आदिल अब घर भी सम्भालता, बच्चों और ज़ीनत को भी देखता ,हर वक़्त सलमा वहां नहीं होती। इस दौहरी मेहनत से ,अब आदिल भी थकने लगा था। घर में आकर देखता ,घर फैला पड़ा है ,बच्चे उनकी नानी संभाल रही है ,ज़ीनत को तो बस शारीरिक सुख चाहिए।
धीरे-धीरे ज़ीनत की मोहब्बत का, उसके रूप -रंग का असर फीका पड़ने लगा, लेकिन तब तक ज़ीनत गर्भवती हो गई थी ,उसके बच्चे की मां बनने वाली थी। अब वो अपनी दवाई भी वक़्त पर नहीं ले रही थी। ज़ीनत की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रात में तो जैसे वह नशे में होती थी, उसे खूब शारीरिक सुख देती थी। आदिल ने उस रिश्ते को निभाने की कोशिश की और इसी कोशिश में तीसरी बार ज़ीनत मां बनने जा रही थी, उसके दो बेटे हो चुके थे। ज़ीनत की हालत दिन -प्रतिदिन बिगड़ती चली जा रही थी। न ही दवाइयां लेतीं ,न ही बच्चों की परवाह , मानसिक रूप से परेशान थी,न जाने उसे क्या दिक्क्त थी ? बच्चों को संभाल नहीं पा रही थी और कभी-कभी तो गुस्से में आकर उन्हें पटक भी देती थी।
आदिल ने महसूस किया, ये गलती करती है और झूठ भी बोल देती है। आदिल भी उसकी हरकतों से परेशान आ चुका था, वह समझ नहीं पा रहा था ,इसके साथ मैं किस तरह से अपनी जिंदगी बसर कर पाऊंगा ? आदिल,अब ज़ीनत से थक चुका था। उसने अब फैसला कर लिया था, अब वह उसे तलाक दे देगा,न ही घर संभाल पाती है, न ही बच्चे ! किंतु जब ज़ीनत से उसने कहा -या तो तुम अपनी आदतें सुधार लो !वरना मैं तुम्हें तलाक़ दे दूंगा।
जब ज़ीनत को यह पता चला तो वह, दो बच्चों का रोना रोने लगी। दो बच्चों के साथ यह कैसे जीवन जिएगी ?तीसरा पेट में है।
आदिल काम के लिए घर से निकला था, किन्तु घर वापस नहीं आया। ज़ीनत को तो जैसे इस बात की परवाह ही नहीं थी। आदिल को गए हुए, तीन दिन हो गए ,न जाने वो कहाँ गया है ? सलमा ने ज़ीनत से पूछा - क्या आदिल तुझसे कुछ कहकर गया है ?
नहीं , मुझसे कुछ नहीं कहा।
सलमा ने सोचा -हो सकता है ,अपने घर -परिवार से मिलने गया हो ,पर उसने तो मुझसे कहा था -'जब भी मैं अपने घर जाऊंगा ,इसे साथ ले जाऊंगा। हो सकता है ,काम के सिलसिले में कहीं गया हो। आदिल को गए हुए एक सप्ताह हो गया किन्तु वो नहीं आया ,न ही उसकी कोई ख़बर... तब सलमा को एहसास हो गया ,जरूर कोई बात तो है। सलमा को अब ड़र भी लगने लगा था ,उसके ड़र ने एहसास कराया। आदिल कहीं उन सबको छोड़कर भाग तो नहीं गया।
अम्मी ! बच्चों को रोटी बना दे ! मुझे भी भूख लग रही है।
तू निहायत ही ,बेवकूफ हो गयी है ,तेरा शौहर तुझे छोड़कर चला गया और तुझे भूख लगी है। अरे, पागल !तुझे थोड़ी सी भी फ़िक्र नहीं है ,उसके जाने के बाद तेरा और इन बच्चों का क्या होगा ?
