्या करेगी ? तब पुनीत ने कहना ही ,छोड़ दिया। इस बात का आश्चर्य उसकी सास को भी हो रहा था जो कामवाली सबसे लड़ती है ,किसी के घर ठीक से टिक नहीं पाती ,वो भूमि के साथ अच्छे से रह रही है। अभी कुछ महीनों पहले ही तो मोहल्ले वालों ने उसका तमाशा देखा था।बल्कि वो भूमि को उससे सतर्क रहने के लिए कहतीं।  

अब भूमि को लगने लगा था ,ज़ीनत से हमदर्दी जतलाते -जतलाते वो, मेरे घर में इतना काम भी नहीं करती ,काम के बाद भी आ जाती है। भूमि चाहती थी ,वो काम करे और अपने घर जाये किन्तु अपनी परेशानियां बता -बताकर वो ज़्यादा समय तक वहीं रहने लगी।

एक दिन  भूमि को डॉक्टर के यहाँ जाना था ,किन्तु ज़ीनत कई दिनों से उसी समय घर में आ जाती थी। घर में उसके भाई का बेटा आया हुआ था , इस तरह घर में ,ज़ीनत का होना उचित नहीं है ,जिसमें की पुनीत ने ,उसके विषय में जो बताया था ,कि उसके आधार पर उसका घर में आना उचित नहीं लगता है।

 तब भूमि अपने बेटे से और उस लड़के से बोली -घर का दरवाजा मत खोलना !यदि ज़ीनत घर में आये तो कह देना -'मम्मी, घर में नहीं हैं।' भूमि के जाने के बाद वो घर आई ,बेटे ने उसके लिए दरवाजा नहीं खोला और कह दिया - मम्मी यहां नहीं हैं ,कहकर वो तो निश्चिन्त हो गया किन्तु वो दूसरे दरवाज़े से घर के पिछले हिस्से में चली गयी। 

भूमि ने घर आकर पूछा - ज़ीनत तो नहीं आई। 

आई थी ,हमने उसे मना कर दिया। भूमि निश्चिन्त होकर आराम करने लगी कुछ देर बाद ज़ीनत आई और बोली -आंटी ! आप आ गयीं। 

उसे वहां देखकर भूमि चौंक गयी ,तुम यहाँ कैसे ?लड़का तो कह रहा था -मैंने उससे मना कर दिया, मम्मी नहीं है। 

बाजी ! मैं दूसरे दरवाज़े से आ गयी ,भूमि को उसका इस तरह घर के अंदर आना अच्छा नहीं लगा। जब मैं नहीं थी ,तो यहाँ रुकने का क्या मतलब ?तुम अपने घर चली जातीं। 

वो मुझे कुछ काम था ,कहकर बोली -चाय दे दो !मैं अब चली जाउंगी। एक दिन तो भूमि के न रहने पर बेटे से ही चाय मांगने लगी। वो तो उसकी ज्यादा बोलने की आदत नहीं थी ,बोला -मुझे चाय बनानी नहीं आती ,कहकर दरवाजा बंद कर लिया।

 अब तो भूमि को लग रहा था। उससे हमदर्दी जताते ,जताते कहीं मैंने मुसीबत मोल तो नहीं ले ली। तब भूमि ने सोचा ,अब मुझे, उससे सख्ताई से बात करनी होगी ,किन्तु अगले दिन वो फिर से लटका हुआ और दुःखी चेहरा लेकर आ गई किन्तु भूमि ने अब सोच लिया था ,अब कोई हमदर्दी नहीं ,इससे बात करनी ही होगी।

जब वो चाय पी रही थी ,तब भूमि ने पूछा -क्या हुआ ?आज क्यों परेशान हो ?

आंटीजी ! कल रात मेरे बेटे ने मुझे खूब पीटा। 

क्यों ? तुम्हारा तो रोज़ का यही किस्सा हो गया ,वो तुम्हें क्यों पीटता है ? कोई कारण तो होगा। अच्छा ये बताओ ! वो तुम्हारा ही बेटा है ,न... तुम उसकी माँ हो। 

हाँ !

