दोस्तों ! वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी,' चोर चोरी से जाए ,हेरा फेरी से न जाए !'' या फिर'' बन्दर कितना भी बूढ़ा हो जाए, पर गुलाटी मारना नहीं छोडता '' कुत्ते की दुम, कभी सीधी नहीं होती '' यह लोकोक्तियां किसी भी व्यक्ति के स्वभाव उसके व्यवहार और उसकी आदतों को दर्शाती हैं ।ये सभी लोकोक्तियाँ मैं, आपको क्यों बता रही हूँ ? ये सभी लोकोक्तियाँ हम अपने किसी भी मित्र को आसानी से कह जाते हैं ,जिसके स्वभाव से हम पहले से ही परिचित हों। कुछ लोगों का स्वभाव ही ऐसा होता है। उनकी उम्र कितनी भी हो जाये ? किन्तु उनकी कुछ आदतें, कभी नहीं छूटतीं।
बचपन लड़कपन में बीतता है ,जवानी नए अनुभव करती है ,और जैसे -जैसे उम्र आगे बढ़ती जाती है ,तो कुछ लोग समय के साथ गंभीर हो जाते हैं। उनके जीवन में ठहराव आने लगता है। अपने अनुभवों से कुछ सीख लेते हैं ,अपनी भावी पीढ़ी को कुछ सुझाव देते हैं।
किन्तु कुछ लोग, उम्र कितनी भी हो जाये ? किन्तु अपनी कुछ आदतें नही छोड़ते ,और गुनगुनाने लगते हैं ' ''दिल तो बच्चा है ,जी !''कुछ तो उनकी ऐसी आदतों को' छिछोरी हरकतें' कहते हैं। किन्तु वे इसे ''दरियादिली ''कहते हैं। जीने का कोई भी अंदाज हो , बस दिल खुश रहना चाहिए।
अब हमारे चतुर भार्गव को ही ले लीजिए ! उसकी कहानी अधूरी रह गई थी,उसके जीवन के कुछ पहलू समय के आग़ोश में समाये थे। जीवन तो चलता ही रहता है। समय बदलता है , कुछ लोग कहते हैं -उम्र के साथ इंसान को समझ जाने लगती है और वह , बुजुर्गों की श्रेणी में आने के साथ-साथ, समझदार हो जाता है। किंतु कुछ लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है। उम्र चाहे कोई भी हो, अपने आप को जिंदा दिल रखने के लिए कोई न कोई साधन जुटा ही लेते हैं। फिर उम्र चाहे कोई भी हो ,बल्कि वो कहते नजर आएंगे - ''उम्र बढ़ रही है ,हम नहीं '' उम्र पचपन की दिल बचपन का' ,अपने अंदर के बच्चे को जिन्दा रखिये ! तभी जीवन अच्छे से जी पाएंगे। जिंदगी भर क्या परेशानियों का रोना ही रोते रहोगे ? उम्र चाहे जो भी हो, ख़ुश रहकर जीना सीखो !
अब ऐसे में यह उस इंसान पर निर्भर करता है ,वो ज़िंदगी को किस तरह से देखता है ? कैसे जीना चाहता है ? कुछ लोग तो, बढ़ती उम्र के साथ अपना शौक पूरा करना चाहते हैं। तो कुछ लोग ,फ़ेसबुक पर वीडियो देखकर दिन बिताते हैं। कुछ लोग, अपने रोमांस को फिर से जीना चाहते हैं ,और शायरी -कविता लिखकर अपने दिल को सुकूँ देते हैं। उम्र कोई भी हो ,अपने को खुश रखने का तरीक़ा कोई भी हो। साधन कोई भी हो किन्तु उद्देश्य तो खुशियां ढूँढना ही है , ख़ुश रहना है।
ऐसा ही ये अपना '' चतुर भार्गव '' है । जिसने जिंदगी के इतने वर्षों तक उसने बड़े उतार -चढ़ाव देखे ,बहुत परेशानियां भी देखीं, किन्तु उनसे सीख लेकर भी वह गंभीर नहीं हुआ। कुछ तो यह कहते हैं कि इसने जिंदगी को ही मजाक बना लिया है किंतु उसे लगता है जिंदगी भी तभी जी जा सकती है जब इसमें हंसी मजाक चलता रहे वरना बोझ लगने लगती है।
