Saheli

कहां से लाऊं ? उस सखी को, जो बरसों पहले चली गई।

बचपन की यादों में छुपी ,खेलती -मचलती क्यों चली गयी?

हँस लूँ ,गा लूँ ,या फिर याद कर उसको बार -बार मुस्काऊँ।

इतनी अच्छी , इतनी सच्ची, उस जैसी सखी कहाँ से लाऊँ  ?


इक बार बतला देती ,बहुत हुई दोस्ती, अब जाना है।

मिलना और बिछुड़ना , जीवन का यही तराना है। 

यादों के गलियारों में कभी -कभी आज भी आ जाती है।

बचपन की, स्वर्णिम यादों की, फिर से याद दिलाती है।


समझ लेती थी ,पहले मुझसे, मेरे ही अरमानों को.....

समझा देती थी ,दिखलती थी ,न देखी उन राहों को ,

वो संग रह हंसना -बतलाना, वो वक़्त कहाँ से लाऊँ ?

रोता छोड़ गयी सबको ,उस जैसा दिल कहाँ से लाऊँ ?


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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