अम्मी ! एक पेट में और है।
यह तू क्या कह रही है ? तुझे कुछ होश भी है, तूने यह बात मुझे, पहले क्यों नहीं बताई ? चल! आज ही डॉक्टर से मिलकर बात करते हैं। तुझसे ये दो बच्चे तो पल नहीं रहे ,उसे कैसे पालेगी ? जिसने अभी जन्म ही नहीं लिया। चल तू, मेरे साथ डॉक्टर के चल ! कहते हुए मां लगभग घसीटते हुए उसे डॉक्टर के लेकर गई और डॉक्टर को सारी बातें बताई।
डॉक्टरनी, ने ज़ीनत की जांच की और बोली - इसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है ,इसके गर्भधारण को ज्यादा दिन भी नहीं हुए हैं ,मैं इसे गोली दे देती हूं, जिसके कारण ये बच्चा गिर जाएगा।
हमारे मज़हब में ,यह सही नहीं है किन्तु डॉक्टरनी जी क्या करें ?इसकी हालत तो देख ही रही हो ,दो बच्चे ही इससे नहीं सम्भल रहे हैं। तीसरे को कौन पालेगा ?इसके पति का भी कुछ अता -पता नहीं है ,न जाने कहाँ चला गया है ?
हाँ ,हाँ मैं समझ सकती हूँ ,आपने सही समय पर सही निर्णय लिया है। ये अभी कमज़ोर है बस इसके खाने -पीने का ध्यान रखना ,डॉक्टर ने सुझाव दिया।
इंतजार करते-करते लगभग एक महीना हो गया किंतु आदिल नहीं आया। उसे आना ही नहीं था। वह आने के लिए नहीं गया था। वह तो अपनी जिम्मेदारियों से और ज़ीनत के लापरवाही भरे व्यवहार से भाग कर गया था।
अब सलमा को अफसोस हुआ, उसने एक बार भी उसके अम्मी -अब्बू के बारे में जानने की कोशिश नहीं की। उस समय तो उसे लग रहा था ,किसी तरह से मेरी बेटी का निकाह हो जाए। आज उसे दुख हो रहा है ,जब तो एक ही बेटी नहीं पल रही थी और अब उसके साथ दो बच्चे भी हो गए। महीना पूरा होते ही मकान- मालिक ने अपना तगादा शुरू कर दिया, उसने अपना किराया मांगा।
तब सलमा ने उससे -कहा इसका शौहर बाहर कमाने गया है कुछ दिनों के बाद आ जाएगा तब ले जाना।
अब तक तैमूर और याकूब का परिवार भी बस गए थे ,उनकी बीवियां अपने-अपने शौहर के साथ, रहती थी दो कमरों का मकान था। उसमें इतनी जगह ही कहां बची थी ? अब वो क्या करें ? किसी तरह से पैसे जोड़ - कर सलमा उसके और बच्चों के खाने के लिए सामान लेकर आती थी किंतु वह भी कब तक उसकी गृहस्थी को संभालती ? उसके बच्चों के भी अपने खर्चे थे।
एक बार आदिल ने अपने शहर का नाम बताया था, तब सलमा ने सोचा -मुझे पता करवाना चाहिए। उस गांव में आदिल है भी या नहीं। आदिल और याकूब अब अपने परिवार में रम गए थे। अब उन्हें उसी बहन की परेशानियों से अलहदा भी और काम हैं। जिस बहन के लिए उन्होंने ख़ालिद का क़त्ल कर दिया। आज वो ही बहन उन्हें ग़ैर ज़िम्मेदार और बेवकूफ लग रही है।
अम्मी !आप ख्वामहाखांह ,आपा के चक्कर में रहती हो ,जब उसे ख़ुद ही अपने बच्चों की अपनी फ़िक्र नहीं तो हम कब तक उसे संभालेंगे। शौहर उन्हें छोड़कर भाग गया।
वही तो मैं कह रही हूँ ,एक बार जाकर उस शहर में पता तो लगाओ ! क्या कोई आदिल नाम का युवक रहता भी है या नहीं ? या हमें चूना लगाकर चला गया।
याकूब चला जायेगा, अभी तो मुझे फुरसत नहीं है।
अम्मी !मुझे लगता है ,अब आदिल नहीं आएगा ,आप इसका दूसरा निक़ाह कर दो !
ऐसा कैसे दूसरा निक़ाह हो सकता है ?कल को अगर आदिल आ गया तो उसको क्या जबाब देंगे ? अब ये कुंवारी नहीं है ,दो बच्चों की माँ है ,इससे कौन शादी करेगा ?
जीनत अपनी माँ से अपने बच्चों के खाने का इंतज़ाम करने के लिए कहने आई थी ,अपने घरवालों की बातें सुनकर दरवाज़े पर ही ठहर गयी।
