zeenat [part 41]

सैयद और  नाज़िम की ख़ालिद से अच्छी दोस्ती हो गयी। वो उनसे बात तो करता था किन्तु एक दूरी बनकर रखता था। किन्तु नाज़िम भी अपने काम के वास्ते उसके मन की बात जानना चाहता। तब ख़ालिद कह देता अपने काम से काम रखो !

भाईजान  !हमें तो अपने काम से ही मतलब है ,तुम्हें उस्ताद मान लिया है ,तो थोड़े से गुर हमें भी सिखा दो !

सिखा तो रहा हूँ ,जैसा कहा है ,वैसा करोगे ,तो काम हो जायेगा। ऐसा मैं, किसी को नहीं बताता किन्तु तुम्हारी मुहब्बत के कारण, मैंने जैसा बताया है ,वैसा करो !


ये बात तो है ,भाईजान ! पकड़े गए तो.... लड़की मिले या न मिले ,मार बहुत पड़ेगी और लड़की भी हाथों से जाएगी ,सैयद ने घबराकर कहा।  

वो तुम्हारे हाथों से तो पहले ही जा चुकी है। अब तो तुम्हें ऐसी तरक़ीब लड़ानी है, जिससे वो तुम्हारे करीब आ जाये। 

चलो ! तुम्हारी ये बात मान ली ,पर लड़की को लाकर कहाँ रखेंगे ?

अब ये बात भी मैं ही बताऊँ ,कोई खाली जगह देख लो !

हमें तो कोई खाली जगह नहीं मिल रही , सैयद ने सोचते हुए कहा। 

मेरे दोस्त का एक पुराने कलपुर्जों का गोदाम है ,हम उसे लेकर वहां कैद कर लेंगे,नाज़िम ने सुझाया।  

क्या वहां कोई आता -जाता नहीं है ,ख़ालिद ने पूछा। 

शाम को तो गोदाम खाली हो जाता है ,अगले दिन उसे वापस छोड़ देंगे ,नाज़िम ने अपना तरीक़ा बताया। 

इस बीच कोई आ गया तो क्या करोगे ? उस लड़की ने शोर मचा दिया ,तो तब क्या करोगे ?

हाँ ,ये तो हमने सोचा ही नहीं ,अब क्या करें ?भाईजान !तुमने हमारी इतनी मदद की है तो एक मदद और कर दो !ऐसी कोई जगह बता दो ! जहाँ रातभर उस लड़की को रख सकें। 

ख़ालिद सोचने लगा ,तब बोला -मेरे दोस्त का एक फॉर्म हॉउस है ,वो शहर से दूर है किन्तु वहां पलंग भी है और भी सुविधा है। 

तुम्हें उस लड़की को लाकर वहां  रातभर के लिए रखना है ,और फिर उसे छोड़ने कैसे जायेंगे ?

मरना है ,क्या ?

क्या मतलब ? उसे वापस छोड़ने नहीं जाना है। 

नहीं ,उसे किसी सुनसान खंडहर में छोड़ देना, उसके घरवाले उसे अपने आप ढूंढ़ लेंगे। तुम छोड़ने जाओगे ,पकड़े गए तो वे तुम्हारी बोटी -बोटी नोच लेंगे। बस ऐसे दिखाना है ,तुम कुछ जानते ही नहीं ,तुम्हें कुछ पता ही नहीं। 

उसको रातभर रखकर छोड़ आना है। 

क्या मज़ाक चल रहा है ,उसके साथ तुम्हें रात बितानी है ,तभी तो उसे एहसास होगा उसकी दुनिया लुट चुकी है ,अब वो अपने होने वाले शौहर के लायक नहीं रही। 

भाईजान ! मैं कोशिश करूंगा ,वैसे ये मेरा पहली बार है, साथ मत छोड़ना ! 

अरे !मैं भी वहीं रहूंगा ,तुम्हें पसंद न आई तो... कहते हुए नाज़िम के कंधे पर हाथ रखकर बोला -हम दोनों संभाल लेंगे। 

उस्ताद !अब तो मुझे पक्का यक़ीन हो गया है ,ये वाकई में उस्ताद हैं ,इन्होने ऐसा कुछ तो किया है। हम तो आपस में दोस्त हैं ,बताओ ! न... वो कौन थी ?नाज़िम ने पूछा। 

आज ख़ालिद का मूड़ कुछ अच्छा था या फिर उसे उन दोनों पर भरोसा हो गया था। तब वो बताने लगा -'मुझे भी ,उसे देखते ही प्यार हो गया था ,उसको देखकर ही मैंने जाना इश्क़ क्या है ? वो मेरे दिलो -दिमाग़ पर छा गयी थी  ,किन्तु उसने मेरे इश्क़ को बड़ी बेदर्दी से ठुकरा दिया। मैंने भी उसे अपने क़रीब आने को मजबूर कर दिया। वैसे एक बात कहूँ ,जब मैंने उसके साथ रात बिताई ,उसके बाद न जाने क्यों ? दिल में उसके लिए वो जुनून नहीं रहा ,अब चाहे कहीं भी जाये। 

यार ! तुम तो बड़े दग़ाबाज हो ,उसे कुचलकर, मसलकर छोड़ दिया ,उसके जख़्मों पर मरहम लगाना भी ठीक नहीं समझा। 

वो मेरी थी ही, कब ? वो तो किसी और की होने जा रही थी ,तब क्या वो मेरी हो जाती ?जब उसे पता चलता मैंने उसके साथ ज़बरदस्ती की है। एक रात का सुकून तो मिला।

 तब, उसका क्या हुआ ?