उसने कभी जिंदगी को गंभीरता से लिया ही नहीं , ऐसा नहीं है, कि उसने जीवन में परेशानियां नहीं देखीं। उसका सोचना है ,परेशानी तो हर मनुष्य के जीवन में आती -जाती रहती हैं , इनके कारण कोई जीना तो नहीं छोड़ देता। जीवन को जितनी गंभीरता से लिया जाएगा, यह जीवन जीना उतना ही मुश्किल हो जाएगा।
''चतुर भार्गव ''अब उम्र के उस पड़ाव पर है, जहां उसके बच्चे बड़े हो चुके हैं , अपनी जिम्मेदारियों को वह बच्चों को सौंप देता है और निश्चिंत होकर जीना चाहता है। वह निश्चिंत कब नहीं था ? उसके साथ रहने वाले उसकी आदतों से भले ही परेशान हो जाते थे। अब तो वक्त भी बहुत बदल गया है। लगता है ,कि अब तो समय के साथ ,वो भी बदल गया होगा। मुझे ही नहीं ,समय के साथ सभी को यही लगता है कि समय के साथ इसकी सोच में, व्यवहार में, थोड़ी तो गंभीरता और शालीनता आएगी। क्या ऐसा हो सका ? यह तो समय ही बताएगा।
एक दिन उर्वशी अपने फोन पर मैसेंजर में एक मैसेज देख रही थी, उसे किसी ने लिखा था -हैलो !उसे देखकर वो सोचने लगी ,ये कौन हो सकता है ? उसका नाम था - 'सी.बी.एच.'
तभी उसे एक मैसेज आया -हाय ! कैसी हो ? और क्या हाल हैं ?
आप कौन ? मैंने आपको पहचाना नहीं।
कैसे पहचानोगी ? जब तुमने हमें अपना दोस्त ही नहीं समझा।
जब मैं, आपको जानती ही नहीं तो, दोस्ती कैसी ?
कभी -कभी अनजान लोगों को भी दोस्त बनाकर देखना चाहिए ,तभी तो अच्छी और बेहतर दोस्ती में फ़र्क नजर आएगा।
अच्छा ! ये बताओ ! क्या तुम अभी भी वैसी ही सुंदर और जवान हो ? या फिर कुछ बदलाव आया है, वैसे मैंने तुम्हारी डीपी देखी है ,अभी भी तुम, बहुत खूबसूरत हो।
ओह !हैलो ! ज्यादा चेंपू बनने की ज़रूरत नहीं है। तुम मुझे कबसे जानते हो ?अपने काम से काम रखो !
उर्वशी सोचने पर मजबूर हो गई, यह किसका मैसेज हो सकता है, यह कौन है, क्या यह मुझको जानता है ?
तुम तो ऐसी न थीं ,तुम तो बड़े सलीक़े से बात करती थीं। अब उस मैसेज को पढ़कर उर्वशी को लगा ,ये अवश्य ही ,मुझको जानता है। मेरे साथ मज़ाक कर रहा है। उसने अपनी सोच दौड़ानी आरम्भ की ,ये कौन हो सकता है ?मेरा कोई रिश्तेदार ,तब सोचा ,मामा का लड़का या मौसी ,या फिर चाचा का ,वे भला मुझे इस तरह के मैसेज क्यों करेंगे ?मज़ाक ही करना हुआ ,तो इस तरह थोड़े ही न करेंगे। उन्हें तो अपनी बीवियों और गृहस्थी से ही फुरसत नहीं है। मेरा तो कोई ''बॉय फ्रेंड ''भी नहीं था, फिर ये कौन हो सकता है ?उस मैसेज के चक्कर में वो सभी रिश्तेदारियों में, सहेलियों में ,उनके भाइयों तक के विषय में सोचकर आ गयी किन्तु उसे समझ नहीं आया ,ये इंसान कौन हो सकता है ?
अरे !क्या हुआ ?चली गयीं क्या ? कम से कम कल का वायदा तो कर जाती।' बाय' का मौका भी नहीं दिया , उसने 😃 भेजी।
उर्वशी ने ,वो लाइनें पढ़ीं और चुपचाप अपना फोन बंद कर दिया। तभी कुछ सोचकर फोन उठाया ,देखूं तो भला किस -किसने 'फ्रेंड रिक़्वेस्ट' भेजी है ?शायद कोई तो पहचान में आये।