जब तुम उन लोगों को पीट सकती हो जो तुम्हें काम दें ,खाना खिलाएं ,तब तुम उसे नहीं पीट सकतीं , तुम्हारे पास भी तो डंडा है। तुम उसकी माँ हो ,उठाओ ! डंडा और उसकी अच्छे से पिटाई कर दे  ! उससे पिटकर आ जाती है। बाहर लोगों पर डंडा बजाती है ,गरीब होकर भी तुम्हारे अंदर गरीबों के लिए कोई हमदर्दी नहीं ,वो बेचारा चाय वाला पीट दिया। वो चुपचाप भूमि की बातें सुनती रही।

 तब भूमि बोली -जब मैं घर में नहीं हूँ , तब तुम मेरे बेटे से चाय बनवाने के लिए क्यों कहती हो ? तुम्हें आना ही नहीं चाहिए। भूमि की बात सुनकर वो खिसियाई सी हंसी जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो। यदि तुम्हें चाय ही पीनी है ,अपने बेटे से बनवाओ ! बाहर पी लो !किन्तु इस तरह मेरे न रहने पर यहाँ आना भी नहीं। 

उस दिन के बाद ,कई दिनों तक ज़ीनत  काम पर नहीं आई, भूमि ने सोचा -'शायद उसे कोई परेशानी होगी, आ जाएगी।

 तब एक दिन पतिदेव ने, आकर बताया - मैंने सोचा था, उसे काम मिलेगा और उसके दो पैसे बन जाएंगे इसलिए उसे मैंने एक जगह सफाई के लिए भेज दिया था। जब वह वहां गई तो मेरे दोस्त ने मुझसे पूछा - आप इसे कैसे जानते हैं ?

ये भी कोई जानने वाली चीज है ,इसका सबको पता है ,आजकल हमारी श्रीमती इसे अपने घर के काम के लिए बुला लेतीं हैं। उन्हें इस गरीब ,बेचारी से हमदर्दी जो हो गयी है ,क्यों ,क्या हुआ ? तुम कोई सफाई कर्मचारी के लिए पूछ रहे थे , मैंने सोचा -इसे दो पैसे की आमदनी हो जाएगी , इसलिए तुम्हारे यहां भेज दिया। 

वो बोला - इसे तो मैं बरसों से जानता हूं।

तुमसे  कैसे टकरा गयी ?व्यंग्य से बोला। 

  पुनीत ने उसे बताया - यह बहुत परेशान थी ,भूखी -प्यासी घूम रही थी। लोग इसकी ग़रीबी का लाभ उठाते हैं। हमारे यहाँ रोते  हुए आई थी ,हमारा वो पड़ोसी है ,न...  परेशान थी।  इसका पति भी इसे छोड़कर चला गया और अपने दो बच्चों के साथ रहती है। जब इसने अपनी व्यथा श्रीमती जी को सुनाई ,तो उन्होंने इसे काम पर रख लिया। 

पुनीत की बात सुनकर वह जोर से हंसा और बोला -तब तो आप, इसके विषय में कुछ नहीं जानते। इसका तो कभी विवाह हुआ ही नहीं , और न ही यह किसी बच्चे की माँ है। 

क्या ? इसने तो हमें बताया था ,इसके दो बच्चे हैं और इसका शौहर इसे छोड़कर कहीं चला गया। 

पुनीत की बातें सुनकर वो मुस्कुरा रहा था। क्या यह हमारी हमदर्दी पाने के लिए , पति के छोड़कर  जाने की और दो बच्चों की कहानी सुना रही थी  ?हमारे मौहल्ले में सभी को इसकी दर्दभरी दास्ताँ पता है। 

वो हंसा और बोला -सब झूठ है। तुम तो जानते ही हो ,मेरा मेडिकल स्टोर भी है ,और जहाँ वो है ,वहीँ से कुछ दूरी पर' रफ़ीक ' एक आटे की चक्कीवाला भी रहता है। ये उसी की साली है। शुरू से ही, इसके हालात ऐसे ही थे। बहुत दिनों तक ये गायब रही ,न जाने कहाँ चली गयी थी ?और जब ये आई ,थोड़ी बदली हुई सी थी ,इसका वो घर तो इसकी अम्मी ने ही इसे दिया था किन्तु वो सब इसकी बहन ने ही हथिया लिया है ,और वे जो बच्चे हैं ,इसी की बहन के हैं। 

किन्तु इसने तो हमें कभी नहीं बताया कि इसकी कोई बहन भी है ,आश्चर्य से पुनीत बोला। 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post