होना क्या था ?उसका निक़ाह टूट गया ,लोगों को अपने घर की बगल में कोई बीमार ,मजबूर ,परेशानी की हालत में पड़ा है ,यह दिखाई दे या न दे किन्तु ये जरूर पता चल जायेगा। फ़लाने की लड़की कहाँ और किसके साथ घूम रही थी, या किसके साथ भाग गयी ? उसका भी पता चल ही गया और रिश्ता भी टूट गया। 

यह तो बहुत बुरा हुआ, भाई जान ! अब उस लड़की की जिंदगी तो बर्बाद हो गई , उसके घर वालों ने निक़ाह  नहीं किया तो उसका क्या होगा ?

तुम अपनी सोचो ! उसकी फिक्र मत करो ! मैं अपने आप उसे, संभाल लूंगा तुम अपना देखो ! कहते हुए उसने अपने दोस्त का वह सुनसान जगह पर  'फार्म हाउस 'बता दिया और सारी योजना भी बता दी। 

भाई जान ! अब तो तुम्हें भी , हमारे साथ ही रहना होगा। जब तक काम पूरा नहीं हो जाता। 

 हां, हां, मैं तुम लोगों के साथ ही हूं, कहते हुए उसने उन दोनों को विश्वास दिलाया और चार दिन बाद मिलने की बात तय हुई। चार दिन बाद वो लोग, ख़ालिद के दोस्त के फार्म हाउस पर मिले। उनके साथ में कोई था। जो कमरे में बंद था। भाईजान  ! तुमने हमारी इतनी मदद की है ,तुम्हारा बहुत -बहुत शुक्रिया ! कहते  हुए सैयद ने हाथ बढ़ाया। 

अरे ,शुक्रिया किस बात का ?तुम्हारी इतनी मदद की है ,उस लड़की से तो मिलवा दे। 

उस्ताद !उस लड़की से तुम कैसे मिल सकते हो ? वो तो हमारे भाईजान की जान है। यदि हमने मिलवा भी दिया। तो उसे पता नहीं चल जायेगा। उसे, हमने अग़वा किया है। 

चुप ! तुम्हारी इतनी मदद की मुझे भी तो मेहनताना मिलना चाहिए ,अचानक ही ख़ालिद के तेवर बदल गए।  

तुम्हारी  नियत खराब है ,हमारी मदद के बहाने , तुम तो अपना 'उल्लू सीधा कर रहे थे। ''नाज़िम चिल्लाकर बोला। 

हाँ तो... क्या कर लोगे ? यहीं  काटकर रख दूंगा ,किसी को पता भी नहीं चलेगा। ख़ालिद उन दोनों से उम्र में ही नहीं, कद -काठी में भी बहुत बड़ा था। अब उन लड़कों को एहसास हुआ। हम इसे नहीं फंसा रहे थे ये हमें फंसा रहा था। वो जानता था ,वो उन लड़कों को आसानी से ''धूल चटा सकता है।''उन पर काबू भी कर लिया, तब वो अंदर गया। वो तो उस लड़की के लिए ,उन्हें बहकाकर यहां तक ले आया था। इलाक़ा सुनसान ही था। उस जगह से सड़क भी काफी दूर थी। उसने देखा ,अँधेरे में एक मोहतरमा बैठी हैं  ,उसके बुरखे से मुँह ढ़का हुआ था।अंदर अँधेरा भी था।  हम्म्म्म, हुंम्म  की आवाज आ रही थी। 

वो उसके करीब गया और बोला -मुझे बेहद अफ़सोस है ,तुम इन लड़कों के झांसे में आ गयीं और वे मेरे झांसे में आ गये। ये तुम्हारा निक़ाह तुड़वाना चाहते थे किन्तु जब मैंने सुना तुम बहुत खूबसूरत हो ,मुझसे रहा नहीं गया और तुमसे मिलने के लिए बेक़रार हो उठा। अब तुम किसी और की होने से पहले मेरी बन जाओगी। 

हम्म्म ,हम्म्म 

अच्छा तुम्हें गुस्सा आ रहा होगा  ,तुम्हारा तो निक़ाह भी होने  वाला है ,वैसे मेरी कोई गलती नहीं है। मैं तो तुम्हें जानता भी नहीं, किन्तु अब जान जाऊंगा, कहते हुए  वो आगे बढ़ा ,जैसे हो वो आगे बढ़ा  और उसके करीब पहुंचा ,तभी तेज धार चाकू उसके हाथ पर पड़ा। वार इतना तेज़ था ,एक ही वार में उसका हाथ उसकी कलाई से अलग हो गया। उसकी चीख़ के साथ -साथ एक और चीख़ भी सुनाई दी। ख़ालिद अब खतरा भांप गया और बाहर की तरफ भागा ,पीछे से वो बुरखेवाली भी भागी। जिसमें पहले से ही याक़ूब बैठा हुआ था। